सुप्रीम कोर्ट ने संसद का कानून(UGC) खत्म किया.. जनता के लिए जेल भी कुबूल: निशिकांत दुबे का आप की अदालत में बयान

झारखंड की गोड्डा लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने 'आप की अदालत' कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने संसद द्वा

Feb 15, 2026 - 11:09
 0  3
सुप्रीम कोर्ट ने संसद का कानून(UGC) खत्म किया.. जनता के लिए जेल भी कुबूल: निशिकांत दुबे का आप की अदालत में बयान
सुप्रीम कोर्ट ने संसद का कानून(UGC) खत्म किया.. जनता के लिए जेल भी कुबूल: निशिकांत दुबे का आप की अदालत में बयान

  • निशिकांत दुबे का बड़ा बयान: सुप्रीम कोर्ट संसद का कानून रद्द करे तो जेल जाना कुबूल, जनता के लिए तैयार
  • आप की अदालत में निशिकांत दुबे: सुप्रीम कोर्ट कानून बनाएगा तो संसद बंद कर दें, जेल भी स्वीकार

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने एक टीवी शो में सुप्रीम कोर्ट पर तीखी टिप्पणी की है, जहां उन्होंने संसद द्वारा बनाए कानूनों को न्यायालय द्वारा रद्द करने पर सवाल उठाया और कहा कि जनता के हित में जेल जाना भी स्वीकार है। यह बयान 'आप की अदालत' कार्यक्रम में दिया गया, जो हाल ही में प्रसारित हुआ।

झारखंड की गोड्डा लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने 'आप की अदालत' कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने संसद द्वारा बनाए गए कानूनों को खत्म कर दिया है। दुबे ने दावा किया कि न्यायालय विधायी शक्तियों को अपने हाथ में ले रहा है और संसद की प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर रहा है। दुबे ने बयान दिया कि यदि सुप्रीम कोर्ट ही कानून बनाएगा तो संसद भवन को बंद कर देना चाहिए। उनका कहना था कि कानून बनाने का काम केवल संसद का है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का काम कानूनों की व्याख्या करना है, न कि नए कानून बनाना या संसद के फैसलों को रद्द करना।

कार्यक्रम में दुबे ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा संसद के कानूनों को रद्द करने से विधायिका की शक्तियां प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने राष्ट्रपति को निर्देश देने जैसे उदाहरण दिए, जहां कोर्ट समय सीमा तय कर रहा है। दुबे ने कहा कि यह स्थिति देश को अराजकता की ओर ले जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता के हित में और सही बात कहने के लिए जेल जाना भी कुबूल है। दुबे ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने संसद का बनाया कानून खत्म कर दिया है और जनता के लिए मुझे जेल जाना भी कुबूल है। यह बयान न्यायपालिका और विधायिका के बीच शक्तियों के संतुलन पर उनकी राय को दर्शाता है।

यह बयान अप्रैल 2025 में सुप्रीम कोर्ट पर उनके पिछले विवादास्पद टिप्पणियों से जुड़ा प्रतीत होता है, जहां उन्होंने CJI और कोर्ट पर गृह युद्ध भड़काने का आरोप लगाया था। उस समय सुप्रीम कोर्ट ने उनकी टिप्पणियों को अत्यधिक असंवेदनशील और अज्ञानता दर्शाने वाला बताया था। कोर्ट ने अवमानना याचिका पर सुनवाई की थी और सोशल मीडिया से वीडियो हटाने की मांग पर विचार किया था। 'आप की अदालत' में दुबे ने न्यायपालिका की सीमाओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि कोर्ट संसद के कानूनों पर हस्तक्षेप जारी रखेगा तो संसद और विधानसभाओं को बंद करना पड़ सकता है। दुबे ने संसद की सर्वोच्चता पर बल दिया और कहा कि कानून बनाने का अधिकार केवल चुनी हुई संसद के पास है।

कार्यक्रम में दुबे ने अन्य मुद्दों पर भी बात की, लेकिन मुख्य फोकस सुप्रीम कोर्ट और संसद के बीच संबंध पर रहा। उन्होंने कहा कि संसद चर्चा के बाद कानून बनाती है और कोर्ट को उसकी व्याख्या करनी चाहिए। दुबे ने जनता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई और कहा कि सही बात के लिए जेल भी स्वीकार है। यह बयान 14 फरवरी 2026 को प्रसारित 'आप की अदालत' एपिसोड का हिस्सा है, जहां दुबे ने विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय रखी। कार्यक्रम में राजत शर्मा ने उनसे सवाल किए और दुबे ने विस्तार से जवाब दिए। दुबे झारखंड से बीजेपी के प्रमुख चेहरों में से एक हैं और अक्सर विवादास्पद बयान देते रहे हैं। यह बयान न्यायिक सक्रियता और विधायी स्वतंत्रता के बीच बहस को फिर से जीवंत करता है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow