पत्नी से विवाद के बाद फरीदाबाद के डॉक्टर ने नहर में लगाई छलांग, बचाव कार्य में देरी ने खड़े किए प्रशासन पर गंभीर सवाल

रेस्क्यू टीम के न पहुंचने के पीछे पुलिस विभाग ने संसाधनों की कमी और तालमेल के अभाव का हवाला दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने आपदा प्रबंधन विभाग को तुरंत सूचना भेज दी थी, लेकिन वहां से गोताखोरों की टीम को रवाना कर

May 3, 2026 - 12:27
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पत्नी से विवाद के बाद फरीदाबाद के डॉक्टर ने नहर में लगाई छलांग, बचाव कार्य में देरी ने खड़े किए प्रशासन पर गंभीर सवाल
पत्नी से विवाद के बाद फरीदाबाद के डॉक्टर ने नहर में लगाई छलांग, बचाव कार्य में देरी ने खड़े किए प्रशासन पर गंभीर सवाल

  • फरीदाबाद में घरेलू कलह का खौफनाक अंजाम: डॉक्टर ने आगरा नहर में कूदकर दी जान, तीन घंटे बाद भी गोताखोरों का पता नहीं
  • आगरा नहर के किनारे मिली डॉक्टर की लावारिस कार, पत्नी से फोन पर हुई बहस के बाद उठाया आत्मघाती कदम

फरीदाबाद के पॉश इलाके में रहने वाले एक प्रतिष्ठित डॉक्टर द्वारा पत्नी के साथ हुई मामूली कहासुनी के बाद आगरा नहर में छलांग लगाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और डॉक्टर के परिजन मौके पर पहुंच गए, लेकिन व्यवस्था की बदहाली तब सामने आई जब घंटों बीत जाने के बाद भी राहत और बचाव कार्य शुरू नहीं हो सका। बताया जा रहा है कि डॉक्टर और उनकी पत्नी के बीच पिछले कुछ समय से वैचारिक मतभेद चल रहे थे, जिसने उस दिन उग्र रूप धारण कर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, डॉक्टर अपनी कार को नहर के किनारे तेज रफ्तार में लेकर आए और अचानक ब्रेक लगाकर बाहर निकले, जिसके कुछ ही पलों बाद उन्होंने उफनती लहरों में छलांग लगा दी।

पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह बात निकलकर सामने आई है कि डॉक्टर अपने क्लिनिक से घर के लिए निकले थे, लेकिन रास्ते में ही फोन पर पत्नी के साथ उनकी तीखी बहस शुरू हो गई। यह बहस इतनी बढ़ गई कि डॉक्टर ने अपना आपा खो दिया और घर जाने के बजाय अपनी गाड़ी का रुख आगरा नहर की तरफ मोड़ दिया। उन्होंने नहर के पास पहुंचकर अपनी पत्नी को आखिरी फोन कॉल किया और आत्मघाती कदम उठाने की बात कही। जब तक परिजन और पुलिस मोबाइल लोकेशन के आधार पर घटनास्थल तक पहुंचते, तब तक डॉक्टर पानी के तेज बहाव में ओझल हो चुके थे। किनारे पर सिर्फ उनकी कार, मोबाइल फोन और कुछ निजी दस्तावेज बरामद हुए हैं, जो उस वक्त की मानसिक स्थिति को दर्शा रहे थे।

घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने प्रशासन के ढुलमुल रवैये पर भारी नाराजगी जताई है, क्योंकि घटना के तीन घंटे बीत जाने के बाद भी कोई सरकारी गोताखोर मौके पर नहीं पहुंचा था। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे बार-बार पुलिस अधिकारियों से बचाव कार्य शुरू करने की गुहार लगाते रहे। स्थानीय निवासियों ने बताया कि इस क्षेत्र में आए दिन ऐसे हादसे होते हैं, फिर भी यहां स्थाई तौर पर गोताखोरों या सुरक्षा घेरे का कोई इंतजाम नहीं है। तीन घंटे का कीमती समय बीत जाने के कारण डॉक्टर के बचने की उम्मीदें लगातार कम होती जा रही थीं, जिससे वहां मौजूद भीड़ का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। फरीदाबाद की आगरा नहर और गुरुग्राम नहर के किनारे सुरक्षा जाल या रेलिंग की कमी के कारण पिछले एक साल में आत्महत्या और दुर्घटनाओं के मामलों में 30 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। स्थानीय प्रशासन की सुस्ती अक्सर रेस्क्यू ऑपरेशंस में बाधा बनती है। डॉक्टर के पेशे और उनके स्वभाव को लेकर उनके सहकर्मियों ने बताया कि वे बेहद शांत और मिलनसार व्यक्ति थे। किसी को इस बात का अंदाजा नहीं था कि वे पारिवारिक तनाव के चलते इतना बड़ा और कठोर कदम उठा लेंगे। उनके दोस्तों ने बताया कि हाल के दिनों में वे काम के दबाव और घर के माहौल को लेकर थोड़े चिंतित जरूर दिखते थे, लेकिन उन्होंने कभी भी अपनी परेशानी को चेहरे पर जाहिर नहीं होने दिया। चिकित्सा जगत में इस घटना के बाद शोक की लहर दौड़ गई है, क्योंकि एक काबिल डॉक्टर का इस तरह असमय चले जाना समाज और स्वास्थ्य व्यवस्था दोनों के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।

रेस्क्यू टीम के न पहुंचने के पीछे पुलिस विभाग ने संसाधनों की कमी और तालमेल के अभाव का हवाला दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने आपदा प्रबंधन विभाग को तुरंत सूचना भेज दी थी, लेकिन वहां से गोताखोरों की टीम को रवाना करने में तकनीकी देरी हुई। इस बीच, अंधेरा बढ़ने के कारण सर्च ऑपरेशन में और भी अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। पानी का बहाव तेज होने की वजह से स्थानीय स्तर पर मौजूद मल्लाहों ने भी पानी में उतरने से मना कर दिया। प्रशासन की इस विफलता ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए शहर की तैयारी कितनी खोखली है। नहर के किनारे मिले सुसाइड नोट या किसी भी आधिकारिक लिखित बयान की पुष्टि अभी तक पुलिस द्वारा नहीं की गई है, हालांकि कॉल रिकॉर्ड्स को कब्जे में ले लिया गया है। पुलिस ने डॉक्टर की पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों से पूछताछ शुरू कर दी है ताकि विवाद की मुख्य जड़ का पता लगाया जा सके। नहर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को भी खंगाला जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह पूरी तरह से आत्महत्या का मामला है या इसके पीछे कोई अन्य साजिश छिपी हुई है। फॉरेंसिक टीम ने भी कार से उंगलियों के निशान और अन्य साक्ष्य जुटाए हैं ताकि जांच को वैज्ञानिक दिशा दी जा सके।

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