एंड्रॉयड का लॉलीपॉप मोमेंट: 11 साल पहले आया अपडेट जिसने फीके वर्जन को मॉडर्न बनाया, मटेरियल डिजाइन की विरासत आज भी एंड्रॉयड 16 में।
एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम की दुनिया में 2014 का साल एक मील का पत्थर साबित हुआ। जब तक एंड्रॉयड 5.0 लॉलीपॉप नहीं आया, तब तक यह सिस्टम
एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम की दुनिया में 2014 का साल एक मील का पत्थर साबित हुआ। जब तक एंड्रॉयड 5.0 लॉलीपॉप नहीं आया, तब तक यह सिस्टम फीका, बिखरा हुआ और पुराने जमाने का लगता था। कपकेक, सैंडविच, किटकैट जैसे नामों वाली वर्जन ने तो बुनियादी सुधार किए, लेकिन लॉलीपॉप ने पूरा खेल पलट दिया। 12 नवंबर 2014 को गूगल ने इस अपडेट को नेक्सस डिवाइस पर रोलआउट शुरू किया। मटेरियल डिजाइन, तेज परफॉर्मेंस, बेहतर बैटरी लाइफ और नए फीचर्स ने एंड्रॉयड को पहली बार मॉडर्न, एकसमान और आकर्षक बनाया। आज 11 साल बाद भी इसकी छाप एंड्रॉयड 16 में साफ दिखती है। आइए जानते हैं कैसे लॉलीपॉप ने एंड्रॉयड को नई जिंदगी दी और पुराने वर्जनों से क्या फर्क पड़ा।
एंड्रॉयड की शुरुआत 2008 में हुई, जब पहला फोन एचटीसी ड्रीम लॉन्च हुआ। शुरुआती वर्जन 1.0 और 1.1 बेसिक थे, जिनमें टचस्क्रीन सपोर्ट, जीपीएस और वेब ब्राउजिंग जैसे फीचर्स थे। लेकिन ये ज्यादा कुछ नहीं थे। फिर आया एंड्रॉयड 1.5 कपकेक, जो 27 अप्रैल 2009 को रिलीज हुआ। यह पहला वर्जन था जिसका नाम डेजर्ट से इंस्पायर्ड था। कपकेक ने ऑन-स्क्रीन कीबोर्ड जोड़ा, जिससे फिजिकल कीबोर्ड की जरूरत कम हुई। वीडियो रिकॉर्डिंग और यूट्यूब पर अपलोड का ऑप्शन आया। बैटरी यूज को ऐप के हिसाब से ट्रैक करने की सुविधा मिली। लेकिन इंटरफेस अभी भी सादा था, एनिमेशन कम थे और मल्टीटास्किंग सीमित। फिर 2009 में डोनट (1.6) आया, जिसने मल्टीटच जेस्चर और बेहतर टेक्स्ट-टू-स्पीच जोड़ा। फिर एक्लेयर (2.0-2.1) ने लाइव वॉलपेपर और स्पीच रिकग्निशन दिया।
फ्रोयो (2.2, 2010) ने क्लाउड सिंकिंग और स्पॉटलाइट सर्च लाया। जिंजरब्रेड (2.3, 2010) ने एनएफसी सपोर्ट जोड़ा। हनीकॉम्ब (3.0-3.2, 2011) टैबलेट्स के लिए था, जिसमें हनीकॉम्ब ट्रांजिशन एनिमेशन थे। आइसक्रीम सैंडविच (4.0, 2011) ने फोन और टैबलेट को एक किया। फेस अनलॉक, डेटा यूज ट्रैकिंग और रिबन एनिमेशन आए। जेलीबीन (4.1-4.3, 2012-2013) ने गूगल नाउ, स्मूद एनिमेशन और एक्सपैंडेबल नोटिफिकेशन दिए। किटकैट (4.4, 2013) ने प्रिंटिंग सपोर्ट और एम्बिएंट डिस्प्ले जोड़ा। ये वर्जन अच्छे थे, लेकिन इंटरफेस बिखरा लगता था। ग्रेडिएंट्स, बेवल्स और पुरानी आइकॉन्स से यह पुराना लगता था। परफॉर्मेंस लो थी, बैटरी जल्दी खत्म हो जाती। मल्टीटास्किंग में रिसेंट ऐप्स लिस्ट बेसिक थी।
