बड़ी खबर: गृह मंत्री का घर जलाया- सिंध में नहर परियोजना के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन, बंदूकधारी प्रदर्शनकारियों ने मचाया उत्पात, भारत के फैसले का दिखा बड़ा असर।
पाकिस्तान के सिंध प्रांत में सिंधु नदी पर प्रस्तावित छह नहरों के निर्माण को लेकर चल रहा विवाद मंगलवार को हिंसक हो गया, जब गुस्साए...
पाकिस्तान के सिंध प्रांत में सिंधु नदी पर प्रस्तावित छह नहरों के निर्माण को लेकर चल रहा विवाद मंगलवार को हिंसक हो गया, जब गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने नौशेरो फिरोज जिले में सिंध के गृह मंत्री जियाउल हसन लांजर के घर को आग के हवाले कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने घर में तोड़फोड़ की, कमरों और फर्नीचर को जलाया, और एयर-कंडीशनर इकाइयों को छत से फेंक दिया। इस दौरान दो ट्रेलरों में भी आग लगा दी गई, जिससे क्षेत्र में तनाव और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रदर्शनकारी बंदूकें लेकर आए थे, और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए निजी गार्डों को हवा में गोलियां चलानी पड़ीं। इस घटना ने पाकिस्तान में गहराते जल संकट और क्षेत्रीय असंतोष को उजागर किया है।
20 मई 2025 को नौशेरो फिरोज जिले के मोरो तालुका में नेशनल हाईवे पर जेया सिंध फ्रीडम मूवमेंट (JSFM) और अन्य राष्ट्रवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने सिंधु नदी पर प्रस्तावित छह नहरों और कॉर्पोरेट खेती परियोजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने हाईवे को अवरुद्ध कर दिया और नहर परियोजना को रद्द करने की मांग की। स्थिति तब हिंसक हो गई, जब प्रदर्शनकारियों ने गृह मंत्री जियाउल हसन लांजर के घर पर हमला कर दिया।
वीडियो फुटेज में दिखा कि गृह मंत्री के घर से गहरा काला धुआं निकल रहा था, जो कई किलोमीटर दूर से दिखाई दे रहा था। प्रदर्शनकारियों ने घर में तोड़फोड़ की, फर्नीचर और अन्य सामान को आग लगाई, और दो ट्रेलरों को भी जला दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए गृह मंत्री के निजी गार्डों ने हवा में गोलियां चलाईं, जिसके बाद भीड़ तितर-बितर हुई। पुलिस ने अतिरिक्त बल तैनात कर स्थिति को काबू में किया।
आज तक की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस हिंसक प्रदर्शन में दो प्रदर्शनकारी मारे गए, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किया, और कई लोगों को हिरासत में लिया गया। नौशेरो फिरोज पुलिस ने बताया कि प्रदर्शनकारी बंदूकें और अन्य हथियारों के साथ आए थे, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।
- जल संकट और नहर परियोजना का विवाद
पाकिस्तान में जल संकट लंबे समय से एक गंभीर मुद्दा रहा है, और सिंधु नदी पर पानी के बंटवारे को लेकर सिंध और पंजाब प्रांतों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। संघीय सरकार, जिसका नेतृत्व प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ कर रहे हैं, ने सिंधु नदी पर छह नहरें बनाने की योजना शुरू की थी, जिसका उद्देश्य चोलिस्तान रेगिस्तान में 400,000 एकड़ बंजर भूमि को खेती के लिए उपजाऊ बनाना था। इस परियोजना की लागत 211.4 बिलियन रुपये (750 मिलियन डॉलर) आंकी गई थी।
हालांकि, सिंध प्रांत की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) सरकार ने इस परियोजना का कड़ा विरोध किया, क्योंकि उनका मानना है कि यह नहरें सिंध के हिस्से के पानी को पंजाब की ओर मोड़ देंगी, जिससे सिंध में सिंचाई और पीने के पानी की कमी और गंभीर हो जाएगी। सिंध के किसान और स्थानीय निवासी डरते हैं कि यह परियोजना उनके खेती और आजीविका पर विपरीत प्रभाव डालेगी, क्योंकि सिंधु नदी प्रणाली पाकिस्तान की कृषि का 80% हिस्सा संभालती है।
- भारत-पाकिस्तान जल संधि का प्रभाव
इस विवाद को और जटिल बनाने में भारत-पाकिस्तान के बीच 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई इंडस वाटर्स ट्रीटी (IWT) की भूमिका रही है। इस संधि के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह नदियों को भारत और पाकिस्तान के बीच बांटा गया था—भारत को रावी, ब्यास और सतलुज नदियों का नियंत्रण मिला, जबकि पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों का। हाल ही में, भारत ने एक आतंकी हमले के जवाब में इस संधि को निलंबित कर दिया और चिनाब नदी के पानी को रोकने की कार्रवाई शुरू की, जिससे पाकिस्तान में जल संकट और गहरा गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 मई 2025 को एक भाषण में कहा, "पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते। भारत का पानी भारत के लिए बहेगा।" इसके बाद, भारत ने बगलिहार बांध के स्लुइस गेट्स को बंद कर चिनाब नदी के प्रवाह को 90% तक कम कर दिया, जिससे पाकिस्तान में जल संकट और गंभीर हो गया। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने इसे "युद्ध की कार्रवाई" करार देते हुए भारत से संधि को बहाल करने की अपील की, लेकिन भारत ने इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की।
सिंध में नहर परियोजना के खिलाफ प्रदर्शन न केवल जल संकट का परिणाम हैं, बल्कि यह क्षेत्रीय असंतोष और स्वायत्तता की मांग को भी दर्शाते हैं। जेया सिंध फ्रीडम मूवमेंट (JSFM) जैसे संगठन लंबे समय से सिंध की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान को संरक्षित करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने पाकिस्तानी सरकार पर सिंध के संसाधनों को पंजाब के हित में हड़पने का आरोप लगाया है।
17 मई 2025 को JSFM ने एक शांतिपूर्ण धरना आयोजित किया था, जिसमें गायब और जेल में बंद सिंधी कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग की गई थी। इस प्रदर्शन में संगठन ने संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों से हस्तक्षेप की अपील की थी। मंगलवार की हिंसक घटना ने इस असंतोष को और भड़का दिया, और गृह मंत्री के घर पर हमले ने सिंध में सरकार के खिलाफ गुस्से को उजागर किया।
सोशल मीडिया पर इस घटना की व्यापक चर्चा हुई। @ProudHi66955967 ने लिखा, "पाकिस्तान में पानी के लिए हाहाकार मचा है। सिंध में गृह मंत्री का घर जलाया गया। #PakistanIsATerrorState"। @MahantYogiG ने टिप्पणी की, "पाकिस्तान को पानी की बूंद-बूंद के लिए तड़पाना है।" ये पोस्ट्स दर्शाते हैं कि जनता में जल संकट को लेकर गहरा गुस्सा है।
Also Read- भारत की 50 मिलियन डॉलर की मदद पर ‘अजीज’ मुस्लिम देश का बरस रहा प्यार, शहबाज शरीफ की बेचैनी बढ़ी!
सिंध सरकार ने प्रदर्शनकारियों को शांत करने के लिए नहर परियोजना को निलंबित करने की घोषणा की थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि परियोजना को पूरी तरह रद्द किया जाए। गृह मंत्री जियाउल हसन लांजर ने इस हमले की निंदा की और कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने नौशेरो फिरोज में अतिरिक्त बल तैनात किया है, और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कर्फ्यू जैसे उपाय किए गए हैं।
पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने प्रदर्शनकारियों को "अराजक तत्व" करार दिया और कहा कि सरकार जनता की समस्याओं को हल करने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं ले रही, जिसके कारण हिंसा बढ़ रही है।
सिंध में गृह मंत्री के घर पर हमला और हिंसक प्रदर्शन पाकिस्तान में गहराते जल संकट और क्षेत्रीय असंतोष का स्पष्ट संकेत हैं। सिंधु नदी पर नहर परियोजना और भारत द्वारा इंडस वाटर्स ट्रीटी के निलंबन ने इस संकट को और जटिल बना दिया है।
What's Your Reaction?







