वर्धन आयुर्वेद: पाइए सुभाष गोयल की जुबानी फैटी लिवर की समस्या का प्राकृतिक समाधान।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में फैटी लिवर जैसी समस्या आम हो गई है। लीवर में अतिरिक्त चर्बी जमा होने से यह बीमारी न केवल थकान

Nov 13, 2025 - 12:12
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वर्धन आयुर्वेद: पाइए सुभाष गोयल की जुबानी फैटी लिवर की समस्या का प्राकृतिक समाधान।
वर्धन आयुर्वेद: पाइए सुभाष गोयल की जुबानी फैटी लिवर की समस्या का प्राकृतिक समाधान।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में फैटी लिवर जैसी समस्या आम हो गई है। लीवर में अतिरिक्त चर्बी जमा होने से यह बीमारी न केवल थकान और पेट दर्द का कारण बनती है, बल्कि डायबिटीज, हृदय रोग और यहां तक कि कैंसर जैसी गंभीर स्थितियों को जन्म दे सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत में 30 प्रतिशत से अधिक लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं। लेकिन आयुर्वेद इसकी जड़ से मुक्ति दिलाने का वादा करता है। चंडीगढ़ स्थित वर्धन आयुर्वेदिक एंड हर्बल मेडिसिन्स के संस्थापक सुभाष गोयल ने दशकों के अनुभव से साबित किया है कि प्राकृतिक जड़ी-बूटियों, आहार परिवर्तन और जीवनशैली सुधार से फैटी लिवर को पूरी तरह उलटा जा सकता है। उनकी संस्था, जो 1992 से सक्रिय है, लाखों मरीजों को समग्र स्वास्थ्य प्रदान कर चुकी है। यहां हम विस्तार से जानेंगे कि कैसे आयुर्वेद फैटी लिवर का स्थायी इलाज करता है।

सबसे पहले समझें कि फैटी लिवर क्या है। यह लीवर की कोशिकाओं में चर्बी का असामान्य संचय है। दो प्रकार होते हैं: अल्कोहलिक फैटी लिवर, जो शराब के अधिक सेवन से होता है, और नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (एनएएफएलडी), जो मोटापा, अनियमित आहार और व्यायाम की कमी से जुड़ी है। लक्षण अक्सर शुरू में नजर नहीं आते, लेकिन थकान, दाहिनी ओर पेट में भारीपन, भूख न लगना, वजन घटना या बढ़ना जैसे संकेत मिलते हैं। अगर अनदेखा किया जाए, तो यह लीवर की सूजन, सिरोसिस या फाइब्रोसिस में बदल सकता है। आधुनिक चिकित्सा में दवाएं और सर्जरी विकल्प हैं, लेकिन ये केवल लक्षण दबाती हैं। आयुर्वेद जड़ को निशाना बनाता है।

आयुर्वेद में लीवर को 'यकृत' कहा जाता है, जो पित्त दोष का स्थान है। पित्त अग्नि या चयापचय को नियंत्रित करता है, जबकि कफ दोष चर्बी और स्थिरता से जुड़ा है। जब पित्त और कफ असंतुलित होते हैं, तो 'आम' (विषाक्त पदार्थ) लीवर में जमा हो जाता है, जिससे चर्बी बढ़ती है। सुभाष गोयल बताते हैं कि समस्या का मूल कारण आधुनिक जीवनशैली है: फास्ट फूड, तनाव और शारीरिक निष्क्रियता। वर्धन आयुर्वेद में इलाज दोष संतुलन पर केंद्रित है। वे कहते हैं, "आयुर्वेद रोग को जड़ से मिटाता है, न कि केवल दबाता।" उनकी टीम में डॉ. अनिल कुमार (एमडी आयुर्वेद), डॉ. किरण कौशिक (गोल्ड मेडलिस्ट) और डॉ. मिशाल गोयल जैसे विशेषज्ञ हैं, जो व्यक्तिगत परामर्श देते हैं।

वर्धन आयुर्वेदिक एंड हर्बल मेडिसिन्स की स्थापना सुभाष गोयल ने 1992 में की थी। चंडीगढ़ के सेक्टर 44 डी में स्थित यह केंद्र जीएमपी प्रमाणित सुविधाओं से लैस है। गोयल जी, जो वैद्य के रूप में जाने जाते हैं, ने 30 वर्षों में नशा मुक्ति, त्वचा रोग, मानसिक विकार और लीवर संबंधी समस्याओं का सफल इलाज किया है। वे श्री धनवंतरी धाम के संस्थापक भी हैं, जो दिल्ली-अंबाला हाईवे पर स्थित है। 800 से अधिक निःशुल्क मेडिकल कैंप आयोजित कर उन्होंने डायबिटीज जांच, जोड़ों के दर्द और नशा मुक्ति जागरूकता फैलाई। उनका 'सुभाष गोयल हेल्थ शो' सेलिब्रिटी और विशेषज्ञों के साथ आयुर्वेद पर चर्चा करता है। गोयल जी का मानना है कि आयुर्वेद हर व्यक्ति के लिए सुलभ होना चाहिए, इसलिए वे कम लागत पर वैश्विक परामर्श देते हैं। उनकी दवाएं आयुष मंत्रालय के मानकों पर आधारित हैं।

