'हमारे तेल-गैस को छुआ तो तबाही मचा देंगे...' अमेरिका को बड़ा झटका, KC-135 रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट क्रैश।

मिडिल ईस्ट में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी संघर्ष अब अपने 14वें दिन में प्रवेश कर चुका है, जहां अमेरिकी सेना को एक महत्वपूर्ण नुकसान हुआ है

Mar 13, 2026 - 10:00
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'हमारे तेल-गैस को छुआ तो तबाही मचा देंगे...' अमेरिका को बड़ा झटका, KC-135 रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट क्रैश।
'हमारे तेल-गैस को छुआ तो तबाही मचा देंगे...' अमेरिका को बड़ा झटका, KC-135 रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट क्रैश।
  • ऑपरेशन एपिक फ्यूरी में शामिल KC-135 पश्चिमी इराक में गिरा, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
  • दो विमानों में से एक क्रैश, दूसरा सुरक्षित लैंड; दुश्मन या फ्रेंडली फायर नहीं

मिडिल ईस्ट में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी संघर्ष अब अपने 14वें दिन में प्रवेश कर चुका है, जहां अमेरिकी सेना को एक महत्वपूर्ण नुकसान हुआ है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने 12 मार्च 2026 को घोषणा की कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान एक KC-135 स्ट्रैटोटैंकर एरियल रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट पश्चिमी इराक में क्रैश हो गया। यह विमान ईरान के खिलाफ अमेरिकी और इजरायली संयुक्त हवाई अभियानों में लड़ाकू विमानों को हवा में ईंधन भरने का काम कर रहा था, ताकि वे लंबी दूरी की उड़ानें भर सकें और बार-बार लैंडिंग की जरूरत न पड़े। क्रैश की घटना फ्रेंडली एयरस्पेस में हुई और इसमें दुश्मन फायर या फ्रेंडली फायर का कोई हाथ नहीं था। दो KC-135 विमानों में से एक क्रैश हो गया जबकि दूसरा सुरक्षित रूप से लैंड कर गया। रेस्क्यू प्रयास तुरंत शुरू किए गए हैं और क्रैश साइट पर टीमों को तैनात किया गया है ताकि क्रू सदस्यों को बचाया जा सके। क्रैश में कितने क्रू सदस्य थे और उनकी स्थिति क्या है, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन रिपोर्ट्स में कम से कम पांच से छह क्रू का जिक्र है।

ऑपरेशन एपिक फ्यूरी अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ 28 फरवरी 2026 से शुरू किया गया संयुक्त सैन्य अभियान है, जिसका उद्देश्य ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल, ड्रोन क्षमता, नौसेना और परमाणु से जुड़ी सुविधाओं को नष्ट करना है। इस अभियान में अमेरिकी वायु सेना ने सैकड़ों हवाई संपत्तियां तैनात की हैं, जिसमें KC-135 जैसे टैंकर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। KC-135 स्ट्रैटोटैंकर 1950 के दशक से सेवा में है और यह बोइंग द्वारा बनाया गया है, जो हवा में रिफ्यूलिंग के लिए इस्तेमाल होता है। यह विमान F-15, F-16, F-35 जैसे लड़ाकू विमानों को ईंधन भरकर उनकी ऑपरेशनल रेंज बढ़ाता है, जिससे ईरान के गहरे इलाकों तक हमले संभव होते हैं। क्रैश से अमेरिकी हवाई अभियानों पर असर पड़ सकता है, क्योंकि टैंकरों की कमी से मिशन प्लानिंग प्रभावित होती है और लड़ाकू विमानों को अधिक बार बेस पर लौटना पड़ सकता है। हालांकि, अमेरिकी सेना के पास कई अन्य टैंकर जैसे KC-46 और KC-10 हैं, लेकिन KC-135 अभी भी बेड़े का बड़ा हिस्सा है।

क्रैश की घटना फ्रेंडली एयरस्पेस में होने से यह स्पष्ट है कि यह युद्ध से जुड़ी दुर्घटना है, न कि ईरानी हमले का नतीजा। सेंट्रल कमांड ने बयान में कहा कि घटना दुश्मन या फ्रेंडली फायर से नहीं हुई और जांच जारी है। संभावित कारणों में तकनीकी खराबी, मौसम संबंधी समस्या या ऑपरेशनल तनाव शामिल हो सकते हैं। क्रैश के समय विमान ईरान के ऊपर मिशन से लौट रहा था या रिफ्यूलिंग कर रहा था। दूसरा विमान सुरक्षित लैंड होने से क्रू को बचाने में मदद मिल सकती है। रेस्क्यू टीमों में हेलीकॉप्टर और ग्राउंड फोर्स शामिल हैं, जो पश्चिमी इराक के रेगिस्तानी इलाके में काम कर रही हैं। अमेरिकी सेना ने पहले भी ऐसे क्रैश में रेस्क्यू सफलतापूर्वक किया है, लेकिन इस युद्ध के दौरान यह पहला बड़ा एयरक्राफ्ट लॉस है।

यह घटना युद्ध के 14वें दिन आई है, जहां अमेरिका और इजरायल ने ईरान के हजारों लक्ष्यों पर हमले किए हैं, जिसमें 5500 से अधिक स्ट्राइक्स शामिल हैं। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं, लेकिन अमेरिकी हवाई श्रेष्ठता बनी हुई है। KC-135 का क्रैश अमेरिकी ऑपरेशनल क्षमता पर सवाल उठाता है, क्योंकि टैंकरों की कमी से लंबी दूरी के मिशन प्रभावित हो सकते हैं। युद्ध में अब तक अमेरिकी सेना को सात सैनिकों की मौत हुई है और कई घायल हुए हैं। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को धमकी दी है और गल्फ में ऊर्जा सुविधाओं पर हमले की चेतावनी दी है। तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।

क्रैश से अमेरिकी सेना की रणनीति पर असर पड़ सकता है, क्योंकि KC-135 जैसे विमान हवाई अभियानों की रीढ़ हैं। प्रत्येक KC-135 में 5-6 क्रू सदस्य होते हैं और यह 200,000 पाउंड तक ईंधन ले जा सकता है। युद्ध में ऐसे विमानों की तैनाती से F-35 और F-22 जैसे स्टील्थ फाइटर लंबे समय तक हवा में रह सकते हैं। क्रैश की जांच में तकनीकी या मानवीय त्रुटि का पता चल सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति और रक्षा मंत्री ने युद्ध में अधिक नुकसान की चेतावनी दी है। ईरान ने जवाबी हमलों में इजरायल और गल्फ देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है।

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