रामपुर कोर्ट का कड़ा फैसला: दोहरे पासपोर्ट घोटाले में अब्दुल्ला आजम को सात वर्ष कारावास, जुर्माना 50 हजार रुपये। 

रामपुर की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने समाजवादी पार्टी नेता आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम को दो पासपोर्ट मामले में दोषी ठहराते

Dec 5, 2025 - 17:53
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रामपुर कोर्ट का कड़ा फैसला: दोहरे पासपोर्ट घोटाले में अब्दुल्ला आजम को सात वर्ष कारावास, जुर्माना 50 हजार रुपये। 
रामपुर कोर्ट का कड़ा फैसला: दोहरे पासपोर्ट घोटाले में अब्दुल्ला आजम को सात वर्ष कारावास, जुर्माना 50 हजार रुपये। 

रामपुर की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने समाजवादी पार्टी नेता आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम को दो पासपोर्ट मामले में दोषी ठहराते हुए सात वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने उन पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह मामला 2019 में दर्ज हुआ था, जब भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने शिकायत दर्ज कराई थी कि अब्दुल्ला आजम ने फर्जी दस्तावेजों का उपयोग कर दो पासपोर्ट प्राप्त किए थे। अदालत ने सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अब्दुल्ला आजम को पेश किया, क्योंकि वे वर्तमान में दोहरे पैन कार्ड मामले में सजा काट रहे हैं। यह फैसला 5 दिसंबर 2025 को सुनाया गया, जो भारतीय दंड संहिता की धाराओं 420, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश से जुड़ा है। जांच के दौरान पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें आजम खान को सह-अभियुक्त के रूप में नामित किया गया था।

मामले की शुरुआत 30 जुलाई 2019 को हुई, जब आकाश सक्सेना ने रामपुर के सिविल लाइंस थाने में एफआईआर दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि अब्दुल्ला आजम ने जन्म तिथि में विसंगति दिखाते हुए पासपोर्ट प्राप्त किया। एक पासपोर्ट में उनकी जन्म तिथि 30 सितंबर 1990 दर्ज थी, जबकि शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों में 1 जनवरी 1993 उल्लिखित थी। अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि यह विसंगति जानबूझकर की गई थी ताकि अब्दुल्ला आजम 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सुार सीट से उम्मीदवारी कर सकें, जहां न्यूनतम आयु 25 वर्ष निर्धारित है। पासपोर्ट 10 जनवरी 2018 को जारी किया गया था, और इसका उपयोग विदेश यात्रा के लिए किया गया। पुलिस जांच में पाया गया कि फर्जी दस्तावेजों का उपयोग बैंकिंग लेन-देन और अन्य आधिकारिक कार्यों में भी हुआ। अदालत ने 9 सितंबर 2021 को आरोप तय किए थे, और उसके बाद सुनवाई जारी रही।

अदालत ने साक्ष्यों की जांच के बाद फैसला सुनाया, जिसमें दस्तावेजी प्रमाण और गवाहों के बयान शामिल थे। विशेष मजिस्ट्रेट शोभित बंसल ने अब्दुल्ला आजम को दोषी पाया, क्योंकि पासपोर्ट अधिनियम का उल्लंघन सिद्ध हुआ। जुर्माना न चुकाने पर अतिरिक्त छह माह की सजा का प्रावधान भी किया गया। अब्दुल्ला आजम को तत्काल गिरफ्तार कर रामपुर जेल भेज दिया गया। यह मामला पासपोर्ट के साथ-साथ जन्म प्रमाण-पत्रों की जालसाजी से जुड़ा था, जहां दो अलग-अलग जन्म प्रमाण-पत्र बनाए गए थे। एक प्रमाण-पत्र रामपुर में जारी किया गया था, जिसमें जन्म स्थान रामपुर दर्ज था, जबकि दूसरा लखनऊ नगर निगम से 21 जनवरी 2015 को जारी हुआ, जिसमें जन्म स्थान लखनऊ बताया गया। अभियोजन ने कहा कि पहले प्रमाण-पत्र का उपयोग पासपोर्ट और विदेश यात्रा के लिए किया गया, जबकि दूसरे का उपयोग सरकारी रिकॉर्ड और जौहर विश्वविद्यालय से संबद्धता के लिए।

यह फैसला अब्दुल्ला आजम के लिए एक और कानूनी झटका है, जो पहले से ही दोहरे पैन कार्ड मामले में सजा भुगत रहे हैं। 17 नवंबर 2025 को रामपुर की ही एमपी-एमएलए अदालत ने दोहरे पैन कार्ड मामले में अब्दुल्ला आजम और उनके पिता आजम खान को सात वर्ष की सजा सुनाई थी। उस मामले में भी 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया था। पैन कार्ड मामले की एफआईआर 6 दिसंबर 2019 को दर्ज हुई थी, जिसमें आरोप था कि दो पैन कार्ड अलग-अलग जन्म तिथियों के साथ बनाए गए थे। एक में जन्म तिथि 1 जनवरी 1993 थी, जबकि दूसरे में 30 सितंबर 1990। अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि दूसरे पैन कार्ड का उपयोग 2017 चुनाव में नामांकन पत्र दाखिल करने, बैंक लेन-देन और आयकर रिटर्न के लिए किया गया। इस साजिश में आजम खान की भूमिका को सह-अभियुक्त के रूप में देखा गया। सजा के बाद दोनों को रामपुर जेल भेजा गया था।

