झुंझुनूं में पुलिस की बर्बरता: एएसआई ने दुकानदार को डंडों से पीटा, वायरल हुआ CCTV वीडियो
राजस्थान के झुंझुनूं में पुलिस की बर्बरता का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल। एएसआई ने दुकानदार को डंडों से पीटा, लाइन हाजिर और CCTV में पूरी घटना कैद। जानें पूरी घटना यहाँ।
राजस्थान के झुंझुनूं जिले में पुलिस की गुंडागर्दी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने लोगों में गुस्सा और नाराजगी पैदा कर दी है। झुंझुनूं रेलवे स्टेशन के बाहर एक दुकान पर तैनात असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (एएसआई) ओमप्रकाश ने दुकानदार नाहर सिंह पर बेरहमी से डंडों से हमला कर दिया। इस घटना का वीडियो दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया और अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि एएसआई बिना कोई सवाल-जवाब किए दुकानदार पर लाठियां बरसाता रहा, जबकि नाहर सिंह खुद को बचाने की कोशिश करता रहा।
इस घटना ने पुलिस की कार्यशैली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। झुंझुनूं के पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने मामले का संज्ञान लिया है और आरोपी एएसआई को लाइन हाजिर कर दिया है। घटना झुंझुनूं के कोतवाली थाना क्षेत्र में रेलवे स्टेशन के बाहर रात करीब 1 बजे की है। नाहर सिंह, जो सैनिक नगर के निवासी हैं, रेलवे स्टेशन के पास ‘प्रणव फूड’ नाम से खाने-पीने की दुकान चलाते हैं। वीडियो के अनुसार, दो युवक उनकी दुकान पर मोबाइल चार्ज करने आए थे। नाहर सिंह ने पहले उन्हें चार्ज करने की अनुमति दी, लेकिन बाद में मना कर दिया। इस बात पर दोनों युवकों के साथ उनकी थोड़ी कहासुनी हो गई। युवक बाहर चले गए और उसी समय वहां से गुजर रही पुलिस की पेट्रोलिंग गाड़ी को रोककर झूठी शिकायत की कि नाहर सिंह ने उनके साथ मारपीट की। इसके बाद एएसआई ओमप्रकाश, जो कोतवाली थाने में तैनात हैं, गाड़ी से उतरे और बिना कोई पूछताछ किए नाहर सिंह की दुकान में घुसकर उन पर डंडों से हमला कर दिया।
सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि एएसआई ओमप्रकाश करीब पांच मिनट तक नाहर सिंह पर डंडे बरसाता रहा। आरोप है कि उन्होंने 50 से ज्यादा बार लाठियां मारीं। नाहर सिंह ने खुद को बचाने के लिए दुकान में रखी कुर्सी और स्टूल का सहारा लिया, लेकिन लाठियों के वार से कुर्सी टूट गई। वीडियो में ओमप्रकाश गालियां देते और चिल्लाते हुए नजर आ रहे हैं, जबकि नाहर सिंह बार-बार सफाई देने की कोशिश कर रहे हैं। दुकान के बाहर मौजूद कुछ पुलिसकर्मी और स्थानीय लोग इस घटना को देखते रहे, लेकिन कोई भी बीच-बचाव करने नहीं आया। नाहर सिंह ने बाद में बताया कि ओमप्रकाश उस समय नशे में थे और उनकी बात सुनने को तैयार नहीं थे। मारपीट के बाद ओमप्रकाश ने नाहर सिंह को जबरन पुलिस वैन में बिठाकर थाने ले गए। नाहर सिंह का आरोप है कि उन्हें दुकान बंद करने का मौका तक नहीं दिया गया। थाने में उन्हें रात भर हिरासत में रखा गया और अगले दिन शांति भंग करने के आरोप में धारा 151 के तहत चालान कर छोड़ दिया गया। नाहर सिंह ने बताया कि डर और पुलिस के दबाव के कारण उन्होंने उस समय कोई शिकायत दर्ज नहीं की। लेकिन जब सीसीटीवी फुटेज और कुछ लोगों द्वारा बनाए गए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, तब यह मामला पