बंगाल में खिलेगा कमल? राकेश सिंह का बड़ा दावा- 170 से ज्यादा सीटें जीतकर सरकार बनाएगी भाजपा
कोलकाता की प्रतिष्ठित 11 सीटों के संदर्भ में भी भाजपा नेता ने बेहद सटीक और चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि राजधानी कोलकाता, जिसे सत्ताधारी दल का अभेद्य किला माना जाता है, वहां भी इस बार सें
- बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: नतीजों से पहले मंदिरों में उमड़ा उम्मीदवारों का सैलाब, जीत के लिए लगाई अरदास
- कोलकाता की 11 सीटों पर टिकी सबकी नजरें, भाजपा नेता का अनुमान- शहर के छह गढ़ों पर होगा भगवा कब्जा
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण का मतदान संपन्न होने के बाद अब सबकी नजरें कल आने वाले चुनाव परिणामों पर टिकी हैं। मतगणना से ठीक एक दिन पहले राज्य के राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल देखने को मिल रही है। अपनी किस्मत का फैसला ईवीएम में बंद होने के बाद अब विभिन्न राजनीतिक दलों के उम्मीदवार और दिग्गज नेता आध्यात्मिक शरण में पहुंच गए हैं। कोलकाता से लेकर सिलीगुड़ी तक, प्रमुख प्रत्याशी सुबह से ही प्रसिद्ध मंदिरों में पूजा-अर्चना करते और जीत की मन्नत मांगते देखे गए। दक्षिणेश्वर काली मंदिर और तारापीठ जैसे सिद्ध पीठों पर आज सुबह से ही नेताओं का तांता लगा रहा, जहां उन्होंने राज्य की खुशहाली और अपनी जीत के लिए विशेष अनुष्ठान किए। भाजपा के कद्दावर नेता और कोलकाता पोर्ट विधानसभा सीट से उम्मीदवार राकेश सिंह ने परिणामों की घोषणा से ठीक पहले आत्मविश्वास से भरा बयान जारी किया है। उन्होंने दावा किया कि इस बार बंगाल में सत्ता परिवर्तन की लहर साफ तौर पर दिखाई दे रही है और भारतीय जनता पार्टी राज्य की 294 सीटों में से 170 से अधिक सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज करने जा रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जनता ने भ्रष्टाचार और कुशासन के खिलाफ मतदान किया है, जिसका असर कल आने वाले रुझानों में स्पष्ट हो जाएगा। उनके अनुसार, भाजपा का यह प्रदर्शन राज्य के राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय लिखेगा और पूर्ण बहुमत की सरकार का गठन सुनिश्चित करेगा।
कोलकाता की प्रतिष्ठित 11 सीटों के संदर्भ में भी भाजपा नेता ने बेहद सटीक और चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि राजधानी कोलकाता, जिसे सत्ताधारी दल का अभेद्य किला माना जाता है, वहां भी इस बार सेंधमारी होगी। राकेश सिंह के मुताबिक, कोलकाता की कुल 11 विधानसभा सीटों में से भाजपा कम से कम 6 सीटों पर जीत हासिल करेगी। यह दावा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि शहरी क्षेत्रों में भाजपा का ग्राफ पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। उनका मानना है कि युवाओं और मध्यम वर्ग के वोटर्स ने विकास के नाम पर इस बार भगवा दल का साथ दिया है, जिससे कोलकाता के समीकरण पूरी तरह बदलने वाले हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा की 294 सीटों में से 293 सीटों पर मतदान दो चरणों (23 अप्रैल और 29 अप्रैल 2026) में संपन्न हुआ, जबकि एक सीट (फालता) पर कुछ तकनीकी कारणों से मतदान की तिथि में बदलाव किया गया था। बहुमत के लिए 148 सीटों का आंकड़ा पार करना अनिवार्य है। कल सुबह 8 बजे से शुरू होने वाली मतगणना के लिए राज्य चुनाव आयोग ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। राज्यभर के विभिन्न मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े घेरे बनाए गए हैं ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। केंद्रीय बलों की तैनाती के बीच कल सबसे पहले पोस्टल बैलेट की गिनती होगी, जिसके बाद ईवीएम के आंकड़े सामने आने लगेंगे। दोपहर तक यह तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी कि बंगाल की सत्ता की चाबी किसके हाथ लगने वाली है। राजनीतिक दलों के काउंटिंग एजेंटों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है और मतगणना कक्ष के भीतर पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए सीसीटीवी कैमरों का व्यापक जाल बिछाया गया है।
मतदान के बाद आए विभिन्न सर्वेक्षणों और दावों के बीच राज्य में राजनीतिक तनाव भी चरम पर है। सत्ताधारी दल और विपक्ष के बीच जुबानी जंग जारी है, जहां एक तरफ ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस अपनी लोक कल्याणकारी योजनाओं के दम पर वापसी का भरोसा जता रही है, वहीं भाजपा परिवर्तन के नारे के साथ खुद को विकल्प के तौर पर पेश कर रही है। राज्य के ग्रामीण इलाकों में भाजपा की पैठ और उत्तर बंगाल में उसकी पकड़ के साथ-साथ दक्षिण बंगाल के शहरी केंद्रों में बढ़ता प्रभाव इस बार के परिणामों को काफी दिलचस्प बनाने वाला है। राकेश सिंह जैसे नेताओं के दावे पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने का काम कर रहे हैं, जो कल की सुबह का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। धार्मिक आस्था और राजनीतिक महत्वाकांक्षा के इस संगम के बीच आम जनता भी अपने भविष्य को लेकर उत्सुक है। मंदिरों में उमड़े नेताओं के हुजूम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कड़ी मेहनत और रैलियों के बाद अब वे दैवीय शक्ति पर भी भरोसा कर रहे हैं। शुभेंदु अधिकारी से लेकर अन्य वरिष्ठ नेताओं ने अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों के स्थानीय मंदिरों में मत्था टेका और जनता के फैसले को सहर्ष स्वीकार करने की बात कही। बंगाल की राजनीति में धर्म और संस्कृति का हमेशा से गहरा प्रभाव रहा है, और नतीजों की पूर्व संध्या पर यह दृश्य लोकतंत्र की एक अलग ही छवि प्रस्तुत कर रहा है जहां शक्ति परीक्षण से पहले शांति की खोज की जा रही है।
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