परिवर्तन की आहट? शुरुआती रुझानों में भाजपा 170 के पार, ममता बनर्जी के गढ़ में कमल खिलने के आसार।
पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के लिए हो रही मतगणना के शुरुआती घंटों में भारतीय जनता पार्टी ने अभूतपूर्व बढ़त
- बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक बढ़त: रुझानों में बहुमत का आंकड़ा पार कर टीएमसी को दी कड़ी पटखनी
- भवानीपुर में महामुकाबला: शुभेंदु अधिकारी और ममता बनर्जी के बीच कांटे की टक्कर, पल-पल बदल रहे समीकरण
पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के लिए हो रही मतगणना के शुरुआती घंटों में भारतीय जनता पार्टी ने अभूतपूर्व बढ़त हासिल की है। सुबह 8 बजे से शुरू हुई गिनती के बाद जैसे-जैसे ईवीएम के आंकड़े सामने आ रहे हैं, भाजपा बहुमत के जादुई आंकड़े 148 को पार करते हुए 175 सीटों तक पहुँचती दिखाई दे रही है। इसके विपरीत, पिछले एक दशक से अधिक समय से सत्ता पर काबिज तृणमूल कांग्रेस फिलहाल 115 सीटों के आसपास सिमटती नजर आ रही है। राज्य के विभिन्न हिस्सों से मिल रहे रुझान यह बता रहे हैं कि इस बार मतदाताओं ने एक बड़ा बदलाव करने का मन बनाया है। विशेष रूप से उत्तर बंगाल और जंगलमहल के क्षेत्रों में भाजपा की लहर साफ तौर पर देखी जा सकती है, जहाँ पार्टी ने लगभग क्लीन स्वीप जैसी स्थिति बना ली है।
कोलकाता की सबसे प्रतिष्ठित भवानीपुर सीट पर मुकाबला बेहद रोमांचक मोड़ पर पहुँच गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा के शुभेंदु अधिकारी के बीच हो रही इस सीधी जंग में हर राउंड के साथ बढ़त का अंतर बदल रहा है। दूसरे राउंड की समाप्ति के बाद शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी पर 1,558 मतों की बढ़त बना ली थी, लेकिन तीसरे राउंड के आते-आते मुख्यमंत्री ने फिर से वापसी की और लगभग 2,000 मतों से आगे निकल गईं। इस सीट पर हो रही रस्साकशी पूरे राज्य के चुनावी मिजाज का प्रतिनिधित्व कर रही है। भवानीपुर के परिणाम न केवल ममता बनर्जी के राजनीतिक भविष्य को तय करेंगे, बल्कि यह भी बताएंगे कि क्या कोलकाता जैसे शहरी क्षेत्रों में भी टीएमसी की पकड़ अब कमजोर हो रही है। दक्षिण 24 परगना, जो कभी तृणमूल कांग्रेस का सबसे मजबूत किला माना जाता था, वहां भी इस बार सेंध लगती दिखाई दे रही है। डायमंड हार्बर जैसी सीटों पर, जो अभिषेक बनर्जी का प्रभाव क्षेत्र मानी जाती हैं, भाजपा उम्मीदवार दीपक हालदार ने शुरुआती बढ़त बनाकर सबको चौंका दिया है। वहीं, संदेशखाली और आरजी कर जैसी हालिया घटनाओं का प्रभाव भी स्पष्ट रूप से मतों के रूप में परिवर्तित होता दिख रहा है। उत्तर 24 परगना की कई सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार निर्णायक बढ़त बनाए हुए हैं। यह रुझान संकेत दे रहे हैं कि राज्य में कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों ने मतदाताओं को गहराई तक प्रभावित किया है, जिसके कारण सत्ताधारी दल के दिग्गजों को भी अपनी सीट बचाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है।
सुबह 11:00 बजे तक की दलीय स्थिति
भारतीय जनता पार्टी (BJP): 175 सीटों पर बढ़त (बहुमत से आगे)
तृणमूल कांग्रेस (TMC): 115 सीटों पर बढ़त
