हरिद्वार की लकड़ बस्ती में 12 फीट लंबे किंग कोबरा का रेस्क्यू: वन विभाग की टीम ने दिखाया साहस।
हरिद्वार शहर धार्मिक नगरी के रूप में जाना जाता है, जहां गंगा नदी के किनारे लाखों लोग रोजाना स्नान करने और पूजा-अर्चना करने आते हैं। लेकिन रविवार की सुबह यहां के कनखल क्षेत्र में स्थित
हरिद्वार शहर धार्मिक नगरी के रूप में जाना जाता है, जहां गंगा नदी के किनारे लाखों लोग रोजाना स्नान करने और पूजा-अर्चना करने आते हैं। लेकिन रविवार की सुबह यहां के कनखल क्षेत्र में स्थित बैरागी कैंप की लकड़ बस्ती में एक ऐसी घटना घटी, जिसने पूरे इलाके में दहशत फैला दी। सुबह के करीब दस बजे के आसपास स्थानीय निवासियों ने एक विशालकाय सांप को देखा, जो करीब 12 फीट लंबा था। यह सांप किंग कोबरा था, जो दुनिया के सबसे जहरीले और बड़े सांपों में से एक है। सांप को झाड़ियों और घरों के पास रेंगते देख लोगों के होश उड़ गए। बच्चे रोने लगे, महिलाएं चीखने लगीं और पुरुष भागने की कोशिश करने लगे। इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोग एक-दूसरे को चेतावनी देने लगे।
लकड़ बस्ती हरिद्वार का एक पुराना रिहायशी इलाका है, जहां ज्यादातर मजदूर वर्ग के लोग रहते हैं। यहां के घर छोटे-छोटे बने हुए हैं और सड़कें संकरी हैं। गंगा नदी से सटा होने के कारण यह क्षेत्र प्राकृतिक रूप से हरा-भरा है, लेकिन इसी वजह से कभी-कभी जंगली जानवर या सरीसृप यहां पहुंच जाते हैं। रविवार को मौसम साफ था और लोग अपने दैनिक कामों में व्यस्त थे। कुछ महिलाएं घर के बाहर कपड़े सुखा रही थीं, तो कुछ बच्चे सड़क पर खेल रहे थे। तभी एक महिला ने झाड़ियों में कुछ हिलते हुए देखा। पास जाकर देखा तो सामने एक काला, चमकदार और लंबा सांप था। उसका फन फैला हुआ था और आंखें चमक रही थीं। महिला ने चीख मारी और पड़ोसियों को बुलाया। जल्द ही पूरी बस्ती इकट्ठी हो गई।
लोगों ने तुरंत मोबाइल फोन निकाले और वन विभाग को सूचना दी। हरिद्वार वन विभाग का हेल्पलाइन नंबर सभी के पास होता है, क्योंकि यह क्षेत्र राजाजी टाइगर रिजर्व से सटा हुआ है। सूचना मिलते ही वन विभाग की क्विक रिस्पॉन्स टीम (क्यूआरटी) को अलर्ट कर दिया गया। टीम में अनुभवी सर्प विशेषज्ञ शामिल थे, जिनमें 'स्नेक मैन' के नाम से मशहूर तालिब हुसैन प्रमुख थे। तालिब हरिद्वार और आसपास के जिलों में सैकड़ों सांपों के रेस्क्यू कर चुके हैं। वे बताते हैं कि किंग कोबरा को पकड़ना सबसे चुनौतीपूर्ण काम है, क्योंकि यह सांप बहुत तेज और आक्रामक होता है।
करीब पंद्रह मिनट बाद ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। टीम में चार सदस्य थे, जिनके पास लंबे हुक, जाल, विशेष बैग और सुरक्षात्मक कपड़े थे। सांप तब तक एक घर की दीवार के पास छिप गया था। स्थानीय लोगों ने टीम को घेरा बनाकर जगह खाली कर दी। तालिब ने सबसे पहले सांप की स्थिति का आकलन किया। उन्होंने बताया कि किंग कोबरा करीब 12 फीट लंबा था और उसका वजन लगभग 8 से 10 किलोग्राम रहा होगा। यह सांप जंगलों का राजा कहलाता है, क्योंकि यह अन्य सांपों को खाता है। लेकिन जब यह मानव बस्तियों में आ जाता है, तो खतरा बढ़ जाता है। टीम ने सावधानी से सांप के पास पहुंचना शुरू किया। सांप ने फन फैलाकर हमला करने की कोशिश की, जिससे टीम के सदस्यों के पसीने छूट गए।
