पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव- दूसरे चरण में सुबह 11 बजे तक भारी उत्साह, 40 फीसदी के करीब पहुंचा मतदान का आंकड़ा
इस चरण का सबसे हाई-प्रोफाइल मुकाबला भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में देखने को मिल रहा है, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मैदान में हैं। सुबह के समय भवानीपुर के चक्रबेरिया इलाके में उस समय भारी तनाव की स्थिति बन गई जब मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी एक
- बंगाल के रण में मतदाता मुखर: कोलकाता से वर्धमान तक बूथों पर लंबी कतारें, पूर्व वर्धमान मतदान प्रतिशत में सबसे आगे
- लोकतंत्र का महापर्व: दक्षिण बंगाल के सात जिलों में कड़ी सुरक्षा के बीच वोटिंग, छिटपुट घटनाओं के बावजूद मतदान की रफ्तार तेज
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण के दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों में मतदाताओं का जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, सुबह 11 बजे तक राज्य में लगभग 39.97 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है। मतदान की यह गति दर्शाती है कि चिलचिलाती धूप और गर्मी के बावजूद लोग अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करने के लिए बड़ी संख्या में घरों से बाहर निकल रहे हैं। इस चरण में दक्षिण बंगाल के महत्वपूर्ण जिलों की 142 सीटों पर मतदान हो रहा है, जो राजनीतिक दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील और निर्णायक मानी जाती हैं। सुबह 7 बजे मतदान शुरू होते ही केंद्रों पर लंबी-लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं, जिसमें युवाओं से लेकर बुजुर्गों और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं में खासा उत्साह देखा गया। प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं ताकि मतदाता बिना किसी भय के अपने मताधिकार का उपयोग कर सकें। दूसरे चरण के इस चुनावी महासमर में जिलों के हिसाब से मतदान प्रतिशत में काफी विविधता देखने को मिल रही है। 11 बजे तक के आंकड़ों में पूर्व वर्धमान जिला सबसे आगे रहा है, जहां 44.50 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने वोट डाल दिए थे। इसके बाद हुगली जिले का नंबर आता है, जहां 43.12 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। नदिया जिले में भी मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और यहां का आंकड़ा 40.34 प्रतिशत तक पहुंच गया। हावड़ा में 39.45 प्रतिशत और उत्तर 24 परगना में 38.43 प्रतिशत वोटिंग हुई। शहरी क्षेत्रों की बात करें तो कोलकाता उत्तर में 38.39 प्रतिशत और कोलकाता दक्षिण में 36.78 प्रतिशत मतदान हुआ है। वहीं दक्षिण 24 परगना, जो अपनी राजनीतिक सक्रियता के लिए जाना जाता है, वहां 37.9 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से साफ है कि ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी क्षेत्रों की तुलना में मतदान की रफ्तार थोड़ी अधिक बनी हुई है।
इस चरण का सबसे हाई-प्रोफाइल मुकाबला भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में देखने को मिल रहा है, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मैदान में हैं। सुबह के समय भवानीपुर के चक्रबेरिया इलाके में उस समय भारी तनाव की स्थिति बन गई जब मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी एक ही मतदान केंद्र के करीब पहुंच गए। हालांकि दोनों नेताओं के बीच कोई सीधा संवाद नहीं हुआ, लेकिन उनके समर्थकों के बीच जमकर नारेबाजी हुई। ममता बनर्जी ने इस दौरान चुनाव आयोग और केंद्रीय सुरक्षा बलों की कार्यप्रणाली पर कड़े प्रहार किए और आरोप लगाया कि बाहरी लोग बंगाल के मतदाताओं को डराने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर, शुभेंदु अधिकारी ने पलटवार करते हुए कहा कि राज्य की जनता अब परिवर्तन चाहती है और किसी भी प्रकार की गुंडागर्दी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भवानीपुर के अलावा टॉलीगंज और कोलकाता पोर्ट जैसे क्षेत्रों में भी भारी गहमागहमी बनी हुई है।
चुनाव आयोग ने इस चरण के लिए सुरक्षा के अभूतपूर्व प्रबंध किए हैं। लगभग 3.21 करोड़ मतदाताओं वाली इस चुनावी प्रक्रिया को संपन्न कराने के लिए 41,001 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती की गई है। आयोग ने 8,000 से अधिक ऐसे बूथ भी बनाए हैं जिनका पूरा प्रबंधन केवल महिला कर्मियों द्वारा किया जा रहा है, जो महिला सशक्तीकरण की एक बेहतरीन मिसाल पेश कर रहा है। मतदान के दौरान राज्य के कुछ हिस्सों से छिटपुट हिंसा और झड़पों की खबरें भी सामने आई हैं। नदिया जिले के छपरा इलाके में एक पोलिंग एजेंट के साथ मारपीट की घटना हुई, जिसे घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। शांतिपुर में एक राजनीतिक दल के कैंप ऑफिस में तोड़फोड़ की जानकारी मिली, जिसके बाद इलाके में अतिरिक्त बल तैनात किया गया। दक्षिण 24 परगना के भांगड़ और बसंती क्षेत्रों में भी तनाव की खबरें आईं, जहां कुछ उम्मीदवारों ने आरोप लगाया कि उनके समर्थकों और ड्राइवरों पर हमले किए गए। हावड़ा के बाली इलाके में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में खराबी के कारण कुछ समय के लिए मतदान प्रक्रिया बाधित हुई, जिससे गुस्साए लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा। इन घटनाओं के बावजूद चुनाव आयोग का दावा है कि अधिकांश क्षेत्रों में मतदान शांतिपूर्ण ढंग से जारी है।
मतदाताओं की जनसांख्यिकी पर नजर डालें तो इस चरण में महिला मतदाताओं की भूमिका बेहद निर्णायक होने वाली है। कुल 3.21 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 1.57 करोड़ महिलाएं हैं, जबकि 792 मतदाता तीसरे लिंग से संबंधित हैं। सुबह से ही महिलाओं की लंबी कतारें यह संकेत दे रही हैं कि वे कल्याणकारी योजनाओं और सुरक्षा जैसे मुद्दों को ध्यान में रखकर वोट कर रही हैं। इसके अलावा, इस चरण में मतुआ समुदाय और शहरी 'भद्रलोक' मतदाताओं का रुख भी सत्ता की चाबी तय करने में महत्वपूर्ण होगा। राजनीतिक दलों ने इस चरण के लिए महीनों तक सघन प्रचार किया था और अब 1448 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो रही है। उत्तर 24 परगना की 33 और दक्षिण 24 परगना की 31 सीटें इस चरण के परिणाम को सबसे अधिक प्रभावित करने की क्षमता रखती हैं।
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