मतदान के दिन बेखौफ होकर घर से निकलें बंगाल के नागरिक, सुरक्षा के लिए चुनाव के 60 दिनों तक तैनात रहेगी सीएपीएफ।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के अंतिम चरण के मतदान से ठीक पहले राजनीतिक तापमान अपने चरम पर पहुँच गया है। केंद्रीय गृह
- अमित शाह का बड़ा वादा: 29 तारीख के मतदान के बाद भी 60 दिनों तक बंगाल में डटे रहेंगे केंद्रीय सुरक्षा बल
- शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के लिए अभूतपूर्व सुरक्षा घेरा, गृह मंत्री ने मतदाताओं को दिया हर प्रकार की सुरक्षा का आश्वासन
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के अंतिम चरण के मतदान से ठीक पहले राजनीतिक तापमान अपने चरम पर पहुँच गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बेहाला और चंदननगर में विशाल रोड शो और रैलियों के माध्यम से मतदाताओं को सुरक्षा का भरोसा दिलाते हुए एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने और चुनाव बाद होने वाली संभावित हिंसा को रोकने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की तैनाती केवल चुनाव के दिन तक सीमित नहीं रहेगी। गृह मंत्री ने मतदाताओं से अपील की कि वे किसी भी प्रकार के भय के बिना लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लें, क्योंकि सुरक्षा बल लंबे समय तक क्षेत्र में मौजूद रहकर असामाजिक तत्वों पर नकेल कसेंगे। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे और अंतिम चरण के मतदान के लिए प्रचार के अंतिम दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में रोड शो किए। बेहाला पश्चिम और चंदननगर में उमड़े जनसैलाब को संबोधित करते हुए उन्होंने मतदाताओं के मन से भय निकालने का प्रयास किया। गृह मंत्री ने कहा कि मतदान के दिन यानी 29 तारीख को किसी को भी डरने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि चुनाव आयोग ने चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बलों की तैनाती की है। उन्होंने विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जहाँ अतीत में राजनीतिक हिंसा की खबरें आती रही हैं। शाह का संदेश स्पष्ट था कि राज्य की जनता अपनी इच्छाशक्ति का प्रयोग बिना किसी दबाव के करे।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गृह मंत्री ने जो सबसे महत्वपूर्ण घोषणा की, वह केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की मौजूदगी की अवधि को लेकर थी। उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह भरोसा दिलाया कि चुनाव संपन्न होने और परिणाम आने के बाद भी ये बल वापस नहीं लौटेंगे। गृह मंत्री के अनुसार, केंद्र सरकार ने यह निर्णय लिया है कि कम से कम 60 दिनों तक ये बल बंगाल में ही रहेंगे। इस कदम का मुख्य उद्देश्य चुनाव के बाद होने वाली उस हिंसा को रोकना है, जो पिछले कई वर्षों से बंगाल की राजनीति का एक दुखद हिस्सा रही है। यह आश्वासन उन मतदाताओं के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है जो मतदान के बाद प्रतिशोध की राजनीति से डरते हैं। प्रशासनिक स्तर पर इस बार सुरक्षा के इंतजाम पिछले चुनावों की तुलना में कहीं अधिक व्यापक और सख्त नजर आ रहे हैं। इस बार चुनाव केवल दो चरणों में आयोजित किए गए हैं, जिसके कारण प्रत्येक चरण में सुरक्षा बलों की उपलब्धता बहुत अधिक रही है। दूसरे चरण के मतदान के लिए रिकॉर्ड संख्या में कंपनियों को तैनात किया गया है, ताकि बूथ के भीतर और बाहर किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे। गृह मंत्री ने बताया कि चुनाव आयोग ने इस बार सुरक्षा का ऐसा घेरा तैयार किया है जिसे भेद पाना किसी भी उपद्रवी के लिए संभव नहीं होगा। सुरक्षा बलों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे मतदाताओं को डराने-धमकाने वाले तत्वों के खिलाफ त्वरित और सख्त कार्रवाई करें।
गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों की लगभग 2300 से अधिक कंपनियों को तैनात किया गया है। मतदान केंद्रों पर वेबकास्टिंग के माध्यम से सीधी निगरानी रखी जा रही है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में तत्काल सहायता भेजी जा सके। गृह मंत्री के बयान के बाद, अब इन बलों की कार्ययोजना में चुनाव बाद की सुरक्षा गतिविधियों को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है। राजनीतिक रैलियों के दौरान गृह मंत्री ने राज्य सरकार पर भी तीखे प्रहार किए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य का वर्तमान प्रशासन कुछ खास तत्वों को संरक्षण दे रहा है, जो मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। अमित शाह ने कहा कि अब वह समय बीत चुका है जब डराकर वोट लिए जाते थे। उन्होंने स्थानीय अधिकारियों को भी सतर्क किया कि वे अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन पूरी निष्पक्षता से करें। गृह मंत्री का यह बयान कि 'भाजपा की सरकार आने के बाद भी बल यहीं रहेंगे', यह संकेत देता है कि केंद्र सरकार राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर किसी भी स्तर पर समझौता करने के मूड में नहीं है।
बंगाल के इस चुनावी रण में घुसपैठ और नागरिकता जैसे मुद्दे भी अमित शाह के भाषणों के केंद्र में रहे। उन्होंने कहा कि एक बार सुरक्षा सुनिश्चित हो जाने के बाद, राज्य में उन ताकतों को चिन्हित करना आसान होगा जो अवैध रूप से यहाँ निवास कर रही हैं और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करती रही हैं। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे 'सोनार बांग्ला' के निर्माण के लिए अपना बहुमूल्य वोट दें। शाह ने विश्वास व्यक्त किया कि इस बार बंगाल की जनता परिवर्तन के पक्ष में है और भारी संख्या में मतदान केंद्र तक पहुँचकर इतिहास रचेगी। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं से अधिक से अधिक संख्या में बाहर निकलने का आह्वान किया। चुनाव प्रचार के दौरान जिस तरह से भीड़ उमड़ी, उसने सुरक्षा बलों के लिए चुनौती को और बढ़ा दिया है। हालांकि, गृह मंत्री ने इसे सकारात्मक ऊर्जा बताते हुए कहा कि यह भीड़ इस बात का प्रमाण है कि लोग अब बदलाव चाहते हैं और डरने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने दोहराया कि मतदान की गोपनीयता और सुरक्षा की गारंटी पूरी तरह से दी जा रही है। 29 तारीख को होने वाले मतदान के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल को और अधिक कड़ा कर दिया गया है, जिसमें ड्रोन से निगरानी और संवेदनशील क्षेत्रों में फ्लैग मार्च शामिल है। यह सारी कवायद एक ऐसे लोकतांत्रिक उत्सव के लिए की जा रही है जहाँ केवल जनमत की जीत हो।
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