रेस्क्यू ऑपरेशन करीब चालीस मिनट चला। तालिब ने एक लंबे हुक से सांप के सिर को नियंत्रित करने की कोशिश की। सांप बार-बार अपनी जगह बदल रहा था और झाड़ियों में घुसने की कोशिश कर रहा था। एक सदस्य ने जाल फेंका, लेकिन सांप तेजी से बच गया। तालिब ने अपनी सूझबूझ से सांप को थोड़ा सुन्न करने के लिए विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया। आखिरकार, उन्होंने सांप के सिर को पकड़ लिया और उसे एक मजबूत बैग में डाल दिया। पूरे ऑपरेशन का वीडियो स्थानीय लोगों ने रिकॉर्ड किया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में साफ दिख रहा है कि सांप कितना फुर्तीला था और टीम कितने सावधानी से काम कर रही थी।
रेस्क्यू के बाद स्थानीय लोगों ने वन विभाग की टीम का स्वागत किया। एक बुजुर्ग निवासी ने कहा कि अगर टीम न आती तो बड़ा हादसा हो जाता। बच्चे सांप के पास खेलते हैं और कोई काट लेता तो मुश्किल हो जाती। तालिब ने लोगों को सलाह दी कि सांप दिखने पर भागें नहीं, बल्कि विभाग को सूचना दें। उन्होंने बताया कि किंग कोबरा इंसानों पर हमला नहीं करता, जब तक उसे खतरा न महसूस हो। यह सांप शांत स्वभाव का होता है, लेकिन डरने पर जहरीला हो जाता है। इसका जहर न्यूरोटॉक्सिक होता है, जो तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। एक काटने से इंसान को कुछ ही मिनटों में लकवा मार सकता है।
वन विभाग ने सांप को बैग में बंद करके राजाजी टाइगर रिजर्व के गहरे जंगलों में छोड़ दिया। यह रिजर्व हरिद्वार से सटा हुआ है और यहां किंग कोबरा का प्राकृतिक आवास है। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मानसून के बाद सांप बस्तियों में आने लगते हैं, क्योंकि जंगल में पानी भर जाता है। इस साल उत्तराखंड में किंग कोबरा की कई साइटिंग्स हुई हैं। अप्रैल में ही विल्वकेश्वर कॉलोनी में 15 फीट लंबा किंग कोबरा मिला था, जिसे तीन घंटे की मशक्कत के बाद पकड़ा गया। इसी तरह, अगस्त में देहरादून के भाऊवाला में 14 फीट का सांप रेस्क्यू हुआ। ये घटनाएं बताती हैं कि जलवायु परिवर्तन और जंगलों की कटाई से वन्यजीव बस्तियों की ओर बढ़ रहे हैं।
किंग कोबरा के बारे में थोड़ा जानना जरूरी है। यह दुनिया का सबसे लंबा जहरीला सांप है, जिसकी लंबाई 18 फीट तक हो सकती है। भारत में यह उत्तराखंड, असम और कर्नाटक जैसे राज्यों में पाया जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम ओफियोफेगस हैनाह है, जिसका मतलब सांप खाने वाला है। यह अन्य सांपों, छिपकलियों और छोटे स्तनधारियों को खाता है। मादा किंग कोबरा घोंसला बनाती है, जो सांपों की दुनिया में अनोखा है। लेकिन शिकार, जहर के व्यापार और आवास के नुकसान से इसकी संख्या घट रही है। भारत सरकार ने इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत शेड्यूल IV में रखा है।
हरिद्वार जैसे शहरों में ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं। गंगा घाटों पर स्नान करने वाले लोग अक्सर सांपों से अनजान हो जाते हैं। वन विभाग ने जागरूकता अभियान चलाया है, जिसमें स्कूलों और कॉलोनियों में सांपों की पहचान और बचाव के तरीके सिखाए जाते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि सांप को मारना गलत है, क्योंकि यह पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह अन्य जहरीले सांपों को नियंत्रित रखता है। इस घटना के बाद लकड़ बस्ती के निवासियों में थोड़ी सतर्कता आ गई है। वे अब घरों के आसपास सफाई रखने और झाड़ियों को काटने की योजना बना रहे हैं।
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