असम में खिला 'कमल'? भाजपा गठबंधन ने रुझानों में पार किया बहुमत का जादुई आंकड़ा, दिल्ली में जश्न शुरू
विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के साथ ही देश की राजनीतिक राजधानी दिल्ली और चुनावी राज्यों में हलचल तेज हो
- बंगाल की जंग में बड़ा उलटफेर: शुरुआती रुझानों में भाजपा ने बनाई निर्णायक बढ़त, टीएमसी के गढ़ में सेंधमारी
- मतगणना के ताजा अपडेट: असम में तीसरी बार 'भगवा' राज की तैयारी, दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय के बाहर ढोल-नगाड़ों की गूंज
विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के साथ ही देश की राजनीतिक राजधानी दिल्ली और चुनावी राज्यों में हलचल तेज हो गई है। असम में भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन द्वारा बहुमत के आंकड़े को पार करने और पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी दल को कड़ी चुनौती देते हुए आगे बढ़ने की खबरों ने भाजपा खेमे में उत्साह भर दिया है। असम विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के शुरुआती रुझानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य की जनता ने एक बार फिर वर्तमान नेतृत्व पर भरोसा जताया है। 126 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन ने बहुमत के 64 के आंकड़े को आसानी से पार करते हुए 80 से अधिक सीटों पर बढ़त बना ली है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में लड़े गए इस चुनाव में विकास और सुरक्षा के मुद्दों ने मतदाताओं के बीच गहरा प्रभाव डाला है। शुरुआती दौर की गिनती में ही कई दिग्गज मंत्रियों ने अपने प्रतिद्वंदियों पर हजारों मतों की बढ़त बना ली, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि असम में भाजपा लगातार तीसरी बार अपनी सरकार बनाने की ओर अग्रसर है। विपक्षी गठबंधन, जिसमें कांग्रेस मुख्य भूमिका में है, फिलहाल 30 सीटों के आसपास सिमटता हुआ नजर आ रहा है।
दिल्ली स्थित भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय मुख्यालय पर सुबह से ही कार्यकर्ताओं का हुजूम उमड़ना शुरू हो गया था। जैसे ही असम में पार्टी के बहुमत पार करने और पश्चिम बंगाल में बढ़त बनाने की खबरें टीवी स्क्रीन पर फ्लैश हुईं, मुख्यालय के बाहर का नजारा उत्सव में बदल गया। कार्यकर्ता ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाच रहे हैं और एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जीत की बधाई दे रहे हैं। केसरिया झंडों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कटआउट्स से सजी सड़कों पर उत्साह चरम पर है। भाजपा नेतृत्व के लिए ये परिणाम न केवल क्षेत्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण हैं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी पार्टी के बढ़ते प्रभाव को प्रमाणित करते हैं। मुख्यालय के भीतर भी बड़े नेताओं की आवाजाही बढ़ गई है और विजय भाषणों की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। पश्चिम बंगाल की 294 सीटों पर हो रही मतगणना इस बार के चुनाव का सबसे रोमांचक हिस्सा साबित हो रही है। पिछले एक दशक से अधिक समय से राज्य की सत्ता पर काबिज तृणमूल कांग्रेस को भाजपा से कड़ी टक्कर मिल रही है। शुरुआती रुझानों में भाजपा ने कई ऐसी सीटों पर बढ़त हासिल की है जिन्हें टीएमसी का अभेद्य किला माना जाता था। दक्षिण बंगाल के कुछ जिलों को छोड़कर, उत्तर बंगाल और जंगलमहल के क्षेत्रों में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया है। रुझानों के अनुसार, भाजपा फिलहाल 150 से अधिक सीटों पर आगे चल रही है, जो बहुमत के आंकड़े से ऊपर है। यदि ये रुझान अंतिम परिणामों में बदलते हैं, तो यह बंगाल की राजनीति में एक ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन होगा, जिसका प्रभाव आने वाले कई वर्षों तक महसूस किया जाएगा।
असम के परिणामों पर गौर करें तो भाजपा की इस संभावित जीत के पीछे 'डबल इंजन' सरकार के विकास कार्यों और मजबूत सांगठनिक ढांचे को मुख्य श्रेय दिया जा रहा है। चाय बागान श्रमिकों से लेकर शहरी मध्यम वर्ग तक, भाजपा ने हर वर्ग के बीच अपनी पहुंच मजबूत की है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, जो खुद जालुकबारी सीट से रिकॉर्ड मतों से आगे चल रहे हैं, राज्य में विकास के नए नायक बनकर उभरे हैं। कांग्रेस पार्टी ने गौरव गोगोई के नेतृत्व में एक सशक्त अभियान चलाया था, लेकिन रुझानों से पता चलता है कि वे भाजपा के मजबूत दुर्ग को भेदने में सफल नहीं हो पाए। असम में धार्मिक और भाषाई समीकरणों को साधने में भी भाजपा का पलड़ा भारी रहा है।
बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के लिए ये रुझान काफी चिंताजनक हैं। कोलकाता और आसपास के शहरी क्षेत्रों में टीएमसी अभी भी संघर्ष कर रही है, लेकिन ग्रामीण बंगाल में भाजपा ने जो सेंधमारी की है, उसने पूरे चुनावी गणित को उलट कर रख दिया है। संदेशखाली और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों ने मतदाताओं के एक बड़े वर्ग को सरकार के खिलाफ सोचने पर मजबूर किया है। भाजपा के स्थानीय नेतृत्व ने केंद्रीय नेतृत्व के सहयोग से जिस तरह से हर बूथ पर अपनी पकड़ मजबूत की, उसका परिणाम अब ईवीएम खुलने के साथ नजर आ रहा है। शाम तक जैसे-जैसे अंतिम राउंड की गिनती पूरी होगी, बंगाल की तस्वीर और भी साफ हो जाएगी, लेकिन वर्तमान स्थिति भाजपा के पक्ष में झुकती दिखाई दे रही है। चुनावी सरगर्मी के बीच सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि मतगणना केंद्रों पर किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना न हो। चुनाव आयोग ने प्रत्येक राउंड के बाद परिणामों की घोषणा करने और पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। दिल्ली में भाजपा मुख्यालय के बाहर तैनात सुरक्षा बलों को भी अलर्ट पर रखा गया है क्योंकि कार्यकर्ताओं की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भाजपा बंगाल जीतने में सफल रहती है, तो यह भारतीय राजनीति के इतिहास में सबसे बड़ी चुनावी जीत में से एक होगी। असम और बंगाल के ये परिणाम न केवल राज्यों के आंतरिक भविष्य को तय करेंगे, बल्कि 2029 के आम चुनाव के लिए भी एक मजबूत आधार तैयार करेंगे।
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