देश- विदेश : भारत का पहला बुलेट ट्रेन स्टेशन तैयार- सूरत में जल्द शुरू होगा ट्रायल, 2029 में पूर्ण परिचालन की उम्मीद।
भारत की परिवहन व्यवस्था में एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए, देश का पहला बुलेट ट्रेन स्टेशन गुजरात के सूरत में लगभग तैयार हो चुका है। केंद्रीय गृह...
मुख्य बिंदु:
- आधारशिला: 2017 में पीएम मोदी और शिंजो आबे ने रखी।
- लागत: 1.08 लाख करोड़ रुपये, JICA से 81% ऋण।
- स्टेशन: 12 स्टेशन, 8 गुजरात और 4 महाराष्ट्र में।
- डिज़ाइन: सांस्कृतिक और पर्यावरण-अनुकूल, सौर ऊर्जा का उपयोग।
- प्रगति: 300 किमी वायाडक्ट पूरा, 40 मीटर गर्डर लॉन्च।
- ट्रायल: 2026 में सूरत-बिलिमोरा (50 किमी) पर।
- वायाडक्ट: 465 किमी, 92% कॉरिडोर उन्नत ट्रैक पर।
- स्वदेशी ट्रेनें: BEML द्वारा 280 किमी/घंटा ट्रेनें, 2026 तक तैयार।
- चुनौतियां: महाराष्ट्र में भूमि अधिग्रहण में देरी।
भारत की परिवहन व्यवस्था में एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए, देश का पहला बुलेट ट्रेन स्टेशन गुजरात के सूरत में लगभग तैयार हो चुका है। केंद्रीय गृह, उद्योग, परिवहन, युवा और खेल राज्यमंत्री हर्ष सांघवी ने 24 मई 2025 को घोषणा की कि सूरत-बिलिमोरा खंड पर 2026 में ट्रायल रन शुरू होगा, जबकि पूर्ण परिचालन 2029 तक शुरू होने की उम्मीद है। यह स्टेशन मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) परियोजना का हिस्सा है, जो 508 किलोमीटर लंबा हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर है। इस परियोजना को राष्ट्रीय हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है, जिसमें जापान की शिनकानसेन तकनीक का उपयोग हो रहा है। इस उपलब्धि को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारतीय बुनियादी ढांचे के लिए एक "बड़ा कदम" करार दिया है, जो भारत की हाई-स्पीड रेल तकनीक में बढ़ती क्षमता को दर्शाता है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना भारत की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना है, जिसकी आधारशिला 14 सितंबर 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने अहमदाबाद में रखी थी। यह परियोजना 508 किलोमीटर की दूरी को 320 किमी/घंटा की रफ्तार से तय करने के लिए डिज़ाइन की गई है, जिससे मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय 7 घंटे से घटकर लगभग 3 घंटे हो जाएगा। परियोजना की अनुमानित लागत 1.08 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें से 81% हिस्सा जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) से 0.1% ब्याज दर पर ऋण के रूप में लिया गया है। केंद्र सरकार 10,000 करोड़ रुपये, जबकि गुजरात और महाराष्ट्र सरकारें प्रत्येक 5,000 करोड़ रुपये का योगदान दे रही हैं। इस कॉरिडोर में 12 स्टेशन होंगे, जिनमें 8 गुजरात में (साबरमती, अहमदाबाद, आनंद/नडियाद, वडोदरा, भरूच, सूरत, बिलिमोरा, वापी) और 4 महाराष्ट्र में (मुंबई-बीकेसी, थाणे, विरार, बोईसर) हैं। सूरत स्टेशन इस परियोजना का पहला स्टेशन है, जो अब तकनीकी और बुनियादी ढांचे के लिहाज से लगभग तैयार है।
- सूरत स्टेशन की प्रगति
सूरत स्टेशन को गुजरात के "डायमंड सिटी" के रूप में प्रसिद्ध इस शहर की सांस्कृतिक और औद्योगिक पहचान को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया है। स्टेशन की संरचना आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल है, जिसमें सौर ऊर्जा और ऊर्जा-कुशल प्रणालियों का उपयोग किया गया है। NHSRCL के अनुसार, सूरत-बिलिमोरा खंड (50 किमी) को प्राथमिकता दी गई है, और इस खंड पर 2026 में ट्रायल रन शुरू होने की उम्मीद है। हर्ष सांघवी ने ट्विटर पर सूरत स्टेशन की नवीनतम तस्वीरें साझा करते हुए कहा, "भारत का पहला बुलेट ट्रेन स्टेशन सूरत में लगभग तैयार है। अगले साल ट्रायल रन शुरू होंगे, और 2029 तक पूर्ण सेवा शुरू होने की उम्मीद है।" उनकी पोस्ट NHSRCL की हालिया घोषणा के बाद आई, जिसमें कहा गया था कि 300 किलोमीटर वायाडक्ट (उन्नत रेल संरचनाएं) का निर्माण पूरा हो चुका है, जिसमें सूरत के पास 40 मीटर लंबा फुल-स्पैन बॉक्स गर्डर लॉन्च किया गया। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे "508 किमी लंबे कॉरिडोर के लिए एक बड़ा कदम" बताया। मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर का 92% हिस्सा उन्नत ट्रैक (वायाडक्ट) पर बनाया जा रहा है, जिसमें 465 किमी वायाडक्ट, 9.82 किमी पुल, 5.22 किमी पहाड़ी सुरंगें, और 21 किमी भूमिगत सुरंग (जिसमें 7 किमी समुद्र के नीचे) शामिल हैं। सूरत-बिलिमोरा खंड में 212 किमी वायाडक्ट का निर्माण पूरा हो चुका है, और गुजरात में सभी 8 स्टेशनों की नींव का काम समाप्त हो गया है।
हालांकि, परियोजना को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। शुरुआत में 2023 तक पूरा होने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन भूमि अधिग्रहण में देरी, विशेष रूप से महाराष्ट्र में, और कोविड-19 महामारी ने समयसीमा को प्रभावित किया। गुजरात और दादरा नगर हवेली में 98.7% और 100% भूमि अधिग्रहण पूरा हो चुका है, जबकि महाराष्ट्र में यह आंकड़ा 68.7% है। हाल के महीनों में, महाराष्ट्र में प्रगति तेज हुई है, और राज्य प्रशासन ने सभी जिला कलेक्टरों को भूमि हस्तांतरण को जल्द पूरा करने का निर्देश दिया है। परियोजना में जापान की शिनकानसेन E5 तकनीक का उपयोग हो रहा है, जो अपनी सुरक्षा, समयबद्धता और भूकंप-रोधी विशेषताओं के लिए जानी जाती है। ट्रेनें डबल-स्किन एल्यूमीनियम मिश्र धातु से बनी होंगी, जो शोर-रोधक केबिन और एर्गोनॉमिक सीटिंग प्रदान करेंगी। इसके अलावा, भारत में स्वदेशी बुलेट ट्रेनों का निर्माण भी शुरू हो गया है। बेंगलुरु की BEML को दो 8-कोच हाई-स्पीड ट्रेनसेट्स बनाने का कॉन्ट्रैक्ट मिला है, जो 280 किमी/घंटा की टेस्ट स्पीड और 250 किमी/घंटा की ऑपरेशनल स्पीड के लिए डिज़ाइन की गई हैं। ये ट्रेनें 2026 के अंत तक तैयार होने की उम्मीद है।
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना न केवल परिवहन को बदल देगी, बल्कि यह गुजरात और महाराष्ट्र के आर्थिक परिदृश्य को भी नया रूप देगी। यह कॉरिडोर प्रमुख औद्योगिक और वाणिज्यिक केंद्रों को जोड़ेगा, जिससे व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। सूरत, जो पहले से ही हीरा और कपड़ा उद्योग का केंद्र है, इस परियोजना से और अधिक निवेश आकर्षित करेगा। सोशल मीडिया पर इस उपलब्धि को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। एक यूजर ने लिखा, "सूरत में भारत का पहला बुलेट ट्रेन स्टेशन तैयार होना गर्व का क्षण है। यह भारत की तकनीकी प्रगति का प्रतीक है।" हालांकि, कुछ आलोचकों का कहना है कि परियोजना की लागत बहुत अधिक है और इसे मौजूदा रेल नेटवर्क को बेहतर करने में निवेश करना चाहिए था।
- पर्यावरणय और तकनीक
परियोजना में पर्यावरणीय संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया गया है। थाणे क्रीक के नीचे 7 किमी लंबी समुद्री सुरंग का निर्माण स्थानीय वन्यजीवों, जैसे फ्लेमिंगो और मैंग्रोव जंगलों, को कम से कम नुकसान पहुंचाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। सिकैंट पाइलिंग तकनीक का उपयोग करके सुरंग निर्माण स्थिरता सुनिश्चित की गई है। इसके अलावा, सौर ऊर्जा और ऊर्जा-कुशल प्रणालियों का उपयोग स्टेशनों को पर्यावरण-अनुकूल बनाएगा। सूरत-बिलिमोरा खंड पर 2026 में ट्रायल रन के बाद, गुजरात में 2027 के अंत तक परिचालन शुरू होने की उम्मीद है, जो गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी। इसके बाद, कॉरिडोर को महाराष्ट्र तक विस्तारित किया जाएगा, और 2029 तक पूर्ण परिचालन शुरू होगा। NHSRCL ने यह भी योजना बनाई है कि भविष्य में 35 बुलेट ट्रेनें चलाई जाएंगी, जो प्रतिदिन 70 यात्राएं करेंगी। इसके अलावा, सरकार ने सात अन्य बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की योजना बनाई है, जिनमें दिल्ली-वाराणसी, दिल्ली-अहमदाबाद, मुंबई-नागपुर, और चेन्नई-बेंगलुरु-मैसूर शामिल हैं। ये परियोजनाएं भारत के परिवहन ढांचे को और मजबूत करेंगी। सूरत में भारत के पहले बुलेट ट्रेन स्टेशन का तैयार होना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जो भारत की तकनीकी और बुनियादी ढांचे की प्रगति को दर्शाता है। जापान की शिनकानसेन तकनीक और स्वदेशी प्रयासों, जैसे BEML की ट्रेन निर्माण, के संयोजन से यह परियोजना भारत को हाई-स्पीड रेल के क्षेत्र में एक नया स्थान दिलाएगी। हालांकि, भूमि अधिग्रहण और लागत जैसी चुनौतियां अभी भी बाकी हैं, लेकिन सूरत-बिलिमोरा खंड पर 2026 में ट्रायल रन और 2029 में पूर्ण परिचालन की उम्मीद इस परियोजना की सफलता की ओर एक बड़ा कदम है। यह न केवल मुंबई और अहमदाबाद को जोड़ेगा, बल्कि भारत के आर्थिक और सामाजिक विकास को भी नई गति देगा।
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