राज्यसभा में बजट सत्र का दूसरा चरण शुरू: महंगाई और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति पर सदन में टकराव के आसार।
संसद का बजट सत्र अपने सबसे निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुका है। आज 30 मार्च, 2026 को जब राज्यसभा की कार्यवाही फिर से शुरू हुई, तो सदन का
- संसदीय कार्यवाही में आज भारी गहमागहमी: विपक्ष ने घेरा, सरकार ने पेश किया देश की आर्थिक स्थिरता का रोडमैप
- बजट सत्र 2026 की महत्वपूर्ण बैठक: तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया संकट पर उच्च सदन में चर्चा की तैयारी
संसद का बजट सत्र अपने सबसे निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुका है। आज 30 मार्च, 2026 को जब राज्यसभा की कार्यवाही फिर से शुरू हुई, तो सदन का वातावरण काफी गंभीर नजर आया। इस सत्र की शुरुआत ऐसे समय में हो रही है जब भारत सहित पूरी दुनिया कई तरह की आर्थिक और कूटनीतिक चुनौतियों से जूझ रही है। सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बजट प्रस्तावों को अंतिम रूप देने के साथ-साथ विपक्ष के उन तीखे सवालों का जवाब देना है, जो सीधे तौर पर आम आदमी की जेब और देश की सुरक्षा से जुड़े हैं। सभापति के आसन ग्रहण करते ही सदन की कार्यवाही विधिवत रूप से प्रारंभ हुई, जिसमें विधायी कार्यों की एक लंबी सूची पेश की गई।
विपक्ष ने सत्र की शुरुआत से ही अपने तेवर साफ कर दिए हैं। मुख्य विपक्षी दलों ने बढ़ती महंगाई, विशेषकर पेट्रोलियम उत्पादों और रसोई गैस की कीमतों में हो रही संभावित वृद्धि को लेकर कार्यस्थगन प्रस्ताव दिए हैं। विपक्षी नेताओं का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी तनाव का हवाला देकर घरेलू कीमतों में वृद्धि करना आम जनता के साथ अन्याय है। सदन में इस मुद्दे पर गरमागरम बहस होने की पूरी उम्मीद है, क्योंकि विपक्ष सरकार से उन राहत पैकेटों और सब्सिडी योजनाओं का विवरण मांग रहा है जो बजट में प्रस्तावित की गई थीं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार डेटा के माध्यम से आर्थिक विकास की गुलाबी तस्वीर पेश कर रही है, जबकि हकीकत में मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोग बढ़ती लागत से त्रस्त हैं।
अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर, पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और ईरान-इजरायल तनाव का साया भी राज्यसभा की कार्यवाही पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। सरकार इस वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों पर सदन को विश्वास में लेने का प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ने पहले ही संकेत दिए हैं कि भारत की प्राथमिकता अपने नागरिकों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आने वाले व्यवधानों से बचाना है। राज्यसभा में आज विदेश नीति और ऊर्जा संकट पर एक विशेष चर्चा होने की संभावना है, जहाँ सरकार अपनी कूटनीतिक उपलब्धियों और वैकल्पिक तेल आपूर्ति स्रोतों के बारे में विस्तार से जानकारी साझा कर सकती है।
विधायी एजेंडे की बात करें तो आज सदन में कई महत्वपूर्ण विधेयकों को विचार और पारित करने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। इनमें 'केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026' और 'दिवाला एवं दिवालियापन संहिता (संशोधन) विधेयक, 2025' प्रमुख हैं। सरकार का प्रयास है कि बजट सत्र के इस अंतिम चरण में इन तकनीकी और प्रशासनिक सुधार वाले कानूनों को बिना किसी बड़े व्यवधान के पारित करा लिया जाए। हालांकि, विपक्ष की रणनीति इन विधेयकों पर गहन चर्चा और मतदान की मांग करने की है, ताकि सरकार को महत्वपूर्ण मुद्दों पर घेरने का अधिक समय मिल सके। संसदीय कार्य मंत्री ने सभी दलों से सदन की गरिमा बनाए रखने और सार्थक चर्चा में भाग लेने की अपील की है। गृह मंत्री ने पहले ही घोषणा की थी कि 31 मार्च, 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का लक्ष्य प्राप्त कर लिया जाएगा। आज सदन में इस डेडलाइन से ठीक एक दिन पहले देश की आंतरिक सुरक्षा पर भी संक्षिप्त चर्चा हो सकती है, जिसमें नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हुई प्रगति का विवरण पेश किया जाएगा।
आर्थिक मोर्चे पर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सदन को आश्वस्त करने का प्रयास किया है कि भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनी हुई है। राज्यसभा में बजट पर चर्चा के दौरान यह तथ्य सामने रखा गया कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 4.3 प्रतिशत रखा गया है, जो पिछली बार से कम है। सरकार का तर्क है कि राजकोषीय अनुशासन बनाए रखते हुए बुनियादी ढांचे पर निवेश बढ़ाना ही देश को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का एकमात्र रास्ता है। हालांकि, विपक्षी सांसदों ने इस पूंजीगत व्यय के वास्तविक लाभ और रोजगार सृजन की दर पर सवाल उठाए हैं, जिससे सदन में आर्थिक नीति पर लंबी बहस होने की संभावना है। उच्च सदन में आज शून्यकाल और प्रश्नकाल के दौरान स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन और डिजिटल सुरक्षा जैसे वैश्विक मुद्दों पर भी सांसदों ने अपनी चिंताएं रखीं। बढ़ती गर्मी और बेमौसम बारिश के कारण कृषि क्षेत्र पर पड़ रहे प्रभावों पर भी चर्चा की मांग की गई है। सरकार ने इन चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वह किसानों को समर्थन देने के लिए 'पीएम-किसान' और अन्य बीमा योजनाओं के माध्यम से हर संभव सहायता प्रदान कर रही है। राज्यसभा की आज की कार्यवाही यह तय करेगी कि आगामी दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच संवाद का स्तर कैसा रहेगा और क्या महत्वपूर्ण विधायी कार्य सुचारू रूप से संपन्न हो पाएंगे।
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