इंदिरापुरम की सोसायटी में 'अग्नि तांडव': 45 मिनट तक धुएं के गुबार में कैद रहीं सांसें, चार आशियाने जलकर राख।
गाजियाबाद के इंदिरापुरम स्थित गौड़ ग्रीन एवेन्यू सोसायटी में गुरुवार का दिन सामान्य रूप से बीत रहा था, लेकिन अचानक उठी आग की
- मौत को करीब से देख सहमे लोग: गौड़ ग्रीन एवेन्यू में आग का खौफनाक मंजर, दमकलकर्मियों ने बचाई बुजुर्ग और महिलाओं की जान
- राख हुआ सपनों का घर: गाजियाबाद में भीषण अग्निकांड के बाद मची चीख-पुकार, ऑक्सीजन पर लेटे बुजुर्ग का हुआ सुरक्षित रेस्क्यू
गाजियाबाद के इंदिरापुरम स्थित गौड़ ग्रीन एवेन्यू सोसायटी में गुरुवार का दिन सामान्य रूप से बीत रहा था, लेकिन अचानक उठी आग की लपटों ने पूरी फिजा में दहशत भर दी। दोपहर के समय जब लोग अपने घरों में रोजमर्रा के कामों में व्यस्त थे, तभी सोसायटी की एक ऊंची मंजिल के फ्लैट से काला धुआं निकलने लगा। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और पास के तीन अन्य फ्लैटों को भी अपनी चपेट में ले लिया। आग इतनी भीषण थी कि दूर-दूर से इसकी लपटें और काला गुबार देखा जा सकता था। चारों तरफ चीख-पुकार मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए नीचे की ओर भागने लगे। लेकिन ऊपरी मंजिलों पर रहने वाले कई लोग आग और धुएं के कारण गलियारों में ही फंस गए, जिसके बाद वहां 'मौत' और 'जिंदगी' के बीच संघर्ष शुरू हो गया। अग्निकांड के दौरान सबसे डरावना मंजर वह था जब करीब 45 मिनट तक कई परिवार आग की लपटों के बीच घिरे रहे। फ्लैटों के अंदर फंसे लोगों को ऐसा महसूस हो रहा था जैसे आग की तपिश उनकी सांसों को छीन लेगी। धुएं के कारण दृश्यता शून्य हो गई थी और सांस लेना दूभर हो गया था। लोग बालकनी की ओर भागे, लेकिन वहां भी नीचे से उठती लपटें उन्हें डरा रही थीं। इस दौरान एक फ्लैट में एक बुजुर्ग, जो ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे, फंसे रह गए। उनके साथ दो महिलाएं भी थीं जो घबराहट के कारण कुछ समझ नहीं पा रही थीं। आग की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि खिड़कियों के शीशे तड़कने लगे थे और एसी के कंप्रेसर फटने की आवाजें पूरी सोसायटी में गूंज रही थीं, जिससे नीचे खड़े लोगों के दिल दहल रहे थे।
दमकल विभाग को सूचना मिलते ही राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया। दमकल की गाड़ियों को सोसायटी के भीतर पहुंचने में शुरुआती बाधाओं का सामना करना पड़ा, लेकिन फायर ब्रिगेड के जवानों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए सीढ़ियों और स्नॉर्कल की मदद से फंसे हुए लोगों तक पहुंचने की कोशिश की। दमकलकर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर उस फ्लैट में प्रवेश किया जहां ऑक्सीजन पर लेटे बुजुर्ग और महिलाएं फंसी थीं। धुएं के घने काले बादलों को चीरते हुए सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें एक-एक कर सुरक्षित बाहर निकाला। नीचे उतरने के बाद जब उन लोगों ने अपने पीछे मुड़कर देखा, तो उनके आलीशान घर आग के गोले में तब्दील हो चुके थे। सुरक्षित बचने की राहत तो थी, लेकिन सबकुछ खोने का गम उनकी आंखों से आंसुओं के रूप में बह रहा था। हाईराइज सोसायटियों में आग लगने की स्थिति में लिफ्ट का प्रयोग वर्जित होता है। ऐसे में फायर डक्ट और हाइड्रेंट सिस्टम का चालू होना अनिवार्य है। इंदिरापुरम की इस घटना में भी यह जांच की जा रही है कि क्या सोसायटी का आंतरिक अग्निशमन तंत्र समय पर काम कर पाया था या नहीं। सुरक्षित बाहर निकलकर आए लोगों ने जो आपबीती सुनाई, वह किसी के भी रोंगटे खड़े कर सकती है। सूखे गले और कांपती आवाज में एक पीड़ित ने बताया कि जब आग लगी तो उन्हें भागने का रास्ता तक नहीं मिल रहा था। गलियारे धुएं से भरे थे और ऐसा लग रहा था कि आज यह इमारत उनकी कब्रगाह बन जाएगी। 45 मिनट के उस इंतजार में एक-एक सेकंड घंटों के बराबर लग रहा था। बच्चों को सीने से चिपकाए महिलाएं बस किसी चमत्कार का इंतजार कर रही थीं। आग की लपटों की आवाज और गर्मी इतनी ज्यादा थी कि उन्हें लगा कि वे जिंदा नहीं जलेंगे तो धुएं से दम घुटने से मर जाएंगे। यह पूरी घटना उन लोगों के मानस पटल पर हमेशा के लिए एक गहरे घाव की तरह अंकित हो गई है।
इस अग्निकांड ने चार परिवारों को सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया है। उनके घरों में रखा कीमती सामान, जेवर, जरूरी दस्तावेज और वर्षों की यादें पल भर में स्वाहा हो गईं। आग बुझने के बाद जब प्रभावित लोग अपने फ्लैटों का मुआयना करने पहुंचे, तो वहां केवल काला कोयला और राख के ढेर बचे थे। दीवारों की पुट्टी गिर चुकी थी और फर्श पर कांच के टुकड़े बिखरे पड़े थे। अपने आशियाने को इस हालत में देख लोग फफक-फफक कर रो पड़े। प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्होंने पाई-पाई जोड़कर यह घर बनाया था, लेकिन अब उनके पास सिर छिपाने की जगह तक नहीं बची है। अन्य निवासी उनकी मदद के लिए आगे आए हैं, लेकिन इस नुकसान की भरपाई करना नामुमकिन जैसा है। प्रशासनिक स्तर पर इस घटना की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। प्राथमिक रूप से आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है, लेकिन वास्तविक कारणों का पता विस्तृत रिपोर्ट के बाद ही चलेगा। दमकल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि फ्लैटों में किए गए लकड़ी के काम और फॉल्स सीलिंग के कारण आग तेजी से फैली। इसके अलावा, बालकनी में रखे सामान ने भी आग को भड़काने में ईंधन का काम किया। पुलिस और प्रशासन की टीमें अब यह देख रही हैं कि क्या बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन किया गया था या सुरक्षा मानकों में कोई कोताही बरती गई थी। सोसायटी के अन्य निवासियों में भी इस घटना के बाद अपने घरों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता और गुस्सा व्याप्त है।
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