भारतीय महिला कबड्डी टीम ने चीनी ताइपे को 35-28 से हराकर दूसरी बार जीता कबड्डी विश्व कप।

ढाका की धरती पर एक ऐतिहासिक शाम का गवाह बना। 24 नवंबर 2025 को बांग्लादेश के राजधानी ढाका में आयोजित महिला कबड्डी विश्व कप 2025

Nov 25, 2025 - 11:47
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भारतीय महिला कबड्डी टीम ने चीनी ताइपे को 35-28 से हराकर दूसरी बार जीता कबड्डी विश्व कप।
भारतीय महिला कबड्डी टीम ने चीनी ताइपे को 35-28 से हराकर दूसरी बार जीता कबड्डी विश्व कप।

ढाका की धरती पर एक ऐतिहासिक शाम का गवाह बना। 24 नवंबर 2025 को बांग्लादेश के राजधानी ढाका में आयोजित महिला कबड्डी विश्व कप 2025 का फाइनल मुकाबला समाप्त होते ही भारत का तिरंगा लहराया। भारतीय महिला कबड्डी टीम ने चीनी ताइपे को 35-28 के स्कोर से हराकर दूसरी लगातार खिताब अपने नाम कर लिया। यह टूर्नामेंट का दूसरा संस्करण था और पहली बार यह आयोजन भारत के बाहर हुआ। 11 देशों की टीमें मैदान पर उतरीं और भारतीय खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट में एक भी मैच नहीं हारा। उनकी अजेय यात्रा ने न केवल खिताब दिलाया बल्कि महिलाओं के कबड्डी खेल को वैश्विक पटल पर नई ऊंचाई दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस जीत पर टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि युवाओं को प्रेरित करेगी और कबड्डी को नई दिशा देगी।

मैच ढाका के कबड्डी स्टेडियम में खेला गया। भारतीय टीम ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया। पहले हाफ में दोनों टीमें कंधे से कंधा मिलाकर चलीं। भारत ने सात अंक बनाए जबकि चीनी ताइपे ने छह। रेडिंग में भारतीय खिलाड़ियों ने सुपर रेड्स कराए और डिफेंस में सुपर टैकल्स के साथ विरोधी को बांधे रखा। दूसरे हाफ में भारत ने गति पकड़ी। कप्तान नेगी ने महत्वपूर्ण रेड्स किए और टीम ने 28 अंक बना लिए। चीनी ताइपे ने अंतिम प्रयास किया लेकिन भारतीय डिफेंस ने उन्हें सिर्फ 22 तक सीमित रखा। अंतिम स्कोर 35-28 रहा। मैच के बाद भारतीय खिलाड़ियां एक-दूसरे को गले लगाती नजर आईं। ट्रॉफी जीतते ही स्टेडियम में तालियों की गड़गड़ाहट गूंजी। यह जीत 2012 के पहले विश्व कप के बाद भारत की दूसरी लगातार सफलता है।

टूर्नामेंट की शुरुआत 18 नवंबर को हुई। 11 टीमें दो ग्रुपों में बंटीं। ग्रुप ए में भारत, ईरान, थाईलैंड, बांग्लादेश और जर्मनी थीं। ग्रुप बी में चीनी ताइपे, केन्या, नेपाल, तंजानिया, पोलैंड और युगांडा। भारतीय टीम ने ग्रुप स्टेज में धमाल मचा दिया। पहले मैच में थाईलैंड को 45-15 से हराया। थाईलैंड की कमजोर डिफेंस को भारतीय रेडर्स ने ध्वस्त कर दिया। अगला मुकाबला मेजबान बांग्लादेश के साथ था। भारत ने 38-20 से जीत दर्ज की। बांग्लादेश के दबाव में भी भारतीय खिलाड़ियां शांत रहीं। फिर जर्मनी को 52-10 से धूल चटाई। जर्मनी नया देश था कबड्डी में लेकिन भारत ने उन्हें कोई मौका नहीं दिया। आखिरी ग्रुप मैच में युगांडा को 41-18 से हराया। इस तरह भारत ग्रुप टॉपर बना।

सेमीफाइनल में भारत का सामना ईरान से हुआ। ईरान ने ग्रुप स्टेज में अच्छा प्रदर्शन किया था लेकिन फाइनल में पहुंचने का सपना भारतीयों ने तोड़ दिया। 33-21 के स्कोर से भारत ने जीत हासिल की। रेडिंग में 18 अंक बनाए और डिफेंस में 15। ईरान को सिर्फ दो सुपर रेड्स मिले। दूसरी तरफ चीनी ताइपे ने मेजबान बांग्लादेश को 25-18 से हराकर फाइनल में जगह बनाई। चीनी ताइपे भी अजेय थी ग्रुप स्टेज में। उन्होंने केन्या को 30-15, नेपाल को 28-20, तंजानिया को 35-12, पोलैंड को 32-16 और युगांडा को 29-18 से हराया। सेमी में बांग्लादेश के खिलाफ उन्होंने मजबूत डिफेंस दिखाया। लेकिन फाइनल में भारतीयों की फिटनेस और रणनीति ने उन्हें पीछे छोड़ दिया।

