दरभंगा: राहुल-तेजस्वी के स्वागत में बने मंच से PM मोदी को दी गई गाली, BJP नेताओं ने की राहुल गांधी से माफी की मांग।
Bihar Politics: बिहार के दरभंगा में एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने का मामला सामने आया है। यह घटना उस
बिहार के दरभंगा में एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने का मामला सामने आया है। यह घटना उस समय हुई जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) नेता तेजस्वी यादव के स्वागत के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में एक स्थानीय नेता ने मंच से अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इसकी कड़ी निंदा की है और राहुल गांधी से माफी की मांग की है। इस मामले ने बिहार की सियासत में नया विवाद खड़ा कर दिया है।
यह घटना मंगलवार को दरभंगा के बेनीपुर प्रखंड में हुई। जानकारी के अनुसार, राहुल गांधी और तेजस्वी यादव एक संयुक्त जनसभा को संबोधित करने के लिए दरभंगा पहुंचे थे। यह सभा विपक्षी गठबंधन की ओर से आयोजित की गई थी, जिसमें स्थानीय मुद्दों और बिहार की समस्याओं पर चर्चा होनी थी। इस दौरान स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं ने दोनों नेताओं के स्वागत के लिए अलग-अलग मंच बनाए थे। वायरल वीडियो में दिख रहा मंच मोहम्मद नौशाद नाम के एक स्थानीय नेता के समर्थन में बनाया गया था, जो कांग्रेस से टिकट मांग रहे हैं। इस मंच से एक वक्ता ने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की, जिसे वहां मौजूद लोगों ने रिकॉर्ड कर लिया और बाद में यह वीडियो सोशल मीडिया पर फैल गया।
वीडियो में दिख रहा है कि वक्ता मंच से जोश में भाषण दे रहा है और इस दौरान वह पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करता है। यह टिप्पणी सुनकर वहां मौजूद कुछ लोग तालियां बजाते हैं, जबकि कुछ लोग असहज दिखाई देते हैं। वीडियो के वायरल होने के बाद बीजेपी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी के स्थानीय नेताओं ने इसे विपक्षी नेताओं की हताशा का नतीजा बताया और कहा कि इस तरह की भाषा का इस्तेमाल लोकतंत्र में अस्वीकार्य है। बीजेपी के प्रवक्ता और दरभंगा से विधायक संजय सरावगी ने कहा कि राहुल गांधी और तेजस्वी यादव को इस घटना के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए, क्योंकि यह उनके स्वागत के लिए बनाए गए मंच से हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि यह घटना विपक्ष की नकारात्मक राजनीति को दर्शाती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह मंच आधिकारिक तौर पर कांग्रेस या आरजेडी द्वारा बनाया गया नहीं था, बल्कि यह मोहम्मद नौशाद के समर्थकों द्वारा स्वतंत्र रूप से तैयार किया गया था। नौशाद बेनीपुर क्षेत्र से कांग्रेस का टिकट पाने की कोशिश में हैं और स्थानीय स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए सक्रिय हैं। कुछ लोगों का कहना है कि इस मंच का आयोजन बिना पार्टी के आधिकारिक निर्देश के किया गया था, और वक्ता की टिप्पणी व्यक्तिगत थी। हालांकि, बीजेपी ने इस बात को खारिज करते हुए कहा कि राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की मौजूदगी में इस तरह की टिप्पणी होना उनकी सहमति को दर्शाता है।
इस घटना ने बिहार की राजनीति में तनाव बढ़ा दिया है। बीजेपी ने इसे एक बड़ा मुद्दा बनाते हुए सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए विपक्ष पर हमला बोला है। पार्टी के एक अन्य नेता और बिहार सरकार में मंत्री नितिन नवीन ने कहा कि इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करने वाले लोग समाज में नफरत फैलाने का काम करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर विपक्षी नेता इस घटना की निंदा नहीं करते, तो यह उनकी नैतिक हार होगी। बीजेपी कार्यकर्ताओं ने दरभंगा में इस घटना के विरोध में प्रदर्शन भी किया और मांग की कि वक्ता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
दूसरी ओर, कांग्रेस और आरजेडी ने इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। कुछ स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने निजी तौर पर इस टिप्पणी को अनुचित बताया और कहा कि यह उनकी पार्टी की विचारधारा का हिस्सा नहीं है। एक स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ता ने बताया कि मोहम्मद नौशाद के समर्थकों ने यह मंच अपने स्तर पर बनाया था और इसका मुख्य आयोजन से कोई सीधा संबंध नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की भाषा का इस्तेमाल उनकी पार्टी स्वीकार नहीं करती। हालांकि, बीजेपी ने इसे विपक्ष की रणनीति का हिस्सा बताया और कहा कि यह घटना उनकी हताशा को दर्शाती है।
सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कुछ लोग इस टिप्पणी को गलत मान रहे हैं और कह रहे हैं कि राजनीति में इस तरह की भाषा का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। एक यूजर ने लिखा कि नेताओं को अपनी बात कहने के लिए सभ्य भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए, न कि अपमानजनक शब्दों का। वहीं, कुछ लोग इसे व्यक्तिगत टिप्पणी बताकर बचाव कर रहे हैं। इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि राजनीतिक मंचों पर भाषा और व्यवहार की मर्यादा को कैसे बनाए रखा जाए।
स्थानीय पुलिस ने इस मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि वीडियो की जांच की जा रही है। अगर इस मामले में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज होती है, तो वक्ता के खिलाफ कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं। दरभंगा के पुलिस अधीक्षक ने बताया कि वे इस वीडियो की प्रामाणिकता की जांच कर रहे हैं और अगर यह आपत्तिजनक पाया जाता है, तो उचित कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना बिहार में पहले भी हुए ऐसे विवादों की याद दिलाती है, जहां मंचों से नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। कुछ महीने पहले मधुबनी में एक सभा के दौरान भी इसी तरह का विवाद हुआ था, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा था। दरभंगा की इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि क्या राजनीतिक दलों को अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं क्षेत्र की छवि को खराब करती हैं। दरभंगा, जो अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के लिए जाना जाता है, इस तरह के विवादों से चर्चा में आना नहीं चाहता। लोग चाहते हैं कि सभी दल इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए मिलकर काम करें और राजनीतिक मंचों पर सभ्यता बनाए रखें।
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