बिहार में वोटर अधिकार यात्रा- तेजस्वी यादव का राहुल गांधी को प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित करने का ऐलान, जानिए महागठबंधन की रणनीति और गणित।
बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है, और इस बीच महागठबंधन की ओर से शुरू की गई 'वोटर अधिकार यात्रा' ने सियासी
बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है, और इस बीच महागठबंधन की ओर से शुरू की गई 'वोटर अधिकार यात्रा' ने सियासी माहौल को गर्म कर दिया है। इस यात्रा के तीसरे दिन, 19 अगस्त 2025 को नवादा में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने एक बड़ा बयान देकर सभी का ध्यान खींचा। उन्होंने कहा कि 2025 में बिहार में महागठबंधन की सरकार बनेगी और 2029 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को देश का प्रधानमंत्री बनाया जाएगा। यह बयान न केवल बिहार की राजनीति में हलचल मचा रहा है, बल्कि यह सवाल भी उठा रहा है कि क्या यह तेजस्वी का आत्मविश्वास है या महागठबंधन की रणनीति का हिस्सा? इस यात्रा का मकसद मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के खिलाफ जनता को जागरूक करना है।
'वोटर अधिकार यात्रा' 17 अगस्त 2025 को सासाराम के सुअरा हवाई अड्डा मैदान से शुरू हुई थी और इसका समापन 1 सितंबर को पटना के गांधी मैदान में एक विशाल रैली के साथ होगा। यह 16 दिन की यात्रा बिहार के 25 जिलों और 1300 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करेगी। इस यात्रा में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, तेजस्वी यादव, और महागठबंधन के अन्य प्रमुख नेता, जैसे भाकपा (माले) के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के नेता मुकेश सहनी शामिल हैं। यात्रा का मुख्य उद्देश्य चुनाव आयोग पर मतदाता सूची में गड़बड़ी और वोट चोरी के आरोपों को लेकर जनता में जागरूकता फैलाना है। राहुल गांधी ने इस दौरान चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखे हमले किए, जबकि तेजस्वी ने बिहार की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार को 'खटारा' बताकर उसे उखाड़ फेंकने का आह्वान किया।
तीसरे दिन नवादा में तेजस्वी यादव का बयान सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। उन्होंने एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, "बिहार में इस बार हम महागठबंधन की सरकार बनाएंगे। इसके बाद अगले लोकसभा चुनाव में हम राहुल गांधी को देश का प्रधानमंत्री बनाएंगे।" यह बयान बिहार विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन की रणनीति को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने का संकेत देता है। तेजस्वी ने यह भी कहा कि युवाओं ने पुरानी और खटारा राजग सरकार को हटाने का संकल्प लिया है, और अब समय है कि नई पीढ़ी को बिहार की बागडोर संभालने का मौका मिले। इस बयान ने न केवल महागठबंधन के कार्यकर्ताओं में जोश भरा, बल्कि विपक्षी खेमे में भी खलबली मचा दी। राहुल गांधी ने भी नवादा की सभा में चुनाव आयोग और भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह मतदाता सूची में हेरफेर कर लोकतंत्र पर हमला कर रहे हैं। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को संदिग्ध बताते हुए कहा कि इससे लाखों वोटरों के नाम काटे जा रहे हैं, खासकर दलित, पिछड़े, और आदिवासी समुदायों के। राहुल ने यह भी चेतावनी दी कि अगर महागठबंधन की सरकार बनी, तो 'वोट चोरी' के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने दावा किया कि अगर समय मिला, तो उनकी पार्टी हर विधानसभा और लोकसभा क्षेत्र में वोट चोरी का पर्दाफाश करेगी। यह बयान बिहार की जनता को यह संदेश देने की कोशिश था कि महागठबंधन लोकतंत्र की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
इस यात्रा की शुरुआत से ही महागठबंधन ने अपनी एकजुटता दिखाने की कोशिश की है। सासाराम में पहले दिन की सभा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और अन्य गठबंधन नेताओं की मौजूदगी ने इसे और मजबूती दी। तेजस्वी यादव ने इस दौरान एक खुली जीप में राहुल गांधी के साथ यात्रा की, जिसमें वह खुद गाड़ी चला रहे थे। यह दृश्य 2024 की भारत जोड़ो न्याय यात्रा की याद दिलाता है, जब तेजस्वी ने भी राहुल की गाड़ी चलाई थी। यह प्रतीकात्मक रूप से महागठबंधन की एकता और तेजस्वी के नेतृत्व को दर्शाता है। हालांकि, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह कांग्रेस को गठबंधन में मजबूत स्थिति देने की रणनीति भी हो सकती है। तेजस्वी का राहुल गांधी को 2029 का प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित करना कई मायनों में महत्वपूर्ण है। पहला, यह बिहार विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन की एकजुटता को दर्शाता है। 2024 के लोकसभा चुनाव में राजद को केवल 4 सीटें मिली थीं, जिसके बाद तेजस्वी कोई जोखिम नहीं लेना चाहते। उनका यह बयान गठबंधन के कार्यकर्ताओं और मतदाताओं में जोश भरने का प्रयास है। दूसरा, यह बयान राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। तेजस्वी का यह ऐलान 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर किया गया है, लेकिन इसका तात्कालिक असर बिहार के विधानसभा चुनाव पर पड़ सकता है।