पासपोर्ट मामले में अब्दुल्ला आजम ने कई बार न्यायिक हस्तक्षेप की कोशिश की। 6 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी, जिसमें फर्जी दस्तावेजों से पासपोर्ट प्राप्त करने के आरोपों को रद्द करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि मामला गंभीर है और ट्रायल को प्रभावित नहीं किया जा सकता। इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी याचिका खारिज की थी। 29 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने रामपुर एमपी-एमएलए अदालत में चल रही दो मामलों की ट्रायल पर रोक लगा दी थी, लेकिन बाद में यह आदेश रद्द हो गया। इन मामलों में पासपोर्ट और पैन कार्ड से जुड़े आरोप शामिल थे। अभियोजन पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि अब्दुल्ला आजम ने जानबूझकर दस्तावेजों में हेरफेर किया ताकि राजनीतिक लाभ प्राप्त हो सके।

आजम खान परिवार पर कई कानूनी मामले चल रहे हैं। 2023 में एक फर्जी जन्म प्रमाण-पत्र मामले में आजम खान, उनकी पत्नी तंजीन फातिमा और अब्दुल्ला आजम को सात वर्ष की सजा सुनाई गई थी। उस मामले में भी आकाश सक्सेना की शिकायत पर 3 जनवरी 2019 को एफआईआर दर्ज हुई थी। अदालत ने पाया कि दो जन्म प्रमाण-पत्र बनाकर एक का उपयोग पासपोर्ट के लिए और दूसरे का सरकारी कार्यों के लिए किया गया। इस सजा के बाद तीनों को जेल भेजा गया था। आजम खान पर कुल 111 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से सात में दोषसिद्धि हो चुकी है। वे 23 सितंबर 2025 को सीतापुर जेल से रिहा हुए थे, जहां 23 माह की सजा काटी थी। रिहाई के बाद उन्होंने कई मामलों में जमानत प्राप्त की, लेकिन हाल की सजाओं ने उन्हें फिर जेल की ओर धकेल दिया।

दोहरे पैन कार्ड मामले में सजा के बाद आजम खान और अब्दुल्ला आजम ने कई अन्य लंबित मामलों में जमानत रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की। 30 नवंबर 2025 तक, आजम खान की नौ मामलों में और अब्दुल्ला आजम की छह मामलों में जमानत रद्द हो चुकी थी। रामपुर के संयुक्त निदेशक अभियोजन रोhtash कुमार पांडे ने पुष्टि की कि यह कदम सजा के बाद अनिवार्य था। आजम खान छह अन्य मामलों में बरी हो चुके हैं, जिनमें से एक हालिया विवादास्पद बयान का मामला था, जहां 28 नवंबर 2025 को रामपुर अदालत ने उन्हें बरी किया। उस मामले में आरोप था कि उन्होंने एक टीवी साक्षात्कार में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। बरी होने के बाद वे रामपुर जेल से रिहा हुए थे।

पासपोर्ट मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने विस्तृत जांच की। पुलिस ने चार्जशीट में दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए, जिसमें पासपोर्ट आवेदन पत्र, शैक्षणिक प्रमाण-पत्र और बैंक रिकॉर्ड शामिल थे। गवाहों ने बयान दिया कि जन्म तिथि में विसंगति चुनावी लाभ के लिए की गई थी। अब्दुल्ला आजम ने बचाव में कहा कि यह तकनीकी त्रुटि थी, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया। सजा सुनाने के बाद अब्दुल्ला आजम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हटा लिया गया और स्थानीय जेल में स्थानांतरित किया गया। यह मामला पासपोर्ट अधिनियम के उल्लंघन के साथ-साथ चुनाव आयोग को गुमराह करने से जुड़ा था, जहां नामांकन पत्र में एक जन्म तिथि का उल्लेख किया गया।

आजम खान परिवार की राजनीतिक यात्रा इस मामले से प्रभावित रही। अब्दुल्ला आजम 2017 में सुार विधानसभा सीट से विधायक बने, लेकिन आयु विवाद के कारण इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनकी सदस्यता रद्द कर दी। 2022 में वे फिर सुार से जीते, लेकिन कानूनी मामले जारी रहे। आजम खान पांच बार रामपुर से सांसद रह चुके हैं और समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्य हैं। वे 10 बार विधायक भी रहे। हाल के वर्षों में वे 27 माह जेल में रहे। सीतापुर जेल से रिहाई के बाद उन्होंने पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात की और कानून-व्यवस्था पर टिप्पणी की।

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