8 घंटे की लगातार नींद शरीर के लिए बेहतर, छोटे-छोटे गैप वाली पॉलीफेजिक नींद में स्वास्थ्य जोखिम अधिक, वैज्ञानिक प्रमाणों से साबित।
वयस्कों के लिए नींद का सबसे अच्छा पैटर्न वह है जिसमें एक ही बार में 7 से 9 घंटे की लगातार नींद ली जाए, जिसे मोनोफेजिक नींद कहा
वयस्कों के लिए नींद का सबसे अच्छा पैटर्न वह है जिसमें एक ही बार में 7 से 9 घंटे की लगातार नींद ली जाए, जिसे मोनोफेजिक नींद कहा जाता है। यह पैटर्न शरीर की प्राकृतिक सर्केडियन रिदम के अनुरूप होता है और सभी नींद चरणों को पूरा करने की अनुमति देता है, जिसमें गहरी नींद और रैपिड आई मूवमेंट नींद शामिल हैं। इन चरणों से मस्तिष्क की मरम्मत, स्मृति मजबूत होना, हार्मोन संतुलन और इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। छोटे-छोटे गैप में नींद लेने का पैटर्न, जिसे पॉलीफेजिक या सेगमेंटेड नींद कहा जाता है, अक्सर कुल नींद की मात्रा कम कर देता है और नींद की गुणवत्ता प्रभावित करता है। पॉलीफेजिक नींद में दिन भर में कई छोटी नींदें ली जाती हैं, जैसे उबरमैन शेड्यूल में हर छह घंटे में 30 मिनट की नींद या एवरीमैन में तीन घंटे की कोर नींद प्लस तीन 20 मिनट की झपकियां। इन पैटर्नों के समर्थक दावा करते हैं कि इससे जागने का समय बढ़ता है और उत्पादकता सुधरती है, लेकिन वैज्ञानिक अध्ययनों में ऐसे दावों का कोई प्रमाण नहीं मिला। नेशनल स्लीप फाउंडेशन की एक सहमति पैनल ने 2021 में समीक्षा की, जिसमें पाया गया कि पॉलीफेजिक नींद से कोई लाभ नहीं होता और यह शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य तथा प्रदर्शन पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। कुल नींद कम होने से स्लीप डेप्रिवेशन होता है, जो हृदय रोग, डायबिटीज, मोटापा, अवसाद और चिंता का जोखिम बढ़ाता है।
लगातार नींद में नींद के चक्र पूरे होते हैं, जिसमें हर 90 मिनट में लाइट स्लीप, डीप स्लीप और आरईएम स्लीप आता है। छोटी नींदों में आरईएम स्लीप तक पहुंचना मुश्किल होता है, जो सपनों और भावनात्मक प्रसंस्करण के लिए जरूरी है। अध्ययनों से पता चला कि टूटी हुई नींद मूड पर अधिक बुरा प्रभाव डालती है, सकारात्मक भावनाओं को कम करती है और नकारात्मक प्रभाव बढ़ाती है। एक अध्ययन में पाया गया कि तीन रातों तक नींद टूटने से सकारात्मक मूड में गिरावट आई, जबकि कुल नींद कम होने पर भी ऐसा नहीं हुआ। बाइफेजिक नींद, जिसमें रात की लंबी नींद प्लस दिन में एक झपकी होती है, कुछ मामलों में स्वीकार्य है, जैसे स्पेन में सिएस्टा कल्चर। लेकिन यह भी तब ठीक है जब कुल नींद 7-9 घंटे रहे। पॉलीफेजिक में अक्सर कुल नींद 2-4 घंटे तक सीमित हो जाती है, जो खतरनाक है। जानवरों में पॉलीफेजिक नींद आम है, लेकिन मनुष्यों में मोनोफेजिक पैटर्न विकसित हुआ है। प्री-इंडस्ट्रियल समय में सेगमेंटेड नींद थी, लेकिन वह भी कुल 8 घंटे के आसपास होती थी, न कि कम।
वैज्ञानिक समुदाय में सहमति है कि वयस्कों को लगातार नींद लेनी चाहिए। पॉलीफेजिक नींद के प्रयोग अक्सर शुरुआत में तनाव हार्मोन से ऊर्जा देते हैं, लेकिन लंबे समय में थकान, संज्ञानात्मक गिरावट और स्वास्थ्य समस्याएं आती हैं। अध्ययनों में पाया गया कि अनियमित नींद पैटर्न से सर्केडियन रिदम बिगड़ता है, जो टाइम जोन बदलने जैसा प्रभाव डालता है और शैक्षणिक प्रदर्शन कम करता है। नींद की कमी से इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, वजन बढ़ता है और मेटाबॉलिक समस्या आती है। टूटी नींद से ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है, जो सेल डैमेज का कारण बनता है। कुछ संस्कृतियों में बाइफेजिक पैटर्न आम है, लेकिन कुल नींद पर्याप्त रहती है। पॉलीफेजिक में ऐसा नहीं होता। शरीर को लगातार नींद से सभी स्टेज मिलते हैं, जो मेमोरी, लर्निंग और रिस्टोरेशन के लिए जरूरी हैं। छोटी नींदें इन स्टेज को बाधित करती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि 7-9 घंटे की लगातार नींद लें, नियमित समय पर सोएं और जागें। यदि नींद टूटती है, तो कारण पता करें, जैसे स्लीप एप्निया या तनाव।
What's Your Reaction?







