ईरान-इजराइल-अमेरिका युद्ध का 11वां दिन: मध्य पूर्व में फैली जंग, 11 देशों पर ईरानी पलटवार।
ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों से शुरू हुई जंग अब अपने 11वें दिन में प्रवेश कर चुकी है, जो 28 फरवरी 2026 को शुरू हुई थी। इस संघर्ष
- खामेनेई की मौत के बाद मोजतबा बने नए सुप्रीम लीडर, ट्रंप बोले- युद्ध अंतिम दौर में
- होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव: तेल कीमतें 100 डॉलर पार, बहरीन-इराक पर ईरानी ड्रोन हमले
ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों से शुरू हुई जंग अब अपने 11वें दिन में प्रवेश कर चुकी है, जो 28 फरवरी 2026 को शुरू हुई थी। इस संघर्ष ने मध्य पूर्व के कई हिस्सों को अपनी चपेट में ले लिया है, जहां ईरान ने जवाबी कार्रवाई में बहरीन और इराक पर ड्रोन हमले किए हैं। अपडेट्स के अनुसार, ईरान ने अब तक मध्य पूर्व के 11 देशों पर पलटवार किया है, जिसमें सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, इजराइल, लेबनान, इराक, बहरीन, कुवैत, ओमान, जॉर्डन और यमन शामिल हैं। इन हमलों में बैलिस्टिक मिसाइलें, ड्रोन और क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया है, जिससे क्षेत्रीय तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका और इजराइल ने ईरान के परमाणु ठिकानों, सैन्य मुख्यालयों और तेल भंडारण सुविधाओं पर हमले तेज कर दिए हैं, जबकि ईरान ने अमेरिकी सैन्य अड्डों और इजराइली शहरों को निशाना बनाया है। युद्ध की शुरुआत अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हवाई हमलों से हुई, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई, जिसने ईरान को और उकसाया। अपडेट्स से पता चलता है कि इस युद्ध में अब तक हजारों नागरिक और सैनिक मारे जा चुके हैं, और वैश्विक तेल कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं, जिससे विश्व अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। संयुक्त राष्ट्र ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है, लेकिन हमले जारी हैं। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की चेतावनी दी है, जो वैश्विक तेल व्यापार का प्रमुख मार्ग है।
खामेनेई की मौत के बाद ईरान में नेतृत्व परिवर्तन हुआ, जहां उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर घोषित किया गया। अपडेट्स के अनुसार, मोजतबा की नियुक्ति 5 मार्च 2026 को हुई, जिसके बाद ईरान ने अपनी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी। मोजतबा ने तेहरान में एक रैली में समर्थकों से अपील की कि वे देश की रक्षा के लिए एकजुट हों, और अमेरिका-इजराइल को चेतावनी दी कि ईरान कभी झुकेगा नहीं। इस नियुक्ति ने क्षेत्र में तनाव और बढ़ा दिया, क्योंकि अमेरिका ने इसे अस्वीकार्य बताया और कहा कि ईरान का नया नेतृत्व भी पुरानी नीतियों पर चल रहा है। इजराइल ने तेहरान में आईआरजीसी एयर फोर्स मुख्यालय पर हमले किए, जबकि ईरान ने इजराइल के मध्य भाग में मिसाइल दागे, जिसमें एक व्यक्ति की मौत और कई घायल हुए। अपडेट्स से पता चलता है कि ईरान ने इस युद्ध में अपनी लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल किया है, जिसमें एक टन से अधिक वारहेड वाली मिसाइलें शामिल हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि युद्ध अंतिम दौर में है और जल्द समाप्त हो जाएगा, लेकिन यदि ईरान ने होर्मुज में तेल आपूर्ति रोकी तो 20 गुना जोरदार हमले किए जाएंगे। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि अमेरिका से कोई बातचीत नहीं होगी, क्योंकि पिछली वार्ताओं का कड़वा अनुभव रहा है। इस बीच, सऊदी अरब ने ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों को इंटरसेप्ट किया, जबकि कतर और यूएई ने भी हमलों को नाकाम बनाया।
