ओवैसी का बीजेपी-RSS पर तीखा प्रहार: CJI गवई पर जूता फेंकने वाले पर केस क्यों नही? कहा- योगी के राज्य में दलितों पर अत्याचार चरम पर। 

हैदराबाद से सांसद और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी और उसके वैचारिक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

Oct 10, 2025 - 12:28
 0  51
ओवैसी का बीजेपी-RSS पर तीखा प्रहार: CJI गवई पर जूता फेंकने वाले पर केस क्यों नही? कहा- योगी के राज्य में दलितों पर अत्याचार चरम पर। 
ओवैसी का बीजेपी-RSS पर तीखा प्रहार: CJI गवई पर जूता फेंकने वाले पर केस क्यों नही? कहा- योगी के राज्य में दलितों पर अत्याचार चरम पर। 

हैदराबाद से सांसद और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी और उसके वैचारिक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में, जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का राज है, दलितों पर अत्याचार अपने चरम पर पहुंच चुके हैं। ओवैसी ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बी आर गवई पर जूता फेंकने की घटना का हवाला देते हुए कहा कि यह हमला सिर्फ इसलिए हुआ क्योंकि जस्टिस गवई दलित हैं। उन्होंने RSS प्रमुख मोहन भागवत से सवाल किया कि जब देश के दूसरे दलित चीफ जस्टिस पर हमला हुआ, तब वे चुप क्यों रहे? ओवैसी ने कहा कि देश में दलितों पर हो रहे अत्याचारों पर RSS और बीजेपी चुप्पी साधे हुए हैं। सनातन धर्म के नाम पर यह अन्याय कब तक चलेगा? यह बयान ओवैसी का एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। यह घटना भारतीय न्यायपालिका और दलित समुदाय के खिलाफ बढ़ते कथित हमलों को लेकर राजनीतिक बहस को हवा दे रही है।

घटना का केंद्र बिंदु 7 अक्टूबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट में घटी। एक निलंबित वकील राकेश किशोर ने चीफ जस्टिस बी आर गवई पर जूता फेंकने की कोशिश की। यह घटना सुप्रीम कोर्ट की बेंच सुनवाई के दौरान हुई, जब किशोर ने जस्टिस गवई की टिप्पणियों पर आपत्ति जताई। किशोर ने चिल्लाते हुए कहा कि जस्टिस गवई ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'बुलडोजर जस्टिस' की आलोचना की, जो बरेली में हुई थी। किशोर ने जूता फेंकने की कोशिश की, लेकिन वह चूक गया। सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत सुरक्षा कर्मियों को बुलाया और किशोर को हिरासत में लिया। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि दिल्ली पुलिस ने आरोपी के खिलाफ कोई औपचारिक केस दर्ज नहीं किया। ओवैसी ने इसी पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर आरोपी का नाम 'असद' होता या कोई मुस्लिम होता, तो पुलिस तुरंत कार्रवाई करती और उसे पाकिस्तान का जासूस बता देती। लेकिन चूंकि नाम राकेश किशोर है, कोई एक्शन नहीं।

असदुद्दीन ओवैसी ने अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने कहा, "मोदी जी, बताइए न, क्या आपकी सरकार और नीतियां जिम्मेदार नहीं? आपने ऐसे लोगों को सशक्त बनाया है।" उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी सरकार ने लोगों के दिलों में जहर भरा है। ओवैसी ने दलित भाइयों से अपील की कि चीफ जस्टिस पर जूता फेंकना दलित समुदाय का अपमान है। उन्होंने मोहन भागवत का नाम लेते हुए पूछा कि जब सुप्रीम कोर्ट के दलित जज पर हमला हुआ, तब RSS चुप क्यों रहा? ओवैसी ने कहा कि योगी आदित्यनाथ के राज्य उत्तर प्रदेश में दलितों पर अत्याचार सबसे ज्यादा हो रहे हैं। बुलडोजर कार्रवाई के नाम पर घर तोड़े जा रहे हैं, और न्यायपालिका की आलोचना करने पर हमले हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के नाम पर यह अन्याय कब तक चलेगा? यह बयान ओवैसी का AIMIM की रैली में भी दोहराया गया, जहां उन्होंने कहा कि RSS और बीजेपी दलितों, मुस्लिमों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हैं।

यह विवाद सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी से जुड़ा है, जिसमें जस्टिस गवई ने बुलडोजर कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। बरेली में 'आई लव मुहम्मद' बैनर हटाने के विरोध में हुई हिंसा के बाद योगी सरकार ने कई घरों पर बुलडोजर चलाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बिना कानूनी प्रक्रिया के संपत्ति नष्ट करना गलत है। किशोर ने इसी पर गुस्सा जताया। ओवैसी ने कहा कि अगर मुस्लिम विरोधी बैनर होता, तो कोई कार्रवाई न होती। लेकिन मुस्लिम नाम पर बुलडोजर चले। उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी, मोहन भागवत और नीतीश कुमार से सवाल किया कि वे इस माहौल के लिए जिम्मेदार क्यों नहीं? ओवैसी का यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। AIMIM के समर्थकों ने इसे शेयर किया, जबकि बीजेपी समर्थकों ने ओवैसी पर हमला बोला।

