Bihar Election 2025: नीतीश की सुशासन छवि, मोदी की अपील, तेजस्वी का युवा जोश और पीके का नया दांव, कौन मारेगा बाजी?

बिहार चुनाव 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की घोषणा हो चुकी है। 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में मतदान होगा, जबकि 14 नवंबर को नतीजे आएंगे। 243 सीटों वाली

Oct 8, 2025 - 11:57
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Bihar Election 2025: नीतीश की सुशासन छवि, मोदी की अपील, तेजस्वी का युवा जोश और पीके का नया दांव, कौन मारेगा बाजी?
Bihar Election 2025: नीतीश की सुशासन छवि, मोदी की अपील, तेजस्वी का युवा जोश और पीके का नया दांव, कौन मारेगा बाजी?

बिहार चुनाव 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की घोषणा हो चुकी है। 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में मतदान होगा, जबकि 14 नवंबर को नतीजे आएंगे। 243 सीटों वाली इस सभा में एनडीए (बीजेपी-जेडीयू) और महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस) के बीच कांटे की टक्कर है। लेकिन जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर का प्रवेश इसे त्रिकोणीय बना रहा है। हालिया सर्वे बताते हैं कि एनडीए को 46 फीसदी वोट शेयर मिल सकता है, जबकि महागठबंधन को 41 फीसदी। जन सुराज को 8 फीसदी। लेकिन सात बड़े फैक्टर इस चुनाव को सबसे रोचक बना सकते हैं। बेरोजगारी, जाति समीकरण, महिला वोट, वोटर लिस्ट विवाद, गठबंधन की मजबूती, विकास बनाम पहचान की राजनीति और लीडरशिप अपील। ये फैक्टर तय करेंगे कि नीतीश कुमार की छवि टिकेगी या तेजस्वी यादव का युवा जोश बाजी मारेगा।

पहला फैक्टर है बेरोजगारी और प्रवास। बिहार में युवा सबसे बड़ा मुद्दा उठा रहे हैं। राज्य से हर साल 75 लाख लोग बाहर काम की तलाश में जाते हैं। आईएएनएस-मैट्रिज सर्वे के अनुसार, 57 फीसदी युवा बेरोजगारी को सबसे बड़ी समस्या मानते हैं। तेजस्वी यादव ने इसे भुनाने की कोशिश की है। उन्होंने वादा किया कि सत्ता में आने पर 10 लाख नौकरियां देंगे, प्रतियोगी परीक्षाओं में फीस माफ करेंगे और युवा आयोग बनाएंगे। उनकी 'बिहार अधिकार यात्रा' में युवाओं ने भारी भीड़ लगाई। तेजस्वी का युवा अपील मजबूत है, खासकर मुस्लिम-यादव (एमवाई) वोट बैंक में। लेकिन एनडीए ने भी जवाब दिया। नीतीश कुमार ने इंटर्नशिप योजना शुरू की, जिसमें युवाओं को 4 से 6 हजार रुपये मिलेंगे। पीएम मोदी ने कहा कि बिहार को विशेष पैकेज मिलेगा। फिर भी, सर्वे दिखाते हैं कि 35 फीसदी युवा तेजस्वी को सीएम के रूप में पसंद करते हैं, जबकि नीतीश को 27 फीसदी। प्रशांत किशोर की जन सुराज ने भी युवाओं को निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि वे 100 फीसदी डोमिसाइल पॉलिसी लाएंगे, ताकि बिहारी नौकरियां बिहारियों को मिलें। यह फैक्टर युवा वोटरों को बांट सकता है, जो कुल वोट का 40 फीसदी हैं।

दूसरा फैक्टर जाति समीकरण है। बिहार की राजनीति जाति पर टिकी है। यादव (14 फीसदी), मुस्लिम (17 फीसदी), दलित (16 फीसदी), एबीसी (18 फीसदी) और एबीसी (27 फीसदी) प्रमुख हैं। महागठबंधन का एमवाई समीकरण मजबूत है, लेकिन एनडीए ने एबीसी-महादलित फोकस से जवाब दिया। नीतीश की छवि एबीसी के बीच साफ है, क्योंकि उन्होंने 50 फीसदी पंचायत आरक्षण महिलाओं को दिया। चिराग पासवान की एलजेपी आरवी दलित वोट लेगी, जबकि उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएमए कोइरी वोट। प्रशांत किशोर ने नया दांव चला है। उन्होंने '40-20' फॉर्मूला पेश किया, जिसमें 40 फीसदी हिंदू और 20 फीसदी मुस्लिम वोटरों को जोड़ने की बात है। जन सुराज 75 उम्मीदवार एबीसी से उतारेगी और 40 मुस्लिम। किशोर ने कहा कि जहां आरजेडी मुस्लिम को टिकट देगी, वहां वे नहीं लड़ेंगे। यह सीक्रेट अलायंस जैसा लगता है, जो महागठबंधन के वोट काट सकता है। आईपीडी ऑनलाइन एनालिसिस के अनुसार, जाति अभी भी 60 फीसदी वोट तय करेगी, लेकिन विकास मुद्दे उभर रहे हैं।

