संसदीय गरिमा बनाम 'टी-शर्ट' राजनीति: किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के पहनावे और व्यवहार पर उठाए कड़े सवाल।
'एक्टिविस्ट सलाहकारों ने हाईजैक किया राहुल का दिमाग', किरेन रिजिजू का कांग्रेस नेतृत्व पर तीखा प्रहार, परंपराओं के पालन की दी नसीहत
- टाइम्स नाउ समिट 2026: नेता प्रतिपक्ष की विश्वसनीयता पर सवाल, रिजिजू बोले- संसद में नियमों और शिष्टाचार से ऊपर कोई नहीं
नई दिल्ली में आयोजित 'टाइम्स नाउ समिट 2026' के दौरान केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के रवैये और विशेष रूप से राहुल गांधी की भूमिका पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है, लेकिन जब नेता प्रतिपक्ष जैसे संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति संसद की स्थापित परंपराओं की अनदेखी करता है, तो यह लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है। रिजिजू ने राहुल गांधी के सदन में टी-शर्ट पहनकर आने को लेकर कहा कि पहनावा भी सदन के प्रति आपके सम्मान और गंभीरता का हिस्सा होता है। उनके अनुसार, नेता प्रतिपक्ष पूरे विपक्ष का चेहरा होता है और उसे एक निश्चित तरीके से आचरण करना चाहिए जो उस पद की गरिमा को प्रतिबिंबित करे।
संसदीय कार्य मंत्री ने राहुल गांधी की निर्णय क्षमता और उनकी सोच पर 'बाहरी प्रभाव' का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का दिमाग उनके 'एक्टिविस्ट' सलाहकारों ने 'हाईजैक' कर लिया है। रिजिजू के मुताबिक, राहुल गांधी संसद के पटल पर जो कुछ भी बोलते हैं, वह उनकी अपनी मौलिक सोच नहीं होती, बल्कि उनके सलाहकारों द्वारा तैयार की गई स्क्रिप्ट होती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राहुल वही दोहराते हैं जो उन्हें सिखाया जाता है, जिससे उनकी राजनीतिक गंभीरता और जमीन से जुड़ाव पर सवाल खड़े होते हैं। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वे व्यक्तिगत रूप से राहुल गांधी का सम्मान करते हैं और बाहर उनसे शिष्टाचार के साथ मिलते हैं, लेकिन सदन के भीतर का व्यवहार नियमों से बंधा होना चाहिए।
रिजिजू ने अपने संबोधन के दौरान पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी का उदाहरण देते हुए संसदीय शिष्टाचार की बारीकियों को समझाया। उन्होंने बताया कि किस तरह दिग्गज कम्युनिस्ट नेता सोमनाथ चटर्जी पहले ढीले-ढाले कपड़े और चप्पल पहनते थे, लेकिन जब उन्हें अध्यक्ष की कुर्सी की जिम्मेदारी मिली, तो उन्होंने पद की गरिमा को समझते हुए अपने पहनावे और आचरण में व्यापक बदलाव किया। इसी उदाहरण के जरिए रिजिजू ने राहुल गांधी को यह संदेश देने की कोशिश की कि जब आप एक महत्वपूर्ण पद (LoP) पर होते हैं, तो आपको अपनी पसंद-नापसंद से ऊपर उठकर उस कुर्सी का सम्मान करना होता है। उनके अनुसार, टी-शर्ट पहनना कोई गुनाह नहीं है, लेकिन संसद जैसे सर्वोच्च सदन में यह 'अच्छा नहीं लगता'। संसदीय इतिहास में ड्रेस कोड को लेकर पहले भी चर्चाएं होती रही हैं। हालांकि लोकसभा में पुरुषों के लिए कोई अनिवार्य औपचारिक ड्रेस कोड लिखित रूप में नहीं है, लेकिन लंबे समय से एक अलिखित परंपरा रही है कि सदस्य कुर्ता-पायजामा, धोती-कुर्ता या सफारी सूट जैसे 'औपचारिक' वस्त्रों में ही सदन में आएं। राहुल गांधी द्वारा टी-शर्ट को नियमित रूप से अपनाना इस पारंपरिक धारणा को चुनौती देता नजर आता है, जिसे भाजपा 'कैजुअल अप्रोच' मानती है, जबकि कांग्रेस इसे 'सादगी' और 'आम आदमी से जुड़ाव' के रूप में पेश करती है।
मंत्री ने कांग्रेस की वर्तमान राजनीति को 'विरोध के लिए विरोध' की राजनीति करार दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने जो उपलब्धियां हासिल की हैं, राहुल गांधी उन सभी पर सवाल उठाते हैं। चाहे वह गरीबी उन्मूलन के कार्य हों या भारत का बढ़ता वैश्विक कद, नेता प्रतिपक्ष हर सफलता को संदेह की दृष्टि से देखते हैं। रिजिजू ने कहा कि लोकतंत्र में आलोचना आवश्यक है, लेकिन आलोचना में 'विश्वसनीयता' होनी चाहिए। उनके अनुसार, जब विपक्ष हर बात को खारिज करने लगता है, तो वह जनता के बीच अपनी साख खो देता है। उन्होंने भाजपा के विपक्ष में रहने के समय का हवाला देते हुए कहा कि तब भी विरोध होता था, लेकिन वह सीमाओं के भीतर रहकर गरिमापूर्ण तरीके से किया जाता था।
शिखर सम्मेलन के दौरान रिजिजू ने हाल ही में पश्चिम एशिया के संकट पर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जहाँ अधिकांश दलों ने राष्ट्रीय हित में एकजुटता दिखाई, वहीं कुछ प्रमुख विपक्षी दल इस महत्वपूर्ण चर्चा से दूर रहे। उन्होंने इसे 'निराशाजनक' बताया और कहा कि सरकार हमेशा संवाद के लिए तैयार रहती है, लेकिन विपक्ष को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। उन्होंने राहुल गांधी को 'अपरिपक्व' बताते हुए यहाँ तक कह दिया कि उनकी जगह प्रियंका गांधी शायद नेता प्रतिपक्ष के रूप में एक बेहतर और अधिक परिपक्व विकल्प साबित होतीं, क्योंकि वे सदन की कार्यवाही को अधिक गंभीरता से सुनती और समझती हैं।
विवाद का एक अन्य पहलू संसद में चर्चा और उपस्थिति को लेकर भी रहा। रिजिजू ने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष सदन की महत्वपूर्ण बहसों के दौरान अक्सर अनुपस्थित रहते हैं या केवल अपना भाषण देकर चले जाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि आप दूसरों को सुनना नहीं चाहते, तो आप एक कुशल नेतृत्वकर्ता नहीं बन सकते। किरेन रिजिजू के इन बयानों के बाद कांग्रेस की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया आने की संभावना है, क्योंकि यह सीधे तौर पर उनके नेतृत्व की साख पर हमला है। आने वाले समय में बजट सत्र और अन्य विधायी कार्यों के दौरान सदन के भीतर यह गर्माहट और अधिक बढ़ने के आसार हैं, क्योंकि सत्ता पक्ष अब राहुल गांधी के हर कदम पर कड़ी निगरानी रख रहा है।
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