सिनेमाई पर्दे पर दिखेगा महासंग्राम: रामायण में 'रावण' और 'जटायु' के बीच फिल्माया गया अब तक का सबसे खतरनाक एक्शन सीक्वेंस।
नितेश तिवारी की महत्वाकांक्षी फिल्म 'रामायण' इन दिनों फिल्म जगत की सबसे चर्चित परियोजना बनी हुई है। इस फिल्म को लेकर जो
- तकनीक और वीरता का अद्भुत संगम: जटायु वध के दृश्य के लिए मेकर्स ने खर्च किए करोड़ों, यश और वीएफएक्स का दिखेगा जलवा
- रामायण की शूटिंग से बड़ी खबर: रावण की क्रूरता और जटायु के बलिदान का दृश्य होगा फिल्म का सबसे भावनात्मक और भव्य हिस्सा
नितेश तिवारी की महत्वाकांक्षी फिल्म 'रामायण' इन दिनों फिल्म जगत की सबसे चर्चित परियोजना बनी हुई है। इस फिल्म को लेकर जो नवीनतम अपडेट सामने आई है, वह रावण और जटायु के बीच होने वाले युद्ध से जुड़ी है। रामायण के कथानक में जटायु और रावण का संघर्ष एक अत्यंत महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है, जहाँ एक पक्षीराज अपनी पूरी शक्ति के साथ अधर्म के विरुद्ध खड़ा होता है। फिल्म के निर्माताओं ने इस विशिष्ट दृश्य को सिनेमाई इतिहास का सबसे भव्य और खतरनाक एक्शन सीक्वेंस बनाने का निर्णय लिया है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के एक्शन निर्देशकों और वीएफएक्स विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है, ताकि दर्शकों को पर्दे पर एक ऐसा अनुभव मिले जो उन्होंने पहले कभी नहीं देखा हो। फिल्म के इस भाग में रावण की भूमिका निभा रहे दक्षिण भारतीय सुपरस्टार यश का एक बेहद शक्तिशाली और क्रूर अवतार देखने को मिलेगा। बताया जा रहा है कि इस सीक्वेंस की कोरियोग्राफी इस तरह से की गई है कि यह दर्शकों की सांसें थाम देने वाला होगा। जटायु, जो माता सीता की रक्षा के लिए रावण के पुष्पक विमान को रोकने का प्रयास करते हैं, उनके और रावण के बीच आकाश में होने वाले युद्ध को सजीव करने के लिए अत्याधुनिक मोशन कैप्चर तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। यश ने इस भूमिका के लिए अपने शारीरिक स्वरूप और संवाद अदायगी पर काफी मेहनत की है, ताकि वे रावण के अहंकार और उसकी विनाशकारी शक्ति को पूरी प्रमाणिकता के साथ पर्दे पर उतार सकें।
जटायु का किरदार इस फिल्म में पूरी तरह से कंप्यूटर जनित इमेजरी (CGI) पर आधारित होगा, लेकिन इसके हाव-भाव और भावनाओं को सजीव बनाने के लिए उच्च स्तरीय वीएफएक्स का सहारा लिया गया है। इस युद्ध को फिल्माने के दौरान प्रकाश व्यवस्था और कैमरा एंगल्स का विशेष ध्यान रखा गया है, ताकि आकाश में होने वाली इस भिड़ंत में यथार्थवाद का पुट बना रहे। इस दृश्य की लंबाई और इसके फिल्मांकन पर लगने वाला समय यह दर्शाता है कि मेकर्स इसे फिल्म के मुख्य आकर्षण के रूप में देख रहे हैं। जटायु द्वारा रावण के रथ को क्षतिग्रस्त करने और रावण द्वारा क्रोध में आकर जटायु के पंख काटने का दृश्य न केवल एक्शन से भरपूर होगा, बल्कि भावनात्मक रूप से भी दर्शकों को झकझोर देगा। फिल्म 'रामायण' के लिए विशेष रूप से ऑस्कर विजेता वीएफएक्स कंपनी डीएनईजी (DNEG) के साथ साझेदारी की गई है। इस कंपनी ने पहले भी हॉलीवुड की कई बड़ी फिल्मों के लिए काम किया है, और अब वे जटायु जैसे पौराणिक पात्रों को डिजिटल रूप में जीवंत करने का काम कर रहे हैं। एक्शन सीक्वेंस की बात करें तो इसमें रावण के अस्त्रों और जटायु के प्रहारों के बीच एक जबरदस्त संतुलन देखने को मिलेगा। निर्माण टीम ने इस बात पर विशेष जोर दिया है कि युद्ध के दौरान पौराणिक शस्त्रों का प्रभाव जादुई होने के साथ-साथ वास्तविक भी लगे। यश के किरदार रावण को इस दृश्य में एक ऐसे अजेय योद्धा के रूप में दिखाया गया है, जिसकी शक्ति के सामने महान पक्षी भी संघर्ष करते नजर आते हैं। यह दृश्य सीता हरण की घटना के ठीक बाद आता है, इसलिए इसमें तनाव और गति का स्तर बहुत ऊँचा रखा गया है। फिल्म की टीम का मानना है कि यह सीक्वेंस फिल्म के मध्यांतर से पहले का सबसे प्रभावशाली हिस्सा साबित होगा।
इस फिल्म के माध्यम से भारतीय पौराणिक कथाओं को वैश्विक स्तर पर पेश करने की तैयारी है। जटायु और रावण का यह संघर्ष केवल शारीरिक युद्ध नहीं है, बल्कि यह मूल्यों और नैतिकता की लड़ाई को भी दर्शाता है। जटायु जानते थे कि रावण उनसे कहीं अधिक शक्तिशाली है, फिर भी उन्होंने धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों की बाजी लगा दी। फिल्म की पटकथा में इस वीरता को बहुत विस्तार से स्थान दिया गया है। यश ने रावण के रूप में अपनी उपस्थिति से इस दृश्य को और भी वजनदार बना दिया है। उनके हाव-भाव में वह क्रूरता और आत्मविश्वास साफ झलकता है, जो उस समय रावण के चरित्र की विशेषता थी जब उसने जटायु पर प्रहार किया था। फिल्मांकन के दौरान सुरक्षा और भव्यता के बीच एक बारीक रेखा खींची गई है। कई हफ्तों तक चले इस शेड्यूल के दौरान बड़े-बड़े सेट्स का निर्माण किया गया और ग्रीन स्क्रीन तकनीक का व्यापक उपयोग हुआ। जटायु के पंखों की बनावट, उनके उड़ने का तरीका और रावण के साथ उनकी गुत्थमगुत्थी को एक-एक फ्रेम के हिसाब से डिजाइन किया गया है। यह निवेश केवल मनोरंजन के लिए नहीं है, बल्कि भारतीय सिनेमा की तकनीकी क्षमता को विश्व के सामने प्रदर्शित करने के लिए भी है। दर्शकों को इस फिल्म में पौराणिक काल का वह वैभव देखने को मिलेगा जो अब तक केवल कल्पनाओं या पुराने धारावाहिकों तक सीमित था।
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