केरल में कांग्रेस की 'सुनामी': शुरुआती रुझानों में एलडीएफ का किला ढहा, बहुमत के करीब पहुँचा यूडीएफ।

केरल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के शुरुआती रुझानों ने राज्य के राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह से बदल कर रख दिया

May 4, 2026 - 12:06
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केरल में कांग्रेस की 'सुनामी': शुरुआती रुझानों में एलडीएफ का किला ढहा, बहुमत के करीब पहुँचा यूडीएफ।
केरल में कांग्रेस की 'सुनामी': शुरुआती रुझानों में एलडीएफ का किला ढहा, बहुमत के करीब पहुँचा यूडीएफ।
  • केरल विधानसभा चुनाव 2026: 61 सीटों पर कांग्रेस की बढ़त ने चौंकाया, पिनाराई विजयन सरकार की विदाई के संकेत
  • शशि थरूर का बड़ा बयान: सत्ता की दहलीज पर खड़ी कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के चयन की प्रक्रिया पर दी जानकारी

केरल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के शुरुआती रुझानों ने राज्य के राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, सुबह से जारी गिनती में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए वामपंथी लोकतांत्रिक मोर्चे (LDF) को काफी पीछे छोड़ दिया है। अब तक कई महत्वपूर्ण सीटों पर 4 से 5 राउंड की मतगणना पूरी हो चुकी है, जिसमें कांग्रेस अकेले 61 सीटों पर निर्णायक बढ़त बनाए हुए है। यह आंकड़ा राज्य की 140 सदस्यीय विधानसभा में सत्ता परिवर्तन की स्पष्ट लहर को दर्शाता है। केरल की राजनीति में पिछले कई दशकों से चली आ रही बारी-बारी से सत्ता बदलने की परंपरा, जिसे 2021 में सीपीआईएम ने तोड़ा था, वह अब फिर से लौटती दिख रही है। तिरुवनंतपुरम से लेकर कासरगोड तक के रुझान बताते हैं कि कांग्रेस के पक्ष में एक मजबूत जमीनी लहर काम कर रही है। रुझानों में कांग्रेस को मिल रही इस शानदार सफलता ने सत्ताधारी गठबंधन के खेमे में हलचल तेज कर दी है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली सरकार, जो लगातार दूसरी बार सत्ता में आने के बाद अपनी पकड़ मजबूत मान रही थी, इस बार कई मोर्चों पर पिछड़ती नजर आ रही है। विशेष रूप से मध्य और उत्तरी केरल के उन क्षेत्रों में जहाँ वामपंथ का दबदबा माना जाता था, वहां कांग्रेस उम्मीदवारों ने भारी मतों के अंतर से बढ़त बनाई है। मतगणना केंद्रों के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का उत्साह चरम पर है और वे जीत के जश्न की तैयारियों में जुट गए हैं। शुरुआती रुझानों के यह आंकड़े यदि अंतिम परिणामों में तब्दील होते हैं, तो यह कांग्रेस के लिए न केवल राज्य में बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी एक बड़ी संजीवनी साबित होगी।

इस बंपर बढ़त के बीच तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सांसद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर का महत्वपूर्ण बयान सामने आया है। थरूर, जो खुद केरल की राजनीति में एक प्रभावशाली चेहरा माने जाते हैं, ने रुझानों पर खुशी व्यक्त करते हुए पार्टी की भविष्य की रणनीति पर प्रकाश डाला है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि कांग्रेस केरल की सत्ता में वापसी करती है, तो मुख्यमंत्री पद के चेहरे का चयन पूरी तरह से लोकतांत्रिक और स्थापित संसदीय प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। उनके अनुसार, नवनिर्वाचित विधायक दल की बैठक बुलाई जाएगी, जहाँ सभी विधायकों की राय ली जाएगी और उसके बाद पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व अंतिम निर्णय लेगा। थरूर ने यह भी संकेत दिया कि पार्टी में कई योग्य चेहरे हैं, लेकिन प्राथमिकता राज्य के विकास और जनता के विश्वास को बनाए रखने की होगी। मतगणना की प्रक्रिया जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, पिनाराई विजयन सरकार के खिलाफ एंटी-इंकंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) के कारक स्पष्ट रूप से प्रभावी होते दिख रहे हैं। प्रशासनिक मुद्दों, कुछ हालिया विवादों और स्थानीय शासन के प्रति लोगों की बदलती धारणा ने कांग्रेस को बढ़त दिलाने में मदद की है। कांग्रेस ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान भ्रष्टाचार और बेरोजगारी को मुख्य मुद्दा बनाया था, जो अब मतों के रूप में परिवर्तित होता दिख रहा है। वायनाड और मलप्पुरम जैसे जिलों में कांग्रेस गठबंधन ने अपनी पकड़ को और मजबूत किया है, जबकि कन्नूर जैसे वामपंथी गढ़ों में भी इस बार कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। शुरुआती चार-पांच राउंड की गिनती यह तय कर चुकी है कि इस बार केरल की जनता ने बदलाव के लिए स्पष्ट जनादेश देने का मन बना लिया है।

केरल के शहरी क्षेत्रों में भी इस बार कांग्रेस के पक्ष में जबरदस्त मतदान हुआ है। कोच्चि और कोझिकोड जैसे व्यापारिक केंद्रों में व्यापारियों और युवाओं ने कांग्रेस के आर्थिक विजन पर भरोसा जताया है। राहुल गांधी की वायनाड में सक्रियता और स्थानीय नेतृत्व जैसे वी.डी. सतीशन और के. सुधाकरन के बीच बेहतर तालमेल ने जमीन पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया। इसके साथ ही, अल्पसंख्यक मतों का एक बड़ा हिस्सा भी इस बार यूडीएफ के पक्ष में समेकित होता दिख रहा है, जो पारंपरिक रूप से केरल में जीत का मुख्य आधार रहा है। मतगणना केंद्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार, कई ग्रामीण विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस उम्मीदवारों की बढ़त हर राउंड के साथ बढ़ती जा रही है। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए ने भी कुछ सीटों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। तिरुवनंतपुरम के शहरी इलाकों और पलक्कड़ जैसी सीटों पर भाजपा उम्मीदवार बढ़त बनाए हुए हैं, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। हालांकि, मुख्य लड़ाई अभी भी यूडीएफ और एलडीएफ के बीच ही सिमटी हुई है। कांग्रेस के लिए सबसे सुखद खबर यह है कि उनके सहयोगी दल भी बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे गठबंधन की कुल संख्या बहुमत के आंकड़े 71 को आसानी से पार करती दिख रही है। शाम तक स्थिति और भी साफ हो जाएगी, लेकिन वर्तमान रुझानों ने कांग्रेस मुख्यालयों में ढोल-नगाड़ों की गूंज और मिठाइयों का वितरण शुरू करवा दिया है।

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