बंगाल में नतीजों से पहले हाई-वोल्टेज ड्रामा: ईवीएम की सुरक्षा पर आधी रात को सड़कों पर उतरीं ममता बनर्जी।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के अंतिम चरण का मतदान संपन्न होने के बाद अब सबकी निगाहें 4 मई को होने वाली मतगणना

May 1, 2026 - 13:53
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बंगाल में नतीजों से पहले हाई-वोल्टेज ड्रामा: ईवीएम की सुरक्षा पर आधी रात को सड़कों पर उतरीं ममता बनर्जी।
बंगाल में नतीजों से पहले हाई-वोल्टेज ड्रामा: ईवीएम की सुरक्षा पर आधी रात को सड़कों पर उतरीं ममता बनर्जी।
  • कोलकाता के स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर टीएमसी और बीजेपी में भिड़ंत, सीसीटीवी फुटेज ने बढ़ाई सियासी तपिश
  • 4 मई को आने वाले फैसले से पहले लोकतंत्र के 'पहरे' पर सियासत, बैलेट बॉक्स के साथ छेड़छाड़ का संगीन आरोप

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के अंतिम चरण का मतदान संपन्न होने के बाद अब सबकी निगाहें 4 मई को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं। हालांकि, नतीजों के औपचारिक ऐलान से पहले ही कोलकाता की सड़कों पर भारी राजनीतिक गहमागहमी और तनाव का माहौल बन गया है। मामला उस समय गरमा गया जब तृणमूल कांग्रेस ने कोलकाता के एक प्रमुख स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर बीजेपी कार्यकर्ताओं और चुनाव आयोग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। टीएमसी का दावा है कि मतदान के बाद ईवीएम और बैलेट बॉक्स के साथ असुरक्षित तरीके से छेड़छाड़ की जा रही है। इस विवाद ने तब बड़ा रूप ले लिया जब पार्टी ने एक सीसीटीवी फुटेज जारी किया, जिसमें कथित तौर पर कुछ लोग मतपत्रों के साथ संदिग्ध गतिविधि करते नजर आ रहे हैं। इस घटना के बाद से कोलकाता के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। तृणमूल कांग्रेस द्वारा जारी किए गए सीसीटीवी फुटेज ने राज्य की राजनीति में उबाल ला दिया है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि यह वीडियो इस बात का प्रमाण है कि लोकतंत्र की दिन-दहाड़े हत्या की जा रही है और विपक्षी दल के साथ मिलकर चुनावी प्रक्रिया को दूषित करने की कोशिश हो रही है। टीएमसी नेताओं का आरोप है कि स्ट्रॉन्ग रूम, जहाँ उम्मीदवारों की किस्मत कैद है, वहाँ बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश होना सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग से कड़ी शिकायत की है और मांग की है कि मतदान की पवित्रता बनाए रखने के लिए तत्काल प्रभाव से कड़े कदम उठाए जाएं। इस आरोप के बाद से ही टीएमसी समर्थकों ने कोलकाता के विभिन्न केंद्रों पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

विवाद के गहराते ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद एक्शन मोड में नजर आईं। जैसे ही उन्हें स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर हंगामे और कथित धांधली की सूचना मिली, वे तुरंत दक्षिण कोलकाता के सखावत मेमोरियल स्कूल स्थित स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर पहुँच गईं। ममता बनर्जी ने वहाँ पहुँचकर सुरक्षा इंतजामों का जायजा लिया और अधिकारियों से तीखे सवाल पूछे। उन्होंने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि यदि जनादेश के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ की कोशिश की गई, तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री का आधी रात को इस तरह स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर पहुंचना यह दर्शाता है कि चुनावी जंग अब नतीजों से पहले ही सड़कों पर सुरक्षा और भरोसे की लड़ाई बन चुकी है।

चुनाव आयोग की सफाई

बढ़ते हंगामे के बीच चुनाव आयोग ने अपनी प्रतिक्रिया जारी करते हुए सभी आरोपों को निराधार बताया है। आयोग का कहना है कि जो सीसीटीवी फुटेज दिखाया जा रहा है, वह ईवीएम के साथ छेड़छाड़ नहीं बल्कि पोस्टल बैलेट के नियमानुसार सेग्रीगेशन (वर्गीकरण) की प्रक्रिया है। अधिकारियों ने दावा किया कि स्ट्रॉन्ग रूम पूरी तरह सील और सुरक्षित हैं।

दूसरी ओर, कोलकाता के खुदीराम अनुशीलन केंद्र के बाहर भी भारी बवाल देखने को मिला। यहाँ टीएमसी उम्मीदवार कुणाल घोष और शशि पांजा धरने पर बैठ गए, जिसके बाद टीएमसी और बीजेपी समर्थकों के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की शुरू हो गई। बीजेपी का कहना है कि टीएमसी अपनी संभावित हार को देखते हुए पहले से ही बहानेबाजी कर रही है और बेवजह का डर फैला रही है। माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) और कोलकाता पुलिस को बीच-बचाव करना पड़ा। पुलिस ने केंद्र के चारों ओर बैरिकेडिंग कर दी है और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए अतिरिक्त फोर्स तैनात की गई है। तृणमूल कांग्रेस ने अपने सभी उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं को आदेश दिया है कि वे 4 मई की मतगणना तक चौबीसों घंटे स्ट्रॉन्ग रूम की निगरानी करें। ममता बनर्जी ने वीडियो संदेश के माध्यम से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट की जाए और मतगणना केंद्रों के पास पूरी मुस्तैदी से डटे रहें। पार्टी का कहना है कि वे किसी भी सूरत में ईवीएम को 'लूटने' की अनुमति नहीं देंगे। इस आदेश के बाद राज्य भर के मतगणना केंद्रों के बाहर टीएमसी समर्थकों ने टेंट लगा लिए हैं और वे बारी-बारी से पहरा दे रहे हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि बंगाल में सत्ता की लड़ाई कितनी कांटे की है और दोनों ही पक्ष एक-एक वोट की सुरक्षा को लेकर कितने संवेदनशील हैं।

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