हमास के हमले की नाकामी पर इस्राइल ने तीन वरिष्ठ जनरलों को बर्खास्त किया, कई अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई।
इस्राइल की सेना ने 7 अक्टूबर 2023 को हमास के घातक हमले को रोकने में हुई गंभीर चूक के लिए तीन वरिष्ठ जनरलों को बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई
इस्राइल की सेना ने 7 अक्टूबर 2023 को हमास के घातक हमले को रोकने में हुई गंभीर चूक के लिए तीन वरिष्ठ जनरलों को बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई इस्राइल के सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जामिर ने की है। जामिर ने इसे एक गंभीर व्यवस्थागत विफलता बताया है। हमले में करीब 1200 इस्राइलियों की जान चली गई थी, ज्यादातर नागरिक। हमास ने 250 से अधिक लोगों को बंधक बना लिया था। यह हमला इस्राइल के इतिहास का सबसे काला दिन था। दो साल बाद, 23 नवंबर 2025 को इस कार्रवाई की घोषणा हुई। इससे जनता में जवाबदेही की मांग तेज हो गई है। लेकिन प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार ने अभी तक राष्ट्रीय जांच आयोग गठित नहीं किया है। प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए हैं। वे स्वतंत्र जांच चाहते हैं।
हमास का हमला सुबह करीब 6:30 बजे शुरू हुआ। यह यहूदी त्योहार सिमचत तोरा के दिन था। हमास के हजारों लड़ाके गाजा की सीमा से घुसे। उन्होंने पैराग्लाइडर, ड्रोन और नावों का इस्तेमाल किया। दक्षिणी इस्राइल के किबुट्ज, सैन्य ठिकाने और एक म्यूजिक फेस्टिवल पर हमला बोला। सुपरनोवा म्यूजिक फेस्टिवल पर 360 से ज्यादा लोग मारे गए। लड़ाकों ने घर-घर जाकर नरसंहार किया। महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाया। इस्राइल की खुफिया एजेंसी शिन बेट और सैन्य खुफिया विभाग को महीनों पहले चेतावनी मिली थी। एक दस्तावेज में हमास की योजना का जिक्र था। लेकिन अधिकारियों ने इसे कल्पना समझ लिया। एक सिग्नल इंटेलिजेंस अधिकारी ने सितंबर 2023 में अलर्ट दिया। लेकिन वरिष्ठों ने अनदेखा कर दिया। सीमा पर घुसपैठ का खतरा कम आंका गया।
इस्राइल डिफेंस फोर्सेस (आईडीएफ) ने शुरुआती घंटों में जवाब देने में देरी की। सैनिकों की तैनाती कमजोर थी। हवाई हमलों से बचाव विफल रहा। नौसेना ने समुद्री हमले को रोकने में नाकाम रही। हमले के बाद इस्राइल ने गाजा पर हमला बोला। दो साल के युद्ध में 47,000 से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे गए। लेकिन इस्राइल में सवाल उठे कि आखिर इतनी बड़ी चूक कैसे हुई। आंतरिक जांच में पाया गया कि निर्णय प्रक्रिया में कमी थी। रात के समय तैनाती गलत रही। कमांड चेन में विफलता हुई। जामिर ने कहा कि आईडीएफ की मुख्य जिम्मेदारी नागरिकों की रक्षा करना था, जो पूरी तरह नाकाम रही। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से कमांडरों से बात की। कई को तलब किया।
बर्खास्तगी की सूची में तीन प्रमुख जनरल हैं। पहला, मेजर जनरल आहारोन हलीवा। वे उस समय आईडीएफ की इंटेलिजेंस डायरेक्टोरेट के प्रमुख थे। हलीवा ने हमास की योजना को कम आंका। चेतावनियों को नजरअंदाज किया। दूसरा, मेजर जनरल ओडेड बस्युक। वे ऑपरेशंस डायरेक्टोरेट के कमांडर थे। शुरुआती प्रतिक्रिया में देरी हुई। तीसरा, मेजर जनरल यारोन फिंकलमैन। वे साउदर्न कमांड के कमांडर थे। दक्षिणी सीमा की सुरक्षा उनकी जिम्मेदारी थी। फिंकलमैन ने पहले ही इस्तीफा दे दिया था। लेकिन औपचारिक बर्खास्तगी हुई। ये जनरल रिजर्व ड्यूटी से रिलीज हो गए। अब वे सेना में नहीं रहेंगे। जामिर ने कहा कि यह कार्रवाई विश्वास बहाल करने के लिए जरूरी है। कमांड जिम्मेदारी का स्पष्ट मानक तय करेगी।