युद्ध के फैलाव ने मध्य पूर्व के कई देशों को प्रभावित किया है, जहां ईरान ने अमेरिकी अड्डों पर हमले तेज कर दिए हैं। अपडेट्स के अनुसार, ईरान ने इराक में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमले किए, जबकि बहरीन में भी सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया। इन हमलों से क्षेत्रीय सुरक्षा खतरे में पड़ गई है, और कई देशों ने अपने हवाई क्षेत्र बंद कर दिए हैं। इजराइल ने लेबनान में ईरानी समर्थित हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले किए, जिसके जवाब में हिजबुल्लाह ने इजराइली शहरों पर रॉकेट दागे। अपडेट्स से पता चलता है कि इस युद्ध में ईरान ने अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया है, लेकिन अमेरिका और इजराइल ने ईरान की नौसेना, वायुसेना और संचार प्रणालियों को भारी नुकसान पहुंचाया है। ट्रंप ने कहा कि ईरान की अधिकांश सैन्य शक्ति नष्ट हो चुकी है, लेकिन ईरान ने दावा किया कि वह युद्ध की समाप्ति का फैसला खुद करेगा। वैश्विक स्तर पर इस युद्ध ने ऊर्जा बाजार को हिला दिया है, जहां ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर से ऊपर पहुंच गई हैं, और कई देशों ने वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की तलाश शुरू कर दी है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में आपात बैठक हुई, जहां अमेरिका ने अपने हमलों को आत्मरक्षा बताया, जबकि ईरान ने इसे आक्रमण करार दिया। रूस और चीन ने संयम की अपील की है, लेकिन ट्रंप ने पुतिन से बातचीत का जिक्र किया और कहा कि दोनों ने युद्ध पर खुली चर्चा की।
इनसेट: युद्ध के प्रमुख घटनाक्रम 28 फरवरी 2026: अमेरिका-इजराइल ने ईरान पर हमले शुरू किए, खामेनेई की मौत। 1 मार्च: ईरान ने इजराइल और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल दागे। 4 मार्च: अमेरिका ने हमलों की तीव्रता बढ़ाई, ईरान ने गल्फ देशों पर ड्रोन हमले। 5 मार्च: मोजतबा खामेनेई नए सुप्रीम लीडर बने। 6 मार्च: इजराइल ने तेहरान में आईआरजीसी मुख्यालय पर हमला। 9 मार्च: ट्रंप ने युद्ध को अंतिम दौर बताया, ईरान ने 11 देशों पर पलटवार। 10 मार्च: होर्मुज पर तनाव, तेल कीमतें 100 डॉलर पार।
ईरान ने इस युद्ध में अपनी रणनीति बदली है और अब केवल भारी वारहेड वाली लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल कर रहा है। अपडेट्स के अनुसार, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि सभी अमेरिकी अड्डे नष्ट हो चुके हैं, लेकिन अमेरिका ने इसे खारिज किया। इजराइल ने ईरान की महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमले किए, जिसमें तेल भंडारण सुविधाएं और स्कूल के पास के इलाके शामिल हैं। ईरान ने कहा कि अमेरिका आर्थिक और ऊर्जा ढांचे को निशाना बना रहा है, जिसके जवाब में वह तैयार है। अपडेट्स से पता चलता है कि तेहरान में रैलियां हुईं, जहां लोगों ने नए लीडर का समर्थन किया और अमेरिका-इजराइल के खिलाफ नारे लगाए। इस बीच, सीरिया में ईरानी समर्थित लड़ाकों ने ट्रंप के नए सहयोगी पर हमले किए, जिससे क्षेत्रीय गठबंधन प्रभावित हुए हैं। ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि यदि तेल आपूर्ति रोकी गई तो कड़ा जवाब मिलेगा, जबकि ईरान ने कहा कि अमेरिका से कोई बातचीत नहीं होगी। इस युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है, जहां कई देशों ने स्टॉक बढ़ाने शुरू कर दिए हैं।
युद्ध के 11वें दिन हमले जारी हैं, जहां अमेरिका ने ईरान की वायुसेना मुख्यालयों पर हमले किए और इजराइल ने बेरूत में हमले तेज किए। अपडेट्स के अनुसार, ईरान ने इजराइली प्रधानमंत्री कार्यालय पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, लेकिन उन्हें इंटरसेप्ट कर लिया गया। ट्रंप ने कहा कि युद्ध शॉर्ट-टर्म है और जल्द खत्म होगा, लेकिन ईरान ने कहा कि वह तय करेगा कब समाप्त होगा। अपडेट्स से पता चलता है कि ईरान ने इराक में अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए, जबकि बहरीन में ड्रोन हमलों से सैन्य सुविधाएं प्रभावित हुईं। संयुक्त राष्ट्र ने चिंता जताई है कि युद्ध पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर सकता है। रूस ने कहा कि वह ईरान का समर्थन करेगा, जबकि चीन ने संयम की अपील की। इस युद्ध में नागरिक हताहतों की संख्या बढ़ रही है, जहां तेहरान में 40 से अधिक मौतें हुईं। वैश्विक बाजारों में तेल कीमतों में उछाल से अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं।
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