केनरा बैंक ने 2 और 3 साल की MCLR दरों में 10 bps की बढ़ोतरी की, 12 मार्च से प्रभावी।

केनरा बैंक ने अपने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में संशोधन किया है, जिसमें 2 साल और 3 साल की अवधि वाली दरों में

Mar 13, 2026 - 10:05
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केनरा बैंक ने 2 और 3 साल की MCLR दरों में 10 bps की बढ़ोतरी की, 12 मार्च से प्रभावी।
केनरा बैंक ने 2 और 3 साल की MCLR दरों में 10 bps की बढ़ोतरी की, 12 मार्च से प्रभावी।
  • घर, गाड़ी और पर्सनल लोन की EMI बढ़ने की संभावना, लंबी अवधि के लोन प्रभावित
  • महंगाई और बैंकिंग लागत के बीच यह फैसला, अन्य टेन्योर दरें अपरिवर्तित

केनरा बैंक ने अपने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में संशोधन किया है, जिसमें 2 साल और 3 साल की अवधि वाली दरों में 10 बेसिस पॉइंट्स (0.10%) की बढ़ोतरी की गई है। यह बदलाव 12 मार्च 2026 से लागू हो गया है। बैंक ने स्टॉक एक्सचेंज को रेगुलेटरी फाइलिंग में जानकारी दी कि 2 साल की MCLR अब 8.95% हो गई है, जो पहले 8.85% थी, जबकि 3 साल की MCLR 8.90% से बढ़कर 9.00% हो गई है। अन्य अवधियों जैसे ओवरनाइट, 1 महीने, 3 महीने, 6 महीने और 1 साल की MCLR में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह संशोधन मुख्य रूप से लंबी अवधि के लोन से जुड़े ग्राहकों को प्रभावित करेगा, क्योंकि अधिकांश घरेलू, वाहन और पर्सनल लोन MCLR से लिंक्ड होते हैं। बढ़ती महंगाई, फंडिंग कॉस्ट में वृद्धि और बैंकिंग सेक्टर के बदलते परिदृश्य में यह कदम बैंक की नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जो उधारकर्ताओं की मासिक किस्त (EMI) पर सीधा असर डालेगा। लाखों ग्राहकों के लिए यह फैसला EMI में वृद्धि का कारण बन सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जिनके लोन की रीसेट डेट आगामी महीनों में है।

MCLR एक बेंचमार्क रेट है जिसके आधार पर बैंक विभिन्न लोन की ब्याज दरें तय करते हैं। जब MCLR बढ़ती है तो फ्लोटिंग रेट वाले लोन की ब्याज दर भी बढ़ जाती है, जिससे EMI या लोन अवधि प्रभावित होती है। केनरा बैंक के इस संशोधन से 2 साल या उससे अधिक अवधि वाले लोन वाले ग्राहकों की EMI में मामूली लेकिन ध्यान देने योग्य वृद्धि होगी। उदाहरण के लिए, 30 लाख रुपये के होम लोन पर 20 साल की अवधि और 9% ब्याज दर पर मासिक EMI लगभग 26,992 रुपये होती है। यदि ब्याज दर 0.10% बढ़कर 9.10% हो जाए तो EMI बढ़कर लगभग 27,200 रुपये हो सकती है, जो सालाना अतिरिक्त हजारों रुपये का बोझ डालती है। पर्सनल लोन और कार लोन, जो आमतौर पर छोटी अवधि के होते हैं लेकिन उच्च ब्याज पर, भी प्रभावित होंगे यदि उनकी रीसेट अवधि 2-3 साल से जुड़ी है। बैंक ने स्पष्ट किया कि छोटी अवधि की दरें स्थिर रखी गई हैं ताकि अल्पकालिक उधारकर्ताओं पर कम प्रभाव पड़े। यह फैसला RBI की मौद्रिक नीति और बाजार की तरलता पर निर्भर करता है, जहां फंडिंग कॉस्ट बढ़ने से बैंक ऐसे कदम उठाते हैं।

