28 मार्च 2026: ईंधन दरों में पूर्ण स्थिरता, दिल्ली सबसे सस्ता और कोलकाता सबसे महंगा!

देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया है। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें लगभग 105 डॉलर प्रति

Mar 28, 2026 - 11:24
Mar 28, 2026 - 11:36
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28 मार्च 2026: ईंधन दरों में पूर्ण स्थिरता, दिल्ली सबसे सस्ता और कोलकाता सबसे महंगा!
28 मार्च 2026: ईंधन दरों में पूर्ण स्थिरता, दिल्ली सबसे सस्ता और कोलकाता सबसे महंगा!

28 मार्च 2026 को पूरे देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया है। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें लगभग 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जिसके चलते घरेलू बाजार में भी स्थिरता बरकरार है। दिल्ली जैसे शहरों में पेट्रोल अभी भी 94 रुपये के स्तर पर है, जबकि कोलकाता और मुंबई जैसे महानगरों में यह 103 से 105 रुपये के ऊपर पहुंच चुका है। उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों में भाव एक-दूसरे के काफी करीब हैं, जो राज्य की कर संरचना को दर्शाता है। तमिलनाडु, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में थोड़ी भिन्नता है, जो स्थानीय वैट और परिवहन लागत पर निर्भर करती है।

नीचे दी गई तालिका में दिल्ली, नोएडा, लखनऊ, कानपुर, बरेली, शाहजहांपुर, बाराबंकी, मुरादाबाद, आगरा, हरदोई, कोलकाता, पुणे, मुंबई, असम (गुवाहाटी प्रतिनिधि), चेन्नई (तमिलनाडु), मध्य प्रदेश (भोपाल प्रतिनिधि) और राजस्थान (जयपुर प्रतिनिधि) आदि जगहों पर आज के पेट्रोल और डीजल के भाव दिए गए हैं।

जगह पेट्रोल की कीमत (रू/लीटर) डीजल की कीमत (रू/लीटर)
दिल्ली 94.77 87.67
नोएडा 94.90 88.00
लखनऊ 94.69 87.81
कानपुर 94.44 87.51
बरेली 94.66 87.50
शाहजहांपुर 94.85 88.00
बाराबंकी 94.98 87.92
मुरादाबाद 94.89 88.18
आगरा 94.51 87.92
हरदोई 95.00 88.10
कोलकाता 105.41 92.02
पुणे 103.95 90.50
मुंबई 103.54 90.03
असम (गुवाहाटी) 98.21 89.57
चेन्नई (तमिलनाडु) 100.85 92.39
मध्य प्रदेश (भोपाल) 106.50 91.90
राजस्थान (जयपुर) 104.85 90.21
28 मार्च 2026 को ये भाव क्यों इस स्तर पर हैं और इनका आम आदमी पर क्या असर पड़ रहा है। पेट्रोल और डीजल की कीमतें हर रोज सुबह 6 बजे अपडेट होती हैं, जो जून 2017 से लागू डायनामिक फ्यूल प्राइसिंग सिस्टम का हिस्सा है। पहले ये कीमतें हर 15 दिन में बदलती थीं, लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, डॉलर-रुपया विनिमय दर, रिफाइनरी लागत और राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले वैट तथा अन्य टैक्स के आधार पर रोजाना बदलाव होता है। आज के दिन कच्चे तेल की कीमत में कोई उछाल नहीं देखा गया, इसलिए देशभर में स्थिरता बनी हुई है। पिछले 12 महीनों में डीजल की कीमत कई जगहों पर लगभग अपरिवर्तित रही है, जो उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात है।

दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये और डीजल 87.67 रुपये पर स्थिर है। यहां वैट की दर कम होने के कारण देश के सबसे सस्ते ईंधन वाले शहरों में शामिल है। नोएडा, जो दिल्ली-एनसीआर का हिस्सा है, में पेट्रोल थोड़ा ऊंचा 94.90 रुपये है क्योंकि यह उत्तर प्रदेश में आता है और यहां परिवहन व अन्य लागत अलग है। लखनऊ, कानपुर, बरेली जैसे उत्तर प्रदेश के शहरों में भाव 94.44 से 94.98 रुपये तक हैं। ये छोटे अंतर राज्य के विभिन्न जिलों की लोकल टैक्स संरचना और डिपो से दूरी के कारण हैं। उदाहरण के लिए आगरा में पेट्रोल सबसे कम 94.51 रुपये है, जबकि हरदोई में यह 95 रुपये के करीब पहुंच जाता है। इसी तरह डीजल भी 87.50 से 88.18 रुपये के बीच घूम रहा है। ये भाव किसानों, ट्रक ड्राइवरों और रोजाना commuting करने वालों के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि उत्तर प्रदेश में सड़क परिवहन बहुत सक्रिय है।

कोलकाता में पेट्रोल 105.41 रुपये और डीजल 92.02 रुपये है, जो देश के महंगे शहरों में शुमार है। यहां पश्चिम बंगाल सरकार की वैट दर ऊंची होने और पूर्वी क्षेत्र में परिवहन चुनौतियों के कारण ऐसा है। मुंबई में पेट्रोल 103.54 रुपये और डीजल 90.03 रुपये है। महाराष्ट्र में भी टैक्स संरचना मजबूत है, जिससे पुणे जैसे पड़ोसी शहर में भी पेट्रोल 103.95 रुपये तक पहुंच जाता है। चेन्नई और तमिलनाडु में पेट्रोल 100.85 रुपये तथा डीजल 92.39 रुपये है। दक्षिण भारत में ईंधन की मांग ज्यादा होने और स्थानीय कर नीतियों के कारण ये स्तर बने हुए हैं।

असम के गुवाहाटी में पेट्रोल लगभग 98.21 रुपये और डीजल 89.57 रुपये है। पूर्वोत्तर राज्यों में भौगोलिक दूरी और पाइपलाइन परिवहन की कमी के बावजूद भाव अपेक्षाकृत नियंत्रित हैं। मध्य प्रदेश के भोपाल में पेट्रोल 106.50 रुपये के आसपास और डीजल 91.90 रुपये है। यहां मध्य भारत की औद्योगिक गतिविधियों के कारण मांग ज्यादा है। राजस्थान के जयपुर में पेट्रोल 104.85 रुपये और डीजल 90.21 रुपये है। रेगिस्तानी क्षेत्र होने के कारण यहां परिवहन लागत बढ़ जाती है। इन सभी भावों को अच्छी तरह वेरीफाई किया गया है। goodreturns.in जैसी साइट से मूल डेटा लिया गया और cardekho, financialexpress, ndtv जैसी अन्य विश्वसनीय जगहों से क्रॉस चेक किया गया। कहीं भी एक पैसे का अंतर नहीं पाया गया जहां स्रोत एक ही तारीख के हों। यह सुनिश्चित करता है कि उपभोक्ता बिना किसी भ्रम के इन आंकड़ों पर भरोसा कर सकें। आज कोई नया कर या वैश्विक उछाल नहीं होने से भाव स्थिर हैं, लेकिन अगर कच्चा तेल 110 डॉलर के ऊपर चला जाए तो आने वाले दिनों में बढ़ोतरी संभव है।

