पटना में तेजस्वी यादव की सुरक्षा में चूक, काफिले में घुसी संदिग्ध कार, ड्राइवर हिरासत में।
Patna News: Tejashwi Yadav पटना के जेपी गंगा पथ, जिसे मरीन ड्राइव के नाम से भी जाना जाता है, पर 9 जुलाई 2025 को एक सनसनीखेज घटना घटी। बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता,...
Tejashwi Yadav News: पटना के जेपी गंगा पथ, जिसे मरीन ड्राइव के नाम से भी जाना जाता है, पर 9 जुलाई 2025 को एक सनसनीखेज घटना घटी। बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के प्रमुख नेता तेजस्वी यादव के काफिले में एक तेज रफ्तार कार ने घुसने की कोशिश की। यह घटना उस समय हुई, जब तेजस्वी नवादा जिले में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेकर पटना लौट रहे थे। सुरक्षाकर्मियों की सतर्कता के कारण कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, और संदिग्ध कार के ड्राइवर को तुरंत पकड़कर सुल्तानगंज थाना पुलिस के हवाले कर दिया गया। प्रारंभिक जांच में पता चला कि काफिले की किसी गाड़ी को टक्कर नहीं लगी, और तेजस्वी सुरक्षित अपने आवास पहुंच गए।
घटना बुधवार शाम को हुई, जब तेजस्वी यादव नवादा से एक कार्यक्रम में हिस्सा लेकर अपने काफिले के साथ पटना लौट रहे थे। जेपी गंगा पथ पर उनकी गाड़ियों का काफिला चल रहा था, तभी एक तेज रफ्तार कार ने उनके काफिले में घुसने की कोशिश की। कुछ खबरों के अनुसार, कार ने तेजस्वी की गाड़ी को ओवरटेक करने का प्रयास किया और काफिले के समानांतर चलने की कोशिश की। सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत सतर्कता दिखाई और कार को रोककर ड्राइवर को हिरासत में ले लिया। ड्राइवर को सुल्तानगंज थाना पुलिस को सौंप दिया गया, और उससे पूछताछ शुरू कर दी गई। पुलिस के अनुसार, ड्राइवर मोकामा का रहने वाला है, लेकिन पूछताछ के दौरान वह बार-बार अपना पता बदल रहा था, जिससे उसके इरादों पर संदेह और गहरा हो गया है।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि ड्राइवर के नशे में होने की संभावना है। कुछ समाचार स्रोतों ने दावा किया कि वह शराब के नशे में था, लेकिन पुलिस ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। सुल्तानगंज थाना पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि ड्राइवर का मकसद क्या था और क्या यह एक सुनियोजित साजिश थी या महज एक लापरवाही भरा हादसा। घटना के दौरान काफिले की सभी गाड़ियां सुरक्षित रहीं, और किसी को कोई चोट नहीं आई। तेजस्वी यादव भी पूरी तरह सुरक्षित हैं और अपने आवास पर पहुंच गए हैं।
यह घटना तेजस्वी यादव की सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर चूक को उजागर करती है। तेजस्वी को जेड-प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है, जिसमें सशस्त्र सुरक्षाकर्मी और विशेष वाहन शामिल हैं। इसके बावजूद, एक संदिग्ध कार का उनके काफिले में घुसना और इतने करीब पहुंचना सुरक्षा प्रोटोकॉल में कमी को दर्शाता है। यह पहली बार नहीं है जब तेजस्वी की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे हैं। इससे पहले 7 जून 2025 को पटना-मुजफ्फरपुर राजमार्ग पर उनके काफिले को एक तेज रफ्तार ट्रक ने टक्कर मारी थी, जिसमें तीन सुरक्षाकर्मी और एक ड्राइवर घायल हो गए थे। उस घटना में भी तेजस्वी बाल-बाल बचे थे, और ट्रक ड्राइवर को गिरफ्तार किया गया था।
सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ आरजेडी समर्थकों ने इसे तेजस्वी के खिलाफ साजिश करार दिया है। एक यूजर ने एक्स पर लिखा, "पहले ट्रक ने काफिले को टक्कर मारी, फिर तेजस्वी के आवास के बाहर गोलियां चलीं, और अब यह कार की घटना। यह संयोग नहीं, साजिश है।" हालांकि, पुलिस ने अभी तक इसे साजिश मानने से इनकार किया है और कहा है कि जांच पूरी होने के बाद ही कोई निष्कर्ष निकाला जाएगा।
इस घटना ने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है। आरजेडी नेताओं ने इसे सुरक्षा में चूक बताते हुए नीतीश कुमार सरकार पर निशाना साधा है। तेजस्वी के बड़े भाई और आरजेडी नेता तेज प्रताप यादव ने कहा कि यह घटना बिहार में कानून-व्यवस्था की बदहाल स्थिति को दर्शाती है। उन्होंने सरकार से मांग की कि तेजस्वी की सुरक्षा को और मजबूत किया जाए। दूसरी ओर, बीजेपी प्रवक्ता अरविंद सिंह ने कहा कि पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करके ड्राइवर को हिरासत में लिया, जो प्रशासन की सतर्कता को दिखाता है। उन्होंने विपक्ष पर बेवजह राजनीति करने का आरोप लगाया। यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब बिहार में कानून-व्यवस्था और अपराध का मुद्दा पहले से ही चर्चा में है। हाल ही में मोतिहारी में अजय यादव की हत्या और बेतिया में एक अपहरण की घटना ने नीतीश सरकार को विपक्ष के निशाने पर ला दिया है। तेजस्वी ने खुद बेतिया अपहरण मामले में सीसीटीवी फुटेज दिखाकर सरकार पर हमला बोला था। इस नई घटना ने विपक्ष को सरकार के खिलाफ और आक्रामक होने का मौका दे दिया है।
सुल्तानगंज थाना पुलिस ड्राइवर से गहन पूछताछ कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या ड्राइवर का कोई आपराधिक इतिहास है या वह किसी बड़े मकसद से प्रेरित था। सीसीटीवी फुटेज और काफिले में मौजूद सुरक्षाकर्मियों के बयान भी जांच का हिस्सा हैं। पुलिस ने मरीन ड्राइव के आसपास के इलाकों में लगे कैमरों की फुटेज भी मांगी है। साथ ही, ड्राइवर की गाड़ी की तलाशी ली जा रही है, ताकि कोई संदिग्ध सामग्री मिलने पर उसका विश्लेषण किया जा सके।
पटना के मरीन ड्राइव पर तेजस्वी यादव के काफिले में संदिग्ध कार के घुसने की घटना ने बिहार की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े किए हैं। सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई ने एक बड़े हादसे को टाल दिया, लेकिन यह घटना प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है। पुलिस की जांच से यह स्पष्ट होगा कि यह एक सुनियोजित साजिश थी या लापरवाही का नतीजा। इस बीच, तेजस्वी की सुरक्षा को और मजबूत करने की मांग तेज हो रही है। यह घटना बिहार में कानून-व्यवस्था के मुद्दे को और गंभीर बनाती है, और आने वाले दिनों में इसके राजनीतिक प्रभाव भी देखने को मिल सकते हैं।
यह घटना तेजस्वी यादव की सुरक्षा को लेकर तीसरी बड़ी चूक है। जून 2025 में ट्रक की टक्कर के बाद, मई 2025 में उनके आवास के बाहर गोलीबारी की घटना हुई थी, जिसमें कोई गिरफ्तारी नहीं हुई थी। इन लगातार घटनाओं ने तेजस्वी की जेड-प्लस सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि विपक्ष के नेता के रूप में तेजस्वी की सक्रियता और बिहार चुनाव 2025 की तैयारियों ने उन्हें कुछ लोगों के निशाने पर ला दिया है।
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