'दुश्मन को आएगा हार्ट अटैक': ईरान ने अमेरिका-इजरायल के खिलाफ नए रहस्यमयी हथियार के इस्तेमाल की दी धमकी।

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा गतिरोध अब केवल कूटनीतिक बयानों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह एक खतरनाक सैन्य मोड़

Apr 30, 2026 - 12:01
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'दुश्मन को आएगा हार्ट अटैक': ईरान ने अमेरिका-इजरायल के खिलाफ नए रहस्यमयी हथियार के इस्तेमाल की दी धमकी।
'दुश्मन को आएगा हार्ट अटैक': ईरान ने अमेरिका-इजरायल के खिलाफ नए रहस्यमयी हथियार के इस्तेमाल की दी धमकी।
  • होर्मुज में बढ़ा तनाव: ईरानी नौसेना का दावा- अमेरिकी विमानवाहक पोत 'अब्राहम लिंकन' पर किए सात मिसाइल हमले
  • ट्रंप प्रशासन की नाकाबंदी पर ईरान का पलटवार, अरब सागर की तरफ से बंद किया होर्मुज जलडमरूमध्य

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा गतिरोध अब केवल कूटनीतिक बयानों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह एक खतरनाक सैन्य मोड़ पर पहुँच गया है। ईरानी नौसेना के कमांडर रियर एडमिरल शाहराम ईरानी ने एक हालिया साक्षात्कार में बेहद चौंकाने वाला खुलासा करते हुए दुश्मन देशों को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने दावा किया कि इस्लामिक गणराज्य बहुत जल्द अपने विरोधियों, विशेष रूप से अमेरिका और इजरायल का सामना एक ऐसे गुप्त हथियार से करेगा, जिससे वे अत्यधिक भयभीत हैं। कमांडर ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि यह हथियार दुश्मन की सेनाओं के बिल्कुल करीब ही मौजूद है और इसके प्रभाव इतने घातक हो सकते हैं कि इसे देखने मात्र से ही उन्हें "हार्ट अटैक" आ सकता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं और तेहरान अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन कर वैश्विक शक्तियों को चुनौती दे रहा है। यह ताजा तनाव उस समय और बढ़ गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान द्वारा रखे गए एक महत्वपूर्ण समझौते के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। ईरान ने प्रस्ताव दिया था कि यदि अमेरिका उसके ऊपर लगाई गई सख्त आर्थिक और व्यापारिक नाकाबंदी को हटा लेता है, तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए फिर से खोल देगा। तेहरान का यह प्रस्ताव न केवल व्यापारिक था, बल्कि इसमें परमाणु कार्यक्रम पर होने वाली लंबी बातचीत को टालने की योजना भी शामिल थी। हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने इसे स्वीकार करने के बजाय अपनी 'अधिकतम दबाव' वाली रणनीति को जारी रखने का फैसला किया। इस नाकाबंदी का मुख्य उद्देश्य ईरानी तेल के निर्यात को पूरी तरह से रोककर तेहरान की अर्थव्यवस्था को पंगु बनाना है, ताकि उन्हें अपनी शर्तों पर बातचीत की मेज पर लाया जा सके।

रियर एडमिरल शाहराम ईरानी ने ट्रंप प्रशासन की इस रणनीति का जमकर उपहास किया और इसे एक विफल प्रयास करार दिया। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों ने यह गलतफहमी पाल रखी है कि वे आर्थिक दबाव और प्रतिबंधों के जरिए ईरान को झुका देंगे और अपनी मनचाही शर्तें मनवा लेंगे। कमांडर के अनुसार, अमेरिका की यह सोच अब एक अंतरराष्ट्रीय मजाक बनकर रह गई है, क्योंकि ईरान ने साबित कर दिया है कि वह इन प्रतिबंधों के बावजूद अपनी संप्रभुता की रक्षा करने में सक्षम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दबाव की राजनीति ईरान पर काम नहीं करेगी और दुश्मन जितनी अधिक सख्ती करेगा, ईरान की प्रतिक्रिया उतनी ही अधिक विनाशकारी होगी। तेहरान का मानना है कि अमेरिका मध्य-पूर्व में अपनी पकड़ खो रहा है और उसकी धमकियां अब बेअसर साबित हो रही हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल गलियारा है, जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। ईरान द्वारा इसे बंद करने की धमकी न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला सकती है, बल्कि यह सीधे तौर पर अमेरिका और उसके सहयोगियों की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है। ईरान ने केवल मौखिक धमकियां ही नहीं दी हैं, बल्कि उसने अमेरिकी नौसेना पर सीधे हमले करने का भी बड़ा दावा किया है। ईरानी सेना के अनुसार, उन्होंने अमेरिकी विमानवाहक पोत 'अब्राहम लिंकन' को निशाना बनाते हुए कम से कम सात मिसाइल हमले किए हैं। उनका दावा है कि इन सटीक हमलों की वजह से दुनिया का सबसे शक्तिशाली माना जाने वाला यह विमानवाहक पोत कुछ समय के लिए निष्क्रिय हो गया था और उससे विमान उड़ाना या किसी भी प्रकार का हवाई अभियान चलाना असंभव हो गया था। हालांकि स्वतंत्र रूप से इन हमलों की क्षति का पूर्ण विवरण सामने नहीं आया है, लेकिन ईरान का यह दावा उसकी मिसाइल तकनीक और साहस को प्रदर्शित करता है। कमांडर ने यह भी कहा कि उन्होंने मध्य-पूर्व में फैले संवेदनशील अमेरिकी और इजरायली ठिकानों पर अब तक 100 से अधिक सफल जवाबी हमले किए हैं।

अरब सागर और फारस की खाड़ी के मुहाने पर स्थित रणनीतिक जलमार्गों को लेकर ईरान ने अपनी स्थिति और भी सख्त कर ली है। नौसेना प्रमुख ने घोषणा की है कि ईरान ने अरब सागर की दिशा से होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी कर दी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिकी या इजरायली युद्धपोत उनकी समुद्री सीमाओं के और करीब आने की कोशिश करते हैं, तो ईरानी सेना बिना किसी देरी के और भी भीषण जवाबी कार्रवाई करेगी। ईरान की यह घेरेबंदी अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भारी अनिश्चितता पैदा कर रही है। तेहरान का तर्क है कि वह केवल अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है और किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अमेरिकी सेना की गतिविधियों की कड़ी आलोचना करते हुए ईरानी कमांडर ने उन पर समुद्री डकैती का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने नाकाबंदी के नाम पर कुछ ईरानी तेल टैंकरों और जहाजों पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया है, जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का खुला उल्लंघन है। रियर एडमिरल शाहराम ईरानी ने इस कार्रवाई को केवल डकैती ही नहीं, बल्कि एक प्रकार का "बंधक बनाना" बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका एक अपराधी की तरह व्यवहार कर रहा है, जो व्यापारिक जहाजों को रोककर अपनी हताशा निकाल रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद, ईरान के कई जहाज सफलतापूर्वक अपने बंदरगाहों से रवाना हुए हैं और अपनी मंजिलों तक पहुँचने में कामयाब रहे हैं, जो उनकी हार न मानने वाली भावना का प्रतीक है।

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