तीसरा फैक्टर महिला वोट है। बिहार में महिलाओं का मतदान पुरुषों से ज्यादा है। 2020 में 59 फीसदी महिलाओं ने वोट डाला। नीतीश की छवि यहां मजबूत है। उनकी साइकिल योजना और 35 फीसदी नौकरी आरक्षण ने महिलाओं को जोड़ा। इंकइंसाइट पोल के अनुसार, 60 फीसदी महिलाएं एनडीए को वोट देंगी। तेजस्वी ने 'माई-बेटी सम्मान योजना' से 2500 रुपये मासिक मदद का वादा किया। लेकिन एनडीए ने मुकाबला किया। उन्होंने मुक्ति मंदिर महिला रोजगार योजना से 10 हजार रुपये उद्यमिता के लिए दिए। किशोर की जन सुराज ने भी महिलाओं को टिकट देने का ऐलान किया। महिला सशक्तिकरण इस चुनाव का टर्निंग पॉइंट हो सकता है, क्योंकि महिलाएं शराबबंदी और सुरक्षा पर फोकस कर रही हैं।

चौथा फैक्टर वोटर लिस्ट विवाद है। चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) किया, जिसमें 75 लाख वोटरों के नाम कटे। विपक्ष ने इसे 'वोट चोरी' कहा, खासकर सीमांचल में जहां 7.7 फीसदी नाम कटे। महागठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। एनडीए ने इसे पारदर्शिता बताया। यह विवाद मुस्लिम-दलित वोट को प्रभावित कर सकता है। राहुल गांधी ने इसे उठाया, कहा कि दलित-मुस्लिम वोटरों को हटाया जा रहा है। लेकिन आयोग ने इनकार किया। यह फैक्टर विपक्ष को जोड़ सकता है, लेकिन अगर नाम बहाल न हुए तो महागठबंधन को नुकसान।

पांचवां फैक्टर गठबंधन की मजबूती है। एनडीए में बीजेपी-जेडीयू का सीट शेयर 125-118 हो सकता है। लेकिन नीतीश की उम्र और बार-बार गठबंधन बदलने से एंटी-इनकंबेंसी है। महागठबंधन में आरजेडी-कांग्रेस का 144-99 शेयर है, लेकिन वामपंथियों से टेंशन। जन सुराज का अकेले 243 सीटों पर लड़ना वोट काटेगा। किशोर ने 9 अक्टूबर को उम्मीदवार लिस्ट जारी करने का ऐलान किया। अगर वे 10-11 फीसदी वोट ले लें, तो एनडीए को फायदा। एनडीटीवी एनालिसिस के अनुसार, गठबंधन ब्रेकिंग पॉइंट है।

छठा फैक्टर विकास बनाम पहचान की राजनीति है। एनडीए विकास पर फोकस कर रहा है। नीतीश ने सड़कें, बिजली और शिक्षा सुधारी। लेकिन महागठबंधन पहचान पर। तेजस्वी ने आरक्षण बचाने का वादा किया। किशोर ने भ्रष्टाचार और अवैध प्रवास उठाया। सर्वे दिखाते हैं कि 40 फीसदी वोटर विकास चाहते हैं, लेकिन जाति अभी भी हावी।

सातवां फैक्टर लीडरशिप अपील है। नीतीश की सुशासन छवि 73 फीसदी को पसंद है, लेकिन मोदी की लोकप्रियता 57 फीसदी को प्रभावित करेगी। तेजस्वी का युवा पकड़ मजबूत, लेकिन परिवारवाद की आलोचना। किशोर का नया समीकरण तीसरा विकल्प दे रहा है। सी-वोटर सर्वे में तेजस्वी 35 फीसदी, नीतीश 27 फीसदी और किशोर 23 फीसदी।

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