बीजेपी ने ओवैसी के बयान पर पलटवार किया। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि ओवैसी हमेशा देश विरोधी बयान देते हैं। उन्होंने कहा कि मोहन भागवत ने कुछ गलत नहीं कहा। गिरिराज ने ओवैसी पर आरोप लगाया कि वे अपने डीएनए में ही एंटी-इंडिया सेंटिमेंट रखते हैं। बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पर हमला गलत है, लेकिन ओवैसी इसे राजनीतिक रंग दे रहे हैं। दिल्ली बीजेपी ने कहा कि पुलिस जांच कर रही है, जल्द कार्रवाई होगी। लेकिन ओवैसी ने कहा कि जांच का बहाना है। अगर नाम मुस्लिम होता, तो तुरंत गिरफ्तारी होती। आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता अरविंद केजरीवाल ने भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जस्टिस गवई पर हमला न्यायपालिका को दबाने की कोशिश है। केजरीवाल ने कहा कि आरोपी को सख्त सजा मिलनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई न दोहराए।

यह घटना दलितों पर बढ़ते अत्याचारों को उजागर करती है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में दलितों के खिलाफ अपराध में 10 प्रतिशत वृद्धि हुई। उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा मामले दर्ज हुए। ओवैसी ने कहा कि RSS और बीजेपी सत्ता में आकर दलितों को भूल गए। उन्होंने याद दिलाया कि संविधान निर्माता डॉ. बी आर अंबेडकर ने दलितों के अधिकारों की रक्षा की। लेकिन आज उनके नाम पर जज पर हमला हो रहा। ओवैसी ने सनातन धर्म का जिक्र करते हुए कहा कि असली सनातन समानता सिखाता है, न कि भेदभाव। उन्होंने कहा कि यह अन्याय कब तक चलेगा? AIMIM नेता ने दलित संगठनों से अपील की कि वे एकजुट हों।

असदुद्दीन ओवैसी का राजनीतिक सफर लंबा है। वे 2004 से हैदराबाद से सांसद हैं और AIMIM के प्रमुख हैं। उनके पिता सुल्तान सलाहुद्दीन ओवैसी भी नेता थे। ओवैसी ने लंदन से कानून की पढ़ाई की और मुस्लिम, दलित और पिछड़े वर्गों के मुद्दों पर आवाज उठाई। वे RSS और बीजेपी के कट्टर आलोचक हैं। पहले भी मोहन भागवत पर हमला बोल चुके हैं। 2024 में भागवत के हिंदू एकता वाले बयान पर कहा कि खतरा मोदी और भागवत से है। 2021 में लिंचिंग पर कहा कि अपराधी हिंदुत्व की देन हैं। ओवैसी ने कहा कि वे कभी भारत माता की जय नहीं कहेंगे, अगर यह जबरदस्ती हो। लेकिन वे देशभक्ति पर सवाल नहीं उठाते।

सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। #JusticeForGavai ट्रेंड कर रहा। दलित संगठनों ने दिल्ली में प्रदर्शन किए। बरेली में भी विरोध हुआ। एक एआई जनरेटेड वीडियो वायरल हुआ, जिसमें जस्टिस गवई को जातिवादी तरीके से दिखाया गया। ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा कि यह जातिवाद का उदाहरण है। ओवैसी ने कहा कि यह सिस्टेमेटिक अटैक है। विपक्ष ने सरकार पर दबाव बनाया। कांग्रेस ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता खतरे में है। लेकिन बीजेपी ने कहा कि एक व्यक्ति की गलती पर पूरे संगठन को निशाना न बनाएं।

यह विवाद भारतीय राजनीति के गहरे विभाजन को दिखाता है। ओवैसी का बयान दलित-मुस्लिम एकता पर जोर देता है। उन्होंने कहा कि बीजेपी दलितों को वोट बैंक बनाकर भूल गई। योगी के राज्य में बुलडोजर कार्रवाई को उन्होंने दलित-मुस्लिम विरोधी बताया। ओवैसी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर पर सवाल उठाए, तो हमला। मोहन भागवत चुप क्यों? यह सवाल पूरे देश में गूंज रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि न्यायपालिका पर हमले लोकतंत्र के लिए खतरा हैं। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को नोटिस जारी किया। लेकिन पुलिस की चुप्पी पर सवाल बने हुए।

Also Read- Bihar Election 2025: नीतीश की सुशासन छवि, मोदी की अपील, तेजस्वी का युवा जोश और पीके का नया दांव, कौन मारेगा बाजी?

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow