ट्रंप के टैरिफ दांव का उल्टा असर पड़ा- अमेरिकी कंपनियां दिवालियापन की कगार पर पहुंची, 15 साल का रिकॉर्ड टूटा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ नीति ने अप्रत्याशित रूप से उल्टा प्रभाव डाला है, जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था में कंपनियों के दिवालियापन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ नीति ने अप्रत्याशित रूप से उल्टा प्रभाव डाला है, जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था में कंपनियों के दिवालियापन के मामलों में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है। 2025 में जनवरी से नवंबर तक के 11 महीनों में दिवालियापन के लिए आवेदन करने वाली कंपनियों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 14 प्रतिशत अधिक हो गई है, जो 15 वर्षों में सबसे ऊंचा स्तर है। इस स्थिति ने ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि टैरिफ लगाने का उद्देश्य राजस्व बढ़ाना और घरेलू उद्योगों को मजबूत करना था, लेकिन इसके विपरीत कंपनियां बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं। महंगाई की बढ़ती दर ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है, जिससे विभिन्न सेक्टरों में आर्थिक दबाव बढ़ा है। आंकड़ों के अनुसार, चैप्टर 7 और चैप्टर 11 के तहत 717 कंपनियों ने दिवालियापन के लिए आवेदन किया है, जहां चैप्टर 11 के अंतर्गत कंपनी का संचालन जारी रहता है जबकि चैप्टर 7 में कंपनी पूरी तरह बंद हो जाती है और उसकी संपत्तियां बिक जाती हैं। ट्रंप के टैरिफ का सबसे अधिक प्रभाव आयात पर निर्भर कंपनियों पर पड़ा है, विशेष रूप से औद्योगिक क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों पर। परिवहन, विनिर्माण और निर्माण जैसे सेक्टरों में कंपनियां सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं, जहां बढ़े हुए टैरिफ ने लागतों को इतना बढ़ा दिया कि कई कंपनियां घाटे में चलने लगीं। एक वर्ष की अवधि में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 70,000 से अधिक नौकरियां समाप्त हो गईं, जो टैरिफ नीति के साइड इफेक्ट्स को दर्शाता है। ट्रंप प्रशासन ने टैरिफ के माध्यम से राजस्व उत्पन्न करने का दावा किया था, लेकिन वास्तविकता में यह दावा विफल साबित हुआ है, क्योंकि बढ़ी हुई लागतों ने कंपनियों की लाभप्रदता को बुरी तरह प्रभावित किया। 2025 में दिवालियापन के मामलों की संख्या 2009 की वैश्विक मंदी के स्तर तक पहुंच गई है, जब आर्थिक संकट के कारण बड़ी संख्या में कंपनियां बंद हुई थीं। इस वर्ष के आंकड़े बताते हैं कि ट्रंप के व्यापार युद्धों ने सप्लाई चेन को बाधित किया और लागतों में वृद्धि की, जिससे कंपनियां संकट में फंस गईं।
व्यापार युद्धों के कारण अमेरिकी कंपनियां उच्च ब्याज दरों, महंगाई और बाधित सप्लाई चेन से जूझ रही हैं, जो दिवालियापन के बढ़ते मामलों का प्रमुख कारण है। 2025 में कॉर्पोरेट दिवालियापन 15 वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए, जहां कंपनियां ट्रंप की व्यापार नीतियों से उत्पन्न चुनौतियों का सामना नहीं कर पाईं। विशेष रूप से छोटी और मध्यम आकार की कंपनियां सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं, क्योंकि उनके पास बड़े कॉर्पोरेशनों की तरह संसाधन नहीं होते। ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति ने चीन, मैक्सिको और अन्य देशों से आयात पर भारी शुल्क लगाए, जिससे अमेरिकी कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ गई। उदाहरण के लिए, वियतनाम में निर्मित उत्पादों पर लगे नए आयात शुल्क ने कई कंपनियों को दिवालियापन की ओर धकेल दिया। एक प्रमुख कंपनी, जो घरेलू सफाई रोबोट बनाती है, ने दिवालियापन के लिए आवेदन किया, क्योंकि उसके अधिकांश उत्पाद वियतनाम में बनते हैं और टैरिफ ने उसकी लागतों को असहनीय बना दिया। 2025 में दिवालियापन के मामलों में वृद्धि का एक कारण ट्रंप के व्यापार युद्ध भी हैं, जो सप्लाई चेन को प्रभावित कर रहे हैं और लागतों को बढ़ा रहे हैं। कंपनियां महंगाई, ब्याज दरों और ट्रंप की व्यापार नीतियों से जूझ रही हैं, जिससे दिवालियापन की दर 15 वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। रिटेल सेक्टर में भी टैरिफ का प्रभाव स्पष्ट है, जहां पहले से ही दबाव में चल रहे रिटेल ब्रांड्स और स्टोर्स को सप्लाई चेन में छेद पड़ने से नुकसान हुआ। 2025 की शुरुआत में रिटेल पहले से ही तनाव में था, लेकिन टैरिफ ने स्थिति को और खराब कर दिया, जिससे ब्रांड्स और रिटेलर्स को उत्पादन और आयात में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। दिवालियापन के आवेदनों में वृद्धि ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था की धीमी गति को भी उजागर किया है, जहां उच्च लागतों और कम मांग ने कंपनियों को संकट में डाल दिया।
ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति ने छोटे व्यवसायों को कुचल दिया है, क्योंकि ये व्यवसाय बड़े फर्मों की तरह टैरिफ के प्रभाव को सहन नहीं कर पाते। 2025 में व्यापार युद्धों ने मुख्य सड़क पर कर लगाए, जिससे छोटे व्यवसायों को छुट्टियों के मौसम में भी नुकसान हुआ। टैरिफ की वजह से आयातित सामग्रियों की कीमतें बढ़ गईं, जिससे उत्पादन लागत में वृद्धि हुई और लाभ मार्जिन कम हो गए। कई छोटे व्यवसायों ने दिवालियापन का सामना किया, क्योंकि वे वैकल्पिक सप्लाई चेन नहीं बना पाए। यदि सुप्रीम कोर्ट टैरिफ को असंवैधानिक घोषित करता है, तो कंपनियों को रिफंड मिल सकता है, लेकिन रिफंड की प्रक्रिया जटिल होगी और ट्रंप प्रशासन ने टैरिफ राजस्व को सुरक्षित करने की कोशिश की है। दिवालियापन के मामलों में वृद्धि ने यूरोपीय रक्षा स्टॉक्स में उछाल लाया, लेकिन अमेरिकी बाजारों में गिरावट आई। 2025 में कॉर्पोरेट दिवालियापन में वृद्धि ट्रंप की वापसी के साथ बाजारों को प्रभावित कर रही है, जहां टैरिफ ने वैश्विक बाजारों को हिला दिया। कंपनियां दिवालियापन से जूझ रही हैं, और आंकड़े बताते हैं कि स्थिति 2009 की मंदी जैसी हो गई है। ट्रंप की नीतियों ने सप्लाई चेन को बाधित किया, जिससे लागतें बढ़ीं और नौकरियां गईं। रिटेल, मैन्युफैक्चरिंग और अन्य सेक्टरों में कंपनियां बंद हो रही हैं, और दिवालियापन के आवेदन बढ़ रहे हैं। ट्रंप के टैरिफ ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को चमकाने के बजाय अंधेरे में धकेल दिया, जहां कंपनियां संकट से उबरने की कोशिश कर रही हैं। उच्च ब्याज दरों और महंगाई ने समस्या को बढ़ाया, और टैरिफ ने अंतिम झटका दिया।
दिवालियापन के मामलों में 14 प्रतिशत की वृद्धि ने ट्रंप प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं, क्योंकि राजस्व बढ़ाने का दावा खोखला साबित हुआ। कंपनियां टैरिफ के साइड इफेक्ट्स से जूझ रही हैं, और 717 से अधिक आवेदन दर्ज किए गए हैं। औद्योगिक सेक्टर सबसे प्रभावित है, जहां परिवहन और निर्माण कंपनियां बंद हो रही हैं। मैन्युफैक्चरिंग में नौकरियों की कमी ने अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया, और टैरिफ ने स्थिति को और बिगाड़ा। 2025 के अंत तक दिवालियापन के मामलों में और वृद्धि की आशंका है, यदि टैरिफ नीति जारी रही। छोटे व्यवसायों पर टैरिफ का प्रभाव गहरा है, और वे व्यापार युद्धों से सबसे ज्यादा पीड़ित हैं। ट्रंप की नीतियां अमेरिकी छोटे व्यवसायों को कुचल रही हैं, जहां टैरिफ ने मुख्य सड़क पर कर लगाए। रिटेल सेक्टर में टैरिफ ने सप्लाई चेन को प्रभावित किया, और ब्रांड्स को नुकसान हुआ। 2025 में रिटेल पहले से तनाव में था, लेकिन टैरिफ ने स्थिति को बदतर बना दिया। कंपनियां दिवालियापन से जूझ रही हैं, और आंकड़े 15 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं। ट्रंप के व्यापार युद्धों ने कंपनियों को संकट में डाल दिया, जहां महंगाई और ब्याज दरें अतिरिक्त दबाव बना रही हैं। दिवालियापन के मामलों में वृद्धि ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था की कमजोरियां उजागर कीं, और टैरिफ नीति का उल्टा असर स्पष्ट है। यदि कोर्ट टैरिफ को रद्द करता है, तो रिफंड की प्रक्रिया शुरू हो सकती है, लेकिन यह जटिल होगी। ट्रंप प्रशासन ने टैरिफ राजस्व को सुरक्षित करने की कोशिश की, लेकिन कंपनियां पहले ही दिवालियापन की ओर बढ़ चुकी हैं।
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