वाम मोर्चा (CPM): 01 सीट पर बढ़त
कांग्रेस व अन्य: शून्य
शहरी बंगाल में भी इस बार भाजपा की स्थिति काफी सुधरी हुई नजर आ रही है। हावड़ा, हुगली और कोलकाता के आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में भाजपा ने अपनी सीटों की संख्या में इजाफा किया है। हुगली की चर्चित सिंगूर सीट पर टीएमसी उम्मीदवार बेचाराम मन्ना और भाजपा के बीच बेहद कम अंतर से मुकाबला चल रहा है। बैरकपुर सीट से टीएमसी उम्मीदवार और फिल्म निर्देशक राज चक्रवर्ती फिलहाल पीछे चल रहे हैं, जबकि भाजपा के कौस्तव बागची ने वहां बढ़त बना ली है। शहरी मतदाताओं के बीच बेरोजगारी और औद्योगिक विकास की कमी जैसे मुद्दों ने भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने का काम किया है, जो अब मतगणना के रुझानों में स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा है। पश्चिम बंगाल के ग्रामीण इलाकों में भी भाजपा ने इस बार अपनी पहुंच का विस्तार किया है। पिछले चुनावों में जहाँ टीएमसी को ग्रामीण क्षेत्रों में भारी बढ़त मिलती थी, इस बार वहां भाजपा के संगठनात्मक ढांचे ने कड़ी चुनौती पेश की है। मेदिनीपुर और बांकुरा जैसे जिलों में भाजपा की बढ़त का अंतर काफी अधिक है। इसके अलावा, राज्य में ध्रुवीकरण की राजनीति ने भी अपना असर दिखाया है। शुभेंदु अधिकारी ने शुरुआती बढ़त के बाद कहा कि जिन क्षेत्रों में हिंदू आबादी अधिक है, वहां उन्हें भारी जनसमर्थन मिल रहा है। हालांकि, टीएमसी का मानना है कि जैसे-जैसे शहरी केंद्रों और मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों की गिनती आगे बढ़ेगी, वे भाजपा की इस बढ़त को कम करने में सफल होंगे।
वाम मोर्चा और कांग्रेस गठबंधन की स्थिति इस चुनाव में भी दयनीय बनी हुई है। सुबह 11 बजे तक के रुझानों में सीपीएम महज एक सीट 'डोमकल' पर आगे चल रही है, जबकि कांग्रेस का खाता भी खुलता नजर नहीं आ रहा है। यह रुझान बताते हैं कि बंगाल की राजनीति अब पूरी तरह से दो-ध्रुवीय हो चुकी है, जहाँ मुख्य लड़ाई केवल भाजपा और टीएमसी के बीच सिमट गई है। तीसरे मोर्चे की अनुपस्थिति ने भाजपा के लिए सीधे मुकाबले की राह आसान कर दी है। बंगाल के मतदाता अब किसी भी तरह के 'वोट बंटवारे' के बजाय स्पष्ट जनादेश की ओर बढ़ते दिख रहे हैं, जिसका सीधा लाभ फिलहाल मुख्य विपक्षी दल को मिलता हुआ दिखाई दे रहा है। अगले कुछ घंटे बंगाल की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं। जैसे-जैसे डाक मतपत्रों के बाद ईवीएम के अंतिम राउंड की गिनती पूरी होगी, तस्वीर और भी साफ हो जाएगी। फिलहाल, राज्य भर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी भी प्रकार की हिंसा को रोका जा सके। भाजपा मुख्यालयों पर जश्न का माहौल शुरू हो चुका है, जबकि टीएमसी के खेमे में सन्नाटा पसरा हुआ है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार के लिए यह परिणाम एक बड़ा झटका हो सकते हैं, जो राज्य में उनकी अजेय छवि को चुनौती दे रहे हैं। शाम तक यह स्पष्ट हो जाएगा कि बंगाल की जनता ने 'सोनार बांग्ला' के सपने को साकार करने की जिम्मेदारी किसे सौंपी है।
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