भारतीय टीम की सफलता के पीछे कोच मनप्रीत सिंह और अजय ठाकुर की मेहनत है। मैनप्रीत ने कहा कि लड़कियों ने पूरे टूर्नामेंट में दबाव नहीं लिया। हर मैच को अभ्यास की तरह खेला। अजय ठाकुर ने महिलाओं के कबड्डी में प्रगति पर खुशी जताई। कहा कि यह वैश्विक अपील का प्रमाण है। बांग्लादेश ने पहली बार आयोजन किया जो सफल रहा। स्टेडियम में 5000 दर्शक थे। मैचों का प्रसारण स्टार स्पोर्ट्स और यूट्यूब पर लाइव दिखाया गया। भारत में लाखों ने देखा।

टीम में कई सितारे चमके। संजू देवी को टूर्नामेंट की सबसे मूल्यवान खिलाड़ी चुना गया। उन्होंने रेडिंग में 45 अंक बनाए। कप्तान नेगी ने डिफेंस में लीड किया। 30 टैकल्स सफल। अन्य खिलाड़ियों में प्रमोदिनी, पूजा और रेनू ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पांच खिलाड़ी हिमाचल प्रदेश से थीं। यह राज्य कबड्डी का गढ़ बन रहा है। टीम ने पूरे टूर्नामेंट में 250 से ज्यादा अंक रेडिंग से बनाए। डिफेंस में 200 टैकल्स। कोई ऑलआउट नहीं झेला। चीनी ताइपे की कप्तान ली ने अच्छी कोशिश की लेकिन अनुभव की कमी रही।

यह जीत भारत के लिए साल की दूसरी बड़ी सफलता है। मार्च में एशियन चैंपियनशिप भी जीती। प्रो कबड्डी लीग ने महिलाओं को मौके दिए। कई खिलाड़ी पीकेएल से आईं। सरकार ने खेलो इंडिया के तहत ट्रेनिंग दी। पीएम मोदी ने ट्विटर पर लिखा कि यह जीत कृतज्ञता, कौशल और समर्पण की मिसाल है। युवाओं को कबड्डी अपनाने के लिए प्रेरित करेगी। खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी बधाई दी। कहा कि महिलाओं का खेल अब नई ऊंचाई छू रहा।

टूर्नामेंट ने कबड्डी को वैश्विक बनाया। 11 देशों ने हिस्सा लिया। पहले संस्करण 2012 में सिर्फ छह टीमें थीं। अब अफ्रीका, एशिया और यूरोप से प्रतिभाएं आ रही हैं। ढाका में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। भारतीय टीम ने बांग्लादेशी संस्कृति का सम्मान किया। फाइनल के बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई। दोनों टीमों ने एक-दूसरे की तारीफ की। चीनी ताइपे ने कहा कि भारत से सीखेंगे।

भारत में इस जीत का जश्न जोरों पर है। सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। हैशटैग इंडियाविन्स ट्रेंड कर रहा। स्कूलों में विशेष सभा हुई। हिमाचल में स्थानीय नेता खिलाड़ियों को सम्मानित करेंगे। यह जीत ग्रामीण लड़कियों के लिए मिसाल है। कबड्डी गांवों का खेल है लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर। फेडरेशन ने कहा कि अगला टूर्नामेंट 2028 में होगा। भारत दावेदार है।

महिलाओं के खेल में प्रगति तेज है। ओलंपिक में कबड्डी शामिल करने की मांग तेज। एशियाड में भारत ने कई मेडल जीते। यह विश्व कप जीत आत्मविश्वास बढ़ाएगी। खिलाड़ियों ने कहा कि सपना पूरा हुआ। अब ओलंपिक पर नजर। कोचिंग स्टाफ ने फिटनेस पर जोर दिया। डाइट और योग से टीम मजबूत बनी।

टूर्नामेंट के दौरान कोई बड़ा विवाद नहीं। सुरक्षित माहौल रहा। बांग्लादेश कबड्डी फेडरेशन ने शानदार आयोजन किया। पुरस्कार वितरण में ट्रॉफी के अलावा 50 लाख रुपये भारत को मिले। चीनी ताइपे को 25 लाख। अन्य टीमों को भी इनाम। यह पैसा खेल विकास में लगेगा।

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