पुतिन ने महात्मा गांधी को राजघाट पर दी श्रद्धांजलि, गांधी को समर्पित संदेश में बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का जिक्र। 

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपनी भारत यात्रा के दूसरे दिन राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी, जहां उन्होंने आगंतुक पुस्तिका पर

Dec 5, 2025 - 17:48
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पुतिन ने महात्मा गांधी को राजघाट पर दी श्रद्धांजलि, गांधी को समर्पित संदेश में बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का जिक्र। 
पुतिन ने महात्मा गांधी को राजघाट पर दी श्रद्धांजलि, गांधी को समर्पित संदेश में बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का जिक्र। 

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपनी भारत यात्रा के दूसरे दिन राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी, जहां उन्होंने आगंतुक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए। यह घटना 5 दिसंबर 2025 को हुई, जो 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन के हिस्से के रूप में आयोजित की गई। पुतिन ने गांधी को एक महान दार्शनिक बताया और उनके सिद्धांतों को वैश्विक न्याय और अहिंसा का प्रतीक माना। आगंतुक पुस्तिका में उन्होंने लिखा कि गांधी ने उस नए विश्व व्यवस्था का पूर्वानुमान लगाया था जो आज बन रही है, और रूस तथा भारत उनके मूल्यों का सम्मान करते हुए अंतरराष्ट्रीय मंच पर सहयोग करते हैं। यह यात्रा पुतिन की चार वर्षों बाद भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है, जो वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने का प्रतीक बनी। राजघाट पर पुतिन ने एक फूलमाला चढ़ाई और कुछ क्षण मौन रहकर गांधी की स्मृति को नमन किया।

पुतिन की यह यात्रा 4 दिसंबर 2025 को दिल्ली के पलाम एयर फोर्स स्टेशन पर पहुंचने के साथ शुरू हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोटोकॉल से हटकर व्यक्तिगत रूप से उनका स्वागत किया, और दोनों नेता एक ही वाहन में सवार होकर प्रधानमंत्री आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पहुंचे। वहां एक निजी डिनर के दौरान दोनों ने अनौपचारिक चर्चा की, जिसमें यूक्रेन संकट सहित वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। अगले दिन सुबह राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत समारोह आयोजित किया गया, जहां राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पुतिन का अभिनंदन किया। 21 तोपों की सलामी के साथ त्रि-सेवा गार्ड ऑफ ऑनर प्रस्तुत किया गया। इसके तुरंत बाद पुतिन राजघाट गए, जो सभी विदेशी नेताओं की यात्रा का एक अभिन्न हिस्सा है। राजघाट पर उन्होंने गांधी की समाधि स्थल पर पहुंचकर फूल अर्पित किए और आगंतुक पुस्तिका में संदेश लिखा। यह संदेश गांधी के अहिंसा और सत्याग्रह के सिद्धांतों को बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था से जोड़ता है।

आगंतुक पुस्तिका में पुतिन का संदेश संक्षिप्त लेकिन गहन था। उन्होंने लिखा कि महात्मा गांधी ने उस नई विश्व व्यवस्था का अंदाजा लगाया था जो आज विकसित हो रही है। पुतिन ने आगे कहा कि रूस और भारत गांधी के सिद्धांतों तथा मूल्यों का सम्मान करते हैं और इनके आधार पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर सहयोग करते हैं। यह संदेश गांधी को वैश्विक न्याय और अहिंसा का प्रतीक बताता है, जो दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों को प्रतिबिंबित करता है। राजघाट पर यह समारोह भारतीय परंपरा के अनुरूप संपन्न हुआ, जिसमें पुतिन ने सफेद कढ़ाई वाले कुर्ते में भाग लिया। समारोह के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई, और दिल्ली पुलिस ने यातायात प्रतिबंध लगाए थे। राजघाट के बाद पुतिन हैदराबाद हाउस पहुंचे, जहां द्विपक्षीय वार्ता शुरू हुई।