ईंधन की कीमत कैसे तय होती है, इसकी पूरी प्रक्रिया समझना जरूरी है। सबसे पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत तय होती है, जो ओपेक और गैर-ओपेक देशों की उत्पादन नीति पर निर्भर करती है। फिर यह तेल भारत के रिफाइनरी तक पहुंचता है, जहां इसे पेट्रोल और डीजल में बदलने की लागत जुड़ती है। इसके बाद केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी लगाती है, जो कुल कीमत का बड़ा हिस्सा है। राज्य सरकारें वैट, एंट्री टैक्स और अन्य लोकल चार्जेस जोड़ती हैं। कुल मिलाकर 50 से 60 प्रतिशत तक टैक्स ही ईंधन की कीमत में शामिल होता है। यही कारण है कि दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भाव कम हैं, क्योंकि यहां वैट की दर अपेक्षाकृत कम रखी गई है। वहीं कोलकाता, मुंबई या चेन्नई में राज्य सरकारों की राजस्व जरूरतों के कारण टैक्स ज्यादा है। आज के इन भावों का आम आदमी पर सीधा असर पड़ रहा है। ट्रक और बस ऑपरेटरों के लिए डीजल की कीमत बढ़ने से माल ढुलाई महंगी हो जाती है, जिसका बोझ अंततः उपभोक्ता पर आता है। किसान ट्रैक्टर और पंप सेट के लिए डीजल इस्तेमाल करते हैं, इसलिए खेती की लागत प्रभावित होती है। शहरों में रोजाना ऑफिस जाने वाले लोग पेट्रोल की कीमत देखकर बजट बनाते हैं। उत्तर प्रदेश के छोटे शहरों जैसे बरेली, शाहजहांपुर, बाराबंकी या हरदोई में जहां औसत आय कम है, वहां 94-95 रुपये का पेट्रोल भी बोझ है। वहीं मुंबई या कोलकाता जैसे शहरों में 103-105 रुपये का पेट्रोल मध्यम वर्ग की जेब पर ज्यादा असर डालता है।

पिछले कुछ महीनों की तुलना करें तो 2025 के अंत से अब तक डीजल की कीमत कई जगहों पर लगभग स्थिर रही है। यह तेल कंपनियों की कुशल प्रबंधन और सरकार की निगरानी का परिणाम है। हालांकि पेट्रोल में छोटे-छोटे उतार-चढ़ाव देखे गए हैं, लेकिन कुल मिलाकर कोई बड़ी उछाल नहीं आई। अगर हम वैश्विक संदर्भ देखें तो कच्चे तेल की कीमत 100-105 डॉलर के दायरे में बनी हुई है, जो भारत जैसे आयातक देश के लिए अच्छी खबर है। रुपये की मजबूती भी मदद कर रही है। उपभोक्ताओं के लिए कुछ व्यावहारिक सलाह भी जरूरी है। सबसे पहले अपनी गाड़ी की माइलेज चेक करें। पुरानी गाड़ियां ज्यादा ईंधन खाती हैं, इसलिए सर्विसिंग नियमित कराएं। कारपूलिंग या पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल बढ़ाएं। लंबी ड्राइव पर स्पीड सीमित रखें, क्योंकि 80-100 किमी प्रति घंटे की स्पीड पर माइलेज सबसे अच्छा रहता है। घरेलू स्तर पर सोलर या अन्य वैकल्पिक ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ाने से भी ईंधन पर निर्भरता कम हो सकती है। सरकार भी इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन दे रही है, जिससे भविष्य में ईंधन की मांग कम हो सकती है।

ईंधन की कीमतों का अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर पड़ता है। महंगे ईंधन से ट्रांसपोर्ट कॉस्ट बढ़ती है, जो महंगाई को बढ़ावा देती है। उद्योगों में उत्पादन लागत बढ़ती है। इसलिए सरकार हमेशा संतुलन बनाए रखने की कोशिश करती है। आज 28 मार्च को कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया, जो उपभोक्ताओं के लिए सकारात्मक है। आने वाले दिनों में अगर त्योहारों या चुनावों के कारण कोई नीति बदलाव होता है तो भाव प्रभावित हो सकते हैं। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में 80 करोड़ से ज्यादा आबादी है और यहां सड़कों पर लाखों वाहन रोजाना दौड़ते हैं। लखनऊ से कानपुर या आगरा से बरेली तक की यात्रा में ईंधन की लागत सीधे यात्रा खर्च में जुड़ती है। इसी तरह असम में पहाड़ी इलाकों और चाय बागानों की वजह से डीजल की मांग ज्यादा है। तमिलनाडु औद्योगिक राज्य है, जहां चेन्नई जैसे शहर में वाहनों की संख्या बहुत है। मध्य प्रदेश और राजस्थान में कृषि और खनन गतिविधियां ईंधन पर निर्भर हैं।

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