किश्तवाड़ के घने जंगलों में सुरक्षाबलों की सर्जिकल स्ट्राइक: आतंकी ठिकाने से गोला-बारूद का जखीरा बरामद।

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में सुरक्षाबलों ने आतंकवाद विरोधी अभियान के तहत एक अत्यंत महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की

May 2, 2026 - 14:12
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किश्तवाड़ के घने जंगलों में सुरक्षाबलों की सर्जिकल स्ट्राइक: आतंकी ठिकाने से गोला-बारूद का जखीरा बरामद।
किश्तवाड़ के घने जंगलों में सुरक्षाबलों की सर्जिकल स्ट्राइक: आतंकी ठिकाने से गोला-बारूद का जखीरा बरामद।
  • बड़ी आतंकी साजिश को सेना ने किया नाकाम: बाजमंडू के दुर्गम इलाकों में छिपे हथियारों के भंडार का भंडाफोड़
  • सुरक्षाबलों का किश्तवाड़ में बड़ा प्रहार: ढेर हो चुके कमांडर के गुप्त ठिकाने से मिले विस्फोटक, दहशतगर्दों के मंसूबे ध्वस्त

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में सुरक्षाबलों ने आतंकवाद विरोधी अभियान के तहत एक अत्यंत महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। भारतीय सेना और स्थानीय पुलिस के संयुक्त दल ने जिले के सुदूर और ऊंचे पहाड़ी क्षेत्र चतरू (Chatroo) में एक सुनियोजित घेराबंदी और तलाशी अभियान चलाया। इस ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों ने बाजमंडू के घने जंगलों में एक गुप्त आतंकवादी ठिकाने का पता लगाया, जिसे आतंकी गतिविधियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। इस कार्रवाई ने सीमा पार से संचालित होने वाले आतंकी समूहों की उन योजनाओं पर पानी फेर दिया है, जिसके जरिए वे जम्मू संभाग के इस शांत क्षेत्र में अशांति फैलाने की फिराक में थे। सुरक्षाबलों को इस ठिकाने के बारे में विशिष्ट खुफिया जानकारी प्राप्त हुई थी, जिसके आधार पर सेना की राष्ट्रीय राइफल्स और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों ने आधी रात के बाद दुर्गम चढ़ाई और घने कोहरे के बीच अपनी कार्रवाई शुरू की। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि यह ठिकाना एक ऐसी जगह पर बनाया गया था जहां सामान्य परिस्थितियों में पहुंचना बेहद कठिन है। तलाशी के दौरान जवानों ने एक चट्टानी गुफा के भीतर से भारी मात्रा में घातक हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री बरामद की। हथियारों की यह खेप बताती है कि आतंकी इस क्षेत्र में किसी बड़े हमले की तैयारी कर रहे थे, जिसे सुरक्षाबलों की मुस्तैदी ने समय रहते विफल कर दिया।

इस पूरे ऑपरेशन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जिस ठिकाने को नष्ट किया गया है, उसका संबंध एक पुराने खूंखार आतंकवादी कमांडर से था। जांच में यह तथ्य सामने आया है कि इस गुप्त ठिकाने को एक ऐसे आतंकी सरगना द्वारा संचालित और भंडारित किया गया था, जिसे सुरक्षाबलों ने कुछ समय पहले एक भीषण मुठभेड़ में मार गिराया था। हालांकि वह कमांडर मारा जा चुका था, लेकिन उसके द्वारा छिपाकर रखा गया हथियारों का यह जखीरा सक्रिय आतंकियों या हाल ही में घुसपैठ करने वाले समूहों के लिए एक 'लॉजिस्टिक्स हब' के रूप में काम कर रहा था। इस ठिकाने के नष्ट होने से आतंकवादियों के जमीनी नेटवर्क को करारा झटका लगा है। सुरक्षाबलों ने इस अभियान के दौरान ठिकाने से भारी मात्रा में एके सीरीज की राइफलों की गोलियां, पिस्तौल, चीनी ग्रेनेड, आरपीजी (RPG) के गोले और संचार उपकरण बरामद किए हैं। इसके अलावा वहां से कुछ रसद सामग्री और कंबल भी मिले हैं, जिससे संकेत मिलता है कि इस स्थान का उपयोग हाल के दिनों में भी ठिकाने के तौर पर किया गया होगा। बरामद किए गए गोला-बारूद की गुणवत्ता और मात्रा यह दर्शाती है कि आतंकवादी किश्तवाड़ और आसपास के जिलों में अस्थिरता पैदा करने के लिए एक लंबी रणनीति पर काम कर रहे थे। पिछले कुछ महीनों में जम्मू संभाग के पहाड़ी क्षेत्रों में आतंकी हलचल बढ़ने की रिपोर्टों के बीच यह रिकवरी सेना के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। बरामद किए गए विस्फोटकों को विशेषज्ञों की देखरेख में सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है ताकि उनकी फॉरेंसिक जांच की जा सके और यह पता लगाया जा सके कि ये हथियार किस देश के बने हैं और इन्हें किस रास्ते से किश्तवाड़ तक पहुँचाया गया था। इस कार्रवाई के बाद पूरे चतरू और किश्तवाड़ बेल्ट में सुरक्षा ग्रिड को और अधिक मजबूत कर दिया गया है।

क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यह अभियान अत्यंत चुनौतीपूर्ण था। बाजमंडू के जंगल अपनी सघनता और तीखी ढलानों के लिए जाने जाते हैं, जहां आतंकवादियों को छिपने के लिए प्राकृतिक गुफाएं मिल जाती हैं। सुरक्षाबलों ने ड्रोन और अन्य आधुनिक सर्विलांस उपकरणों का उपयोग करके इस ठिकाने की सटीक लोकेशन ट्रैक की थी। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि मारे गए आतंकी कमांडर के पुराने साथियों या मददगारों की तलाश में अब आसपास के गांवों में भी पूछताछ की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस तरह के 'स्लीपर ठिकानों' का उपयोग नए रंगरूटों को हथियार उपलब्ध कराने के लिए किया जाता था। प्रशासन और सैन्य कमान ने इस सफलता पर संतोष व्यक्त किया है और कहा है कि आतंकवाद के अवशेषों को पूरी तरह समाप्त करने तक अभियान जारी रहेगा। किश्तवाड़ के लोगों ने भी सुरक्षाबलों की इस मुस्तैदी की प्रशंसा की है क्योंकि आतंकी गतिविधियों के कारण क्षेत्र के विकास और पर्यटन पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। इस ऑपरेशन के माध्यम से एक कड़ा संदेश दिया गया है कि चाहे आतंकी ठिकाने कितने ही दुर्गम क्यों न हों, भारतीय सेना की नजरों से बच पाना उनके लिए असंभव है। आगामी चुनावों और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय आयोजनों से पहले इस तरह की रिकवरी सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद अहम मानी जा रही है।

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