फैटी लिवर के इलाज में वर्धन आयुर्वेद पंचकर्म चिकित्सा का उपयोग करता है। पंचकर्म शरीर की शुद्धि का प्राचीन तरीका है, जो विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है। वमन (उल्टी द्वारा शुद्धि) पित्त को संतुलित करता है, जबकि विरेचन (पurgation) लीवर से आम निकालता है। बस्ति (मेडिकेटेड एनिमा) चयापचय सुधारता है। अभ्यंग (तेल मालिश) और स्वेदन (भाप स्नान) रक्त संचार बढ़ाते हैं। गोयल जी के अनुसार, 21 दिनों का पंचकर्म कोर्स फैटी लिवर को 50 प्रतिशत तक कम कर सकता है। एक केस में, 35 वर्षीय मरीज का ग्रेड II फैटी लिवर दो माह के इलाज से सामान्य हो गया। रक्त जांच में एएलटी, कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स सामान्य स्तर पर लौट आए।

जड़ी-बूटियां फैटी लिवर का मुख्य हथियार हैं। वर्धन में कुटकी (पिक्रोराइजा कुरोआ) लीवर टॉनिक के रूप में दी जाती है, जो पित्त शांत करती है और चर्बी घोलती है। कालमेघ (एंड्रोग्राफिस पैनिकुलाटा) विषाक्त पदार्थ साफ करता है। भृंगराज लीवर कोशिकाओं की मरम्मत करता है। त्रिफला (आंवला, हरड़, बहेड़ा) पाचन सुधारता और कफ कम करता है। गुडूची इम्यूनिटी बढ़ाती है। गोयल जी की विशेष दवा 'लिवर डिटॉक्स टैबलेट' में ये सभी मिले होते हैं। घरेलू नुस्खे भी सुझाते हैं: हल्दी दूध, त्रिफला चूर्ण रात को, और नींबू पानी सुबह। एक वीडियो में वे कहते हैं, "एक गोली से फैटी लिवर ठीक हो सकता है, लेकिन नियमितता जरूरी है।"

आहार और जीवनशैली में बदलाव इलाज का आधार हैं। आयुर्वेद में 'पथ्य' (उपयुक्त आहार) पर जोर है। वर्धन के आहार प्लान में हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और कम चर्बी वाले प्रोटीन शामिल हैं। तीखा, तला-भुना, प्रोसेस्ड फूड और शराब से परहेज करें। कड़वे स्वाद वाले भोजन जैसे करेला, मेथी लीवर detox करते हैं। गोयल जी सलाह देते हैं: "रोज 30 मिनट पैदल चलें, योग करें। प्राणायाम जैसे कपालभाती पित्त संतुलित करता है।" तनाव प्रबंधन के लिए मेडिटेशन और शिरोधारा थेरेपी दी जाती है। एक मरीज ने बताया, "तीन माह के आहार से मेरा वजन 10 किलो कम हुआ और अल्ट्रासाउंड सामान्य आया।"

वर्धन आयुर्वेद की सफलता केस स्टडीज से साबित होती है। एक 45 वर्षीय व्यक्ति, जो डायबिटीज के साथ फैटी लिवर से पीड़ित था, ने छह माह का कोर्स लिया। पंचकर्म, हर्बल दवाएं और योग से उनका लीवर फंक्शन 80 प्रतिशत सुधरा। एक अन्य महिला, मोटापे से जूझ रही, ने दो माह में ग्रेड I फैटी लिवर से मुक्ति पाई। गोयल जी के फोन कंसल्टेशन ने दूरदराज के मरीजों को फायदा पहुंचाया। उनकी दवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं, लेकिन परामर्श अनिवार्य है।

फैटी लिवर रोकथाम के लिए गोयल जी कहते हैं, "जल्दी पता चले तो आसानी से ठीक होता है।" नियमित जांच, संतुलित आहार और व्यायाम अपनाएं। आयुर्वेद न केवल लीवर बचाता है, बल्कि समग्र स्वास्थ्य देता है। वर्धन जैसे केंद्र प्रामाणिक आयुर्वेद को जीवंत रखते हैं। अगर आप भी पीड़ित हैं, तो चंडीगढ़ के SCO 372, सेक्टर 44 डी विजिट करें या 99150-99575 पर संपर्क करें। सुभाष गोयल का संदेश है: "प्रकृति का सहारा लें, रोग जड़ से मिटेगा।" यह यात्रा नई जिंदगी की शुरुआत है।

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