इसके अलावा, कई अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई। एयर फोर्स चीफ को फटकार लगाई गई। हमास के ड्रोन और पैराग्लाइडर हमलों को रोकने में नाकामी हुई। नेवी चीफ को भी चेतावनी दी गई। समुद्री हमले में 12 से ज्यादा नागरिक मारे गए। वर्तमान इंटेलिजेंस डायरेक्टोरेट चीफ को फटकार मिली। वे 2023 में ऑपरेशंस डिवीजन चीफ थे। उनका कार्यकाल 2028 तक रहेगा। लेकिन बाद में वे स्वेच्छा से इस्तीफा देंगे। चार अन्य जनरलों और कई वरिष्ठ अधिकारियों को चेतावनी दी गई। ये कार्रवाइयां चेन ऑफ कमांड में फैली हुईं।
यह घटना दो साल के संघर्ष के बाद आई है। हमास और इस्राइल के बीच अक्टूबर 2025 में अमेरिका के मध्यस्थता से युद्धविराम हुआ। पहला चरण चल रहा है। बंधकों की रिहाई हो रही है। लेकिन युद्धविराम अस्थिर है। इस्राइल पर आरोप लगे कि वे शर्तें तोड़ रहे हैं। गाजा में दैनिक हमले हो रहे। हमास ने कहा कि इस्राइल ने येलो लाइन आगे बढ़ाई। लेकिन बर्खास्तगी ने आंतरिक बहस छेड़ दी। रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज ने कहा कि वे रिपोर्ट की समीक्षा करवाएंगे। डिफेंस एस्टेब्लिशमेंट के कंप्ट्रोलर यायर वोलांस्की को जिम्मेदारी सौंपी। वे अतिरिक्त जांच सुझा सकते हैं। काट्ज ने कहा कि यह कदम सेना को मजबूत बनाएगा।
इस्राइल की जनता में गुस्सा है। तेल अवीव में शनिवार को हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे। विपक्षी नेता उनके साथ थे। वे राज्य आयोग की मांग कर रहे हैं। पोल दिखाते हैं कि ज्यादातर इस्राइलियों स्वतंत्र जांच चाहते हैं। नेतन्याहू सरकार पर दबाव बढ़ रहा। पीएम ने कहा कि जांच युद्ध खत्म होने के बाद होगी। लेकिन कई वरिष्ठ अधिकारी पहले ही इस्तीफा दे चुके। पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ, इंटेलिजेंस हेड और डिफेंस मंत्री गए। जनरल हेरजी हलीवी ने जनवरी 2025 में इस्तीफा दिया। उन्होंने कहा कि वे जिम्मेदारी लेते हैं। फिंकलमैन भी इस्तीफा दे चुके थे।
हमले की पृष्ठभूमि जटिल है। 2023 में सऊदी अरब ने इस्राइल को चेतावनी दी थी। मिस्र ने कहा कि विस्फोट हो सकता है। बस्तियों के हमले बढ़ रहे थे। फिलिस्तीनियों को बेदखल किया जा रहा था। हमास ने ऑपरेशन अल-अक्सा फ्लड नाम दिया। उन्होंने कहा कि यह कब्जे के खिलाफ है। लेकिन इस्राइल ने इसे आतंकवाद कहा। हमले में दोस्ताना आग की घटनाएं भी हुईं। आईडीएफ ने अपने ही लोगों पर गोली चलाई। जांच में पाया गया कि कमांडरों ने अधीनस्थों को दबाया। सवाल उठाने वालों को चुप कराया। यह विषाक्त माहौल था।
अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या नेतन्याहू पर कार्रवाई होगी। विपक्ष कहता है कि वे जिम्मेदार हैं। लेकिन सरकार कहती है कि युद्ध पहले खत्म हो। युद्धविराम के पहले चरण में बंधक रिहा हो रहे। सैकड़ों फिलिस्तीनी कैदी छूटे। लेकिन दूसरा चरण अटका है। हमास काहिरा में मध्यस्थों से बात कर रहा। इस्राइल गाजा में सैन्य क्षमता तोड़ने पर जोर दे रहा।
यह बर्खास्तगी इस्राइल के सैन्य इतिहास में सबसे बड़ी है। दो साल में पहली बार इतने वरिष्ठ अधिकारियों पर एक्शन। जामिर ने कहा कि यह विश्वास बहाल करेगा। लेकिन जनता को लगता है कि यह काफी नहीं। स्वतंत्र आयोग चाहिए। आयोग पूरी सच्चाई सामने लाएगा। राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका जांचेगा। फिलहाल, सेना सुधार पर जोर। ट्रेनिंग बढ़ेगी। खुफिया साझा बेहतर होगा।
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