23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है, जो 2000 से चली आ रही वार्षिक परंपरा का हिस्सा है। इस यात्रा में पुतिन और मोदी ने व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और उच्च प्रौद्योगिकी क्षेत्रों पर चर्चा की। द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया, जो वर्तमान में ऊर्जा आयात पर निर्भर है। पुतिन ने कहा कि रूस भारत से अधिक आयात करना चाहता है ताकि व्यापार संतुलित हो। रक्षा सहयोग में सैन्य-तकनीकी समझौते पर जोर दिया गया, जिसमें सेमी-क्रायोजेनिक रॉकेट इंजनों के लिए 100 प्रतिशत प्रौद्योगिकी हस्तांतरण शामिल है। ऊर्जा क्षेत्र में कुडनकुलम परमाणु संयंत्र के लिए पहली खेप में परमाणु ईंधन की आपूर्ति का स्वागत किया गया। दोनों नेताओं ने छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों पर सहयोग की संभावनाओं पर विचार किया।

वार्ता में वैश्विक शांति पर विशेष ध्यान रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत तटस्थ नहीं है, बल्कि शांति के पक्ष में खड़ा है। उन्होंने यूक्रेन संकट पर पुतिन के साथ निरंतर संपर्क का उल्लेख किया और कहा कि हाल के प्रयासों से विश्व जल्द शांति की ओर लौटेगा। पुतिन ने भारत की शांति पहलों के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि यूक्रेन में शांतिपूर्ण समाधान पर काम चल रहा है। दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ने की प्रतिबद्धता जताई। पुतिन ने कहा कि भारत-रूस संबंध इतिहास में गहरे रूप से निहित हैं, लेकिन भविष्योन्मुखी साझेदारी पर जोर दिया जाना चाहिए। मोदी ने 2001 में अपनी पहली मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा कि यह संबंध ध्रुव तारे की तरह स्थिर हैं।

शिखर सम्मेलन के दौरान कई समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। इनमें कुशल और अर्ध-कुशल भारतीय श्रमिकों की रूस में गतिशीलता सुगम बनाने वाला समझौता शामिल है। रक्षा क्षेत्र में लॉजिस्टिकल समर्थन का ढांचा तैयार किया गया। परमाणु ऊर्जा सहयोग बढ़ाने पर बल दिया गया। उर्वरक उत्पादक उरलकेम समूह के साथ यूरिया संयंत्र स्थापित करने का समझौता हुआ। गैजप्रॉमबैंक और अल्फा बैंक जैसे रूसी बैंकों को भारत में संचालन की अनुमति पर चर्चा हुई। उच्च प्रौद्योगिकी क्षेत्रों जैसे विमानन, अंतरिक्ष अन्वेषण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता में सहयोग के नए अवसर उभरे। दोनों पक्षों ने व्यापार को बाहरी दबावों से बचाने पर जोर दिया। पुतिन ने कहा कि सैन्य-तकनीकी सहयोग में गहरा विश्वास है।

यह यात्रा वैश्विक संदर्भ में महत्वपूर्ण है, जहां रूस पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। भारत ने निरंतर संवाद बनाए रखा है, जो विश्वास को मजबूत करता है। पुतिन की यात्रा लगभग 27 घंटे की रही, जिसमें राष्ट्रपति भवन में राज्य भोज भी शामिल था। राष्ट्रपति मुर्मू ने पुतिन का स्वागत किया और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी का उल्लेख किया। यात्रा के अंत में पुतिन ने दिल्ली से मॉस्को के लिए प्रस्थान किया। राजघाट पर गांधी को श्रद्धांजलि इस यात्रा का एक भावपूर्ण क्षण था, जो दोनों देशों के सांस्कृतिक बंधनों को दर्शाता है। पुतिन ने गांधी के विचारों को बहुध्रुवीय विश्व के निर्माण से जोड़ा, जो वैश्विक सहयोग का संदेश देता है।

द्विपक्षीय वार्ता ने आर्थिक साझेदारी को नई दिशा दी। दोनों देशों ने उच्च प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में संकल्प लिया। मोदी ने कहा कि कोविड महामारी और अन्य संकटों के बावजूद संबंध मजबूत रहे हैं। पुतिन ने सहमति जताई कि संबंध इतिहास से परे भविष्य की ओर उन्मुख हैं। यह बैठक वैश्विक स्थिरता के लिए सकारात्मक संदेश देती है। राजघाट पर पुतिन का संदेश गांधी के सिद्धांतों को अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जोड़ता है। यात्रा के दौरान दिल्ली में यातायात व्यवस्था प्रभावित रही, लेकिन सभी कार्यक्रम सुचारू रूप से चले। पुतिन ने राष्ट्रपति मुर्मू से भी भेंट की। शिखर सम्मेलन कई परिणामों के साथ समाप्त हुआ।

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