हालांकि, इस बयान पर राजग ने तीखी प्रतिक्रिया दी। भाजपा के फायरब्रांड नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इसे 'नाटक' करार देते हुए कहा कि राहुल और तेजस्वी रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुसलमानों के नाम वोटर लिस्ट में जोड़ने के लिए यह यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनके पास सबूत हैं, तो सात दिन के भीतर हलफनामा दायर करें, वरना देश से माफी मांगें। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने इस यात्रा को 'पंक्चर टायर' बताया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले की निगरानी कर रहा है, इसलिए इस तरह के दावों का कोई आधार नहीं है। इसके विपरीत, महागठबंधन के अन्य नेताओं ने इस यात्रा को लोकतंत्र की रक्षा का आंदोलन बताया। पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव, जो हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए, ने कहा कि राहुल गांधी को अपार समर्थन मिल रहा है और महागठबंधन एकजुट है। उन्होंने यह भी मांग की कि वोटर आईडी को आधार कार्ड से जोड़ा जाए ताकि गड़बड़ियों को रोका जा सके। कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने भी कहा कि पूरा विपक्ष राहुल के साथ है और चुनाव आयोग को जवाब देना होगा कि मतदाता सूची में गड़बड़ियां क्यों हो रही हैं।
इस यात्रा को लेकर महागठबंधन के भीतर भी कुछ मतभेद सामने आए हैं। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने इस यात्रा को बेकार बताते हुए कहा कि इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, और बेरोजगारी जैसे असली मुद्दों से ध्यान हटेगा। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग अपना काम कर रहा है और इस यात्रा से लोग भ्रमित हो रहे हैं। यह बयान राजद के भीतर नेतृत्व को लेकर कुछ असमंजस को दर्शाता है, लेकिन तेजस्वी ने स्पष्ट किया कि महागठबंधन में मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर कोई भ्रम नहीं है और वह खुद इसकी कमान संभालेंगे।
यात्रा के दौरान महागठबंधन ने मुस्लिम-यादव (एम-वाय) समीकरण के साथ-साथ ओबीसी और ईबीसी वोटरों को साधने की कोशिश की है। बिहार में एम-वाय समीकरण राजद की ताकत रहा है, और इस यात्रा के जरिए इसे और मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही, राहुल गांधी ने दलित और आदिवासी समुदायों के वोटरों के नाम कटने के मुद्दे को उठाकर सामाजिक न्याय का एजेंडा भी आगे बढ़ाया है। यह रणनीति बिहार के सामाजिक ताने-बाने को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जहां जातिगत समीकरण चुनावी नतीजों में अहम भूमिका निभाते हैं। चुनाव आयोग ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मतदाता सूची की समीक्षा एक नियमित प्रक्रिया है और इसमें कोई गड़बड़ी नहीं है। आयोग ने राहुल गांधी से अपने दावों के समर्थन में शपथ पत्र दाखिल करने को कहा है, लेकिन राहुल ने जवाब दिया कि जब आंकड़े आयोग के ही हैं, तो शपथ पत्र की जरूरत क्यों है? यह विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है, और कोर्ट इसकी निगरानी कर रहा है। इस यात्रा का एक और खास पहलू रहा राहुल गांधी का जनता से सीधा संवाद। तीसरे दिन वजीरगंज में वह गाड़ी से उतरकर स्कूली बच्चों से मिले और उन्हें टॉफियां दीं। यह छोटा-सा कदम जनता से जुड़ने की उनकी कोशिश को दर्शाता है, जैसा कि उनकी भारत जोड़ो यात्रा में देखा गया था। तेजस्वी ने भी कहा कि इस यात्रा को जनता का अपार समर्थन मिल रहा है, और यह केवल एक राजनीतिक अभियान नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा का आंदोलन है।
महागठबंधन की यह यात्रा कई सवाल खड़े करती है। पहला, क्या यह यात्रा वोटरों को जागरूक करने में सफल होगी, या यह केवल सियासी शोर बनकर रह जाएगी? दूसरा, तेजस्वी का राहुल को प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित करना क्या गठबंधन में कांग्रेस को ज्यादा सीटें दिलाने की रणनीति है? 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 40 में से 9 सीटों पर चुनाव लड़ा था, और विधानसभा चुनाव में वह कम से कम 54 सीटों की मांग कर सकती है। वहीं, वीआईपी जैसे छोटे दलों की 60 सीटों और उपमुख्यमंत्री पद की मांग ने गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को जटिल बना दिया है।
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