फिर आया लॉलीपॉप, जो एंड्रॉयड को रीइन्वेंट करने वाला अपडेट था। 25 जून 2014 को गूगल आई/ओ में इसे एंड्रॉयड एल के नाम से अनवील किया गया। डेवलपर प्रीव्यू नेक्सस 5 और नेक्सस 7 पर 26 जून को आया। 3 नवंबर को सोर्स कोड रिलीज हुआ और 12 नवंबर को ओटीए अपडेट नेक्सस 4,5,6,7,9,10 पर शुरू हुआ। यह पहला वर्जन था जो 64-बिट आर्किटेक्चर को सपोर्ट करता था। इसका कोडनेम लेमन मेरिंग्यू पाई था। लॉलीपॉप ने 5000 से ज्यादा नए एपीआई ऐड किए, जो डेवलपर्स के लिए वरदान थे। लेकिन यूजर्स के लिए सबसे बड़ा चेंज मटेरियल डिजाइन था। यह डिजाइन लैंग्वेज पेपर-लाइक फील देती थी। कार्ड-बेस्ड इंटरफेस, शैडोज, ब्राइट कलर्स और स्मूद एनिमेशन से एंड्रॉयड मॉडर्न लगने लगा। पुराने वर्जनों में आइकॉन्स फ्लैट लेकिन बोरिंग थे, यहां सब कुछ इंट्यूशनल और ब्यूटीफुल था।
मटेरियल डिजाइन ने एंड्रॉयड को फोन, टैबलेट, वॉच, टीवी और कार सिस्टम पर एकसमान बनाया। नोटिफिकेशंस अब लॉकस्क्रीन पर दिखते थे, जो टॉप पर बैनर की तरह आते। रिसेंट ऐप्स में मल्टीपल कार्ड्स दिखते, जैसे ब्राउजर के टैब्स। नेविगेशन बटन्स बदले गए: बैक आइकॉन त्रिकोण, होम सर्कल और रिसेंट्स स्क्वायर हो गए। यह सिम्पल और जियोमेट्रिक था। परफॉर्मेंस में आर्ट (एंड्रॉयड रनटाइम) ने डाल्विक को रिप्लेस किया। आर्ट से ऐप्स 2-3 गुना तेज लोड होते और 36 प्रतिशत बेहतर बैटरी लाइफ मिलती। प्रोजेक्ट वोल्टा ने बैटरी सेवर मोड जोड़ा, जो 90 मिनट एक्स्ट्रा टाइम देता। जॉब शेड्यूलिंग और टास्क बैचिंग से बैकग्राउंड एक्टिविटी कम हुई। बैटरी हिस्टोरियन टूल से ऐप्स का यूज ट्रैक होता।
अन्य फीचर्स में ओके गूगल कमांड हैंड्स-फ्री था। मल्टी-यूजर प्रोफाइल्स फोन्स पर आए, गेस्ट मोड से शेयरिंग आसान हुई। स्मार्ट लॉक ने ट्रस्टेड डिवाइस से अनलॉक किया। नोटिफिकेशंस में प्रायोरिटी मोड से इंपॉर्टेंट अलर्ट्स ही आते। लॉकस्क्रीन से वाई-फाई और ब्लूटूथ कनेक्ट होता। रॉ इमेज फॉर्मेट सपोर्ट से फोटोग्राफी बेहतर हुई। सिक्योरिटी में एसईलिनक्स एनफोर्सिंग मोड और डिफॉल्ट एनक्रिप्शन जोड़ा गया। लेकिन शुरुआत में बग्स थे, जैसे मेमोरी लीक और वाई-फाई इश्यूज। 5.1 अपडेट ने इन्हें फिक्स किया। लॉलीपॉप ने एंड्रॉयड को आईओएस से कॉम्पिटिटिव बनाया। यूएक्स अवॉर्ड्स में मटेरियल डिजाइन को गोल्ड मिला।
लॉलीपॉप की विरासत आज भी बरकरार है। मटेरियल डिजाइन एंड्रॉयड 16 में भी बेस है। कार्ड-बेस्ड नोटिफिकेशंस, शैडोज और एनिमेशन आज के वर्जन में विकसित रूप में हैं। आर्ट रनटाइम अब स्टैंडर्ड है, जो परफॉर्मेंस को बूस्ट देता। प्रोजेक्ट वोल्टा के आइडियाज बैटरी ऑप्टिमाइजेशन में यूज होते। 64-बिट सपोर्ट ने हाई-एंड डिवाइस को सपोर्ट किया। 2024 में गूगल ने प्ले सर्विसेज सपोर्ट खत्म किया, लेकिन 1 प्रतिशत डिवाइस अभी भी यूज करते हैं। लॉलीपॉप ने एंड्रॉयड को ग्लोबल बनाया। नेक्सस 6 और 9 के साथ लॉन्च हुआ, जो फ्लैगशिप बने। डेवलपर्स ने ऐप्स को मटेरियल के अनुरूप अपडेट किया।
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