भवानीपुर में फिर चला ममता बनर्जी का जादू: शुरुआती दौर में पिछड़ने के बाद शुभेंदु अधिकारी पर बनाई बड़ी बढ़त।

पश्चिम बंगाल की हाई-प्रोफाइल भवानीपुर विधानसभा सीट पर मतगणना के दौरान जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा

May 4, 2026 - 11:37
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भवानीपुर में फिर चला ममता बनर्जी का जादू: शुरुआती दौर में पिछड़ने के बाद शुभेंदु अधिकारी पर बनाई बड़ी बढ़त।
भवानीपुर में फिर चला ममता बनर्जी का जादू: शुरुआती दौर में पिछड़ने के बाद शुभेंदु अधिकारी पर बनाई बड़ी बढ़त।
  • बंगाल में सत्ता का महासंग्राम: भवानीपुर सीट पर पल-पल बदलते रुझानों ने बढ़ाई धड़कनें, दीदी ने फिर पकड़ी रफ्तार
  • मतगणना के ताजा अपडेट: कोलकाता के दिल में ममता बनर्जी का दबदबा बरकरार, शुभेंदु अधिकारी को कड़ी चुनौती

पश्चिम बंगाल की हाई-प्रोफाइल भवानीपुर विधानसभा सीट पर मतगणना के दौरान जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सुबह जब डाक मतपत्रों और शुरुआती दौर की गिनती शुरू हुई, तब भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी ने मामूली बढ़त बनाकर तृणमूल कांग्रेस के खेमे में हलचल पैदा कर दी थी। हालांकि, जैसे-जैसे ईवीएम के राउंड आगे बढ़े, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी पकड़ मजबूत करनी शुरू कर दी। ताजा रुझानों के अनुसार, ममता बनर्जी अब शुभेंदु अधिकारी से लगभग 2,000 मतों के अंतर से आगे निकल चुकी हैं। यह सीट ममता बनर्जी के लिए न केवल राजनीतिक अस्तित्व का सवाल है, बल्कि उनकी प्रतिष्ठा से भी जुड़ी हुई है। भवानीपुर को तृणमूल कांग्रेस का अभेद्य किला माना जाता है, लेकिन भाजपा ने यहाँ पूरी ताकत झोंककर मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया है।

राज्य के अन्य हिस्सों की बात करें तो चुनावी रुझान मिश्रित संकेत दे रहे हैं। जहाँ एक ओर भवानीपुर में ममता बनर्जी बढ़त की ओर अग्रसर हैं, वहीं राज्य की कुल 294 सीटों में से कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला बना हुआ है। उत्तर बंगाल और जंगलमहल जैसे क्षेत्रों में भाजपा की स्थिति मजबूत दिखाई दे रही है, जबकि दक्षिण बंगाल के मैदानी इलाकों में तृणमूल कांग्रेस अपनी साख बचाने की जद्दोजहद कर रही है। मतगणना केंद्रों के बाहर भारी सुरक्षा बल तैनात है और हर राउंड की गिनती के बाद समर्थकों के बीच उत्साह और तनाव का माहौल बदल रहा है। यह चुनाव परिणाम तय करेगा कि बंगाल में 'दीदी' का शासन जारी रहेगा या फिर राज्य में सत्ता परिवर्तन की नई पटकथा लिखी जाएगी। भवानीपुर सीट का इतिहास हमेशा से ही मुख्यमंत्री के पक्ष में रहा है, लेकिन 2021 के विधानसभा चुनाव के अनुभवों को देखते हुए इस बार सावधानी बरती जा रही है। शुभेंदु अधिकारी, जो कभी ममता बनर्जी के सबसे करीबी सहयोगियों में गिने जाते थे, अब उनके सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी के रूप में सामने हैं। उन्होंने भवानीपुर के शहरी और मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में सघन प्रचार किया था, जिसका असर शुरुआती रुझानों में देखने को मिला। हालांकि, दक्षिण कोलकाता के इस हिस्से में तृणमूल कांग्रेस का संगठनात्मक ढांचा बहुत पुराना और मजबूत है। मतगणना के पांचवें राउंड के बाद यह देखा गया कि घनी आबादी वाले वार्डों से ममता बनर्जी को एकतरफा वोट मिले हैं, जिससे उनके बढ़त का अंतर लगातार बढ़ रहा है।

भवानीपुर मतगणना के महत्वपूर्ण बिंदु

पहला राउंड: शुभेंदु अधिकारी ने 1,558 मतों की मामूली बढ़त हासिल की थी।

तीसरा राउंड: ममता बनर्जी ने वापसी करते हुए 898 मतों की बढ़त बनाई।

ताजा स्थिति: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगभग 1,996 मतों से आगे चल रही हैं।

मुख्य मुकाबला: तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी बनाम भाजपा के शुभेंदु अधिकारी।

चुनाव आयोग द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण सीटों पर भी चौंकाने वाले रुझान आ रहे हैं। पानीहाटी विधानसभा सीट से भाजपा की उम्मीदवार, जो आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना से जुड़ी पीड़िता की मां हैं, निर्णायक बढ़त बनाए हुए हैं। यह रुझान स्पष्ट करता है कि राज्य में महिलाओं की सुरक्षा और हालिया घटनाओं का चुनावी नतीजों पर गहरा प्रभाव पड़ा है। इसके अतिरिक्त, सिलीगुड़ी और आसनसोल जैसे शहरी क्षेत्रों में भी भाजपा के उम्मीदवार तृणमूल कांग्रेस के दिग्गजों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। वहीं, कोलकाता की अन्य शहरी सीटों जैसे कि अलीपुर और टॉलीगंज में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार आगे चल रहे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि राजधानी के हृदय क्षेत्र में अभी भी सत्ताधारी दल की पकड़ बनी हुई है।

इस बार के चुनाव में एक महत्वपूर्ण कारक 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) के बाद मतदाता सूची से काटे गए नामों को लेकर भी रहा है। विपक्षी दलों और सत्ता पक्ष के बीच इस मुद्दे पर काफी बहस हुई थी, जिसका प्रभाव अब मतदान के पैटर्न में दिख रहा है। ग्रामीण बंगाल में जहाँ विकास की योजनाओं और स्थानीय भ्रष्टाचार के मुद्दों पर मतदान हुआ है, वहीं शहरी क्षेत्रों में विचारधारा और कानून-व्यवस्था मुख्य बिंदु रहे हैं। ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस ने अपनी लोक-लुभावन योजनाओं जैसे 'लक्ष्मी भंडार' के भरोसे सत्ता वापसी की उम्मीद जताई है, जबकि भाजपा ने 'परिवर्तन' के नारे के साथ मतदाताओं को अपनी ओर खींचने का प्रयास किया है। मतगणना की प्रक्रिया जैसे-जैसे दोपहर की ओर बढ़ रही है, भवानीपुर सीट पर भाजपा के शुभेंदु अधिकारी के पिछड़ने से पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं में थोड़ी मायूसी देखी जा रही है। हालांकि, भाजपा नेतृत्व का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों के ईवीएम खुलने पर स्थिति में सुधार हो सकता है। दूसरी तरफ, तृणमूल कांग्रेस के मुख्यालय 'तृणमूल भवन' में जश्न की तैयारियां शुरू हो गई हैं, क्योंकि पार्टी न केवल भवानीपुर बल्कि कोलकाता की अधिकांश सीटों पर अपनी बढ़त बनाए रखने में सफल रही है। सुरक्षा के लिहाज से केंद्रीय बलों ने मतगणना केंद्रों के चारों ओर त्रिस्तरीय घेरा बनाया हुआ है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके।

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