यह बढ़ोतरी घरेलू लोन पर सबसे अधिक प्रभाव डालेगी, क्योंकि अधिकांश होम लोन लंबी अवधि (15-30 साल) के होते हैं और MCLR से लिंक्ड रहते हैं। केनरा बैंक के होम लोन की वर्तमान ब्याज दरें 7.15% से 10.00% के बीच हैं, लेकिन MCLR बढ़ने से स्प्रेड के साथ प्रभावी दर बढ़ सकती है। बैंक RLLR (रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट) भी ऑफर करता है, जो RBI के रेपो रेट से जुड़ा है और फिलहाल 8.00% है, लेकिन MCLR आधारित लोन अलग से प्रभावित होते हैं। यदि कोई ग्राहक MCLR लिंक्ड लोन पर है तो उनकी EMI बढ़ने की संभावना है, जबकि RLLR लिंक्ड लोन RBI के अगले फैसले तक स्थिर रह सकते हैं। महंगाई के दबाव में बैंक फंडिंग कॉस्ट को बैलेंस करने के लिए ऐसे संशोधन करते हैं, जिससे उधारकर्ताओं की मासिक बजट पर असर पड़ता है। ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी लोन एग्रीमेंट चेक करें और बैंक से संपर्क कर EMI प्रभाव की गणना करवाएं।

कार लोन और पर्सनल लोन पर भी असर पड़ेगा, हालांकि इनकी अवधि आमतौर पर 5-7 साल होती है लेकिन यदि लोन 2-3 साल पुराना है तो रीसेट पर ब्याज बढ़ सकता है। केनरा बैंक के कार लोन की दरें 7.45% से 15.00% तक हैं, और पर्सनल लोन 9.70% से 14.70% तक। 10 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी छोटी लग सकती है लेकिन लंबे समय में कुल ब्याज भुगतान में हजारों रुपये का अंतर आता है। उदाहरणस्वरूप, 10 लाख रुपये के कार लोन पर 0.10% बढ़ोतरी से कुल ब्याज में अतिरिक्त 10,000-15,000 रुपये जुड़ सकते हैं। बैंक ने यह संशोधन चुनिंदा टेन्योर पर किया है, जो लंबी अवधि के लोन को टारगेट करता है जहां फंडिंग कॉस्ट का प्रभाव अधिक होता है। ग्राहकों को फिक्स्ड रेट ऑप्शन पर विचार करने या लोन ट्रांसफर की संभावना तलाशने की सलाह दी जा रही है यदि EMI में बड़ा उछाल आए।

बैंकिंग सेक्टर में हाल के महीनों में MCLR संशोधन आम हो गए हैं, क्योंकि RBI की नीति और बाजार स्थितियां बदल रही हैं। केनरा बैंक का यह कदम अन्य PSU बैंकों के समान है, जहां फंडिंग कॉस्ट बढ़ने पर लेंडिंग रेट्स एडजस्ट किए जाते हैं। हालांकि, छोटी अवधि की दरें अपरिवर्तित रखने से अल्पकालिक उधारकर्ताओं को राहत मिली है। ग्राहकों के लिए यह समय अपनी लोन संरचना की समीक्षा करने का है, जैसे कि MCLR से RLLR पर स्विच करना यदि फायदेमंद हो। बैंक ने स्पष्ट किया कि नई दरें केवल नए लोन या रीसेट डेट पर लागू होंगी, पुराने लोन की मौजूदा EMI तुरंत नहीं बढ़ेगी बल्कि अगली रीसेट डेट पर प्रभाव पड़ेगा। लाखों ग्राहकों के लिए यह फैसला बजट प्लानिंग में बदलाव लाएगा।

यह संशोधन महंगाई के दौर में उधारकर्ताओं के लिए चुनौती है, क्योंकि बढ़ती EMI से डिस्पोजेबल इनकम कम हो सकती है। केनरा बैंक जैसे बड़े PSU बैंक के फैसले से बाजार में अन्य बैंकों पर भी दबाव बढ़ सकता है। ग्राहकों को सुझाव है कि वे EMI कैलकुलेटर का उपयोग कर नई दरों का प्रभाव देखें और यदि संभव हो तो प्रीपेमेंट या रिफाइनेंसिंग पर विचार करें। बैंक ने यह कदम बाजार की स्थिरता बनाए रखने के लिए उठाया है, लेकिन उधारकर्ताओं की लागत बढ़ने से उपभोग पर असर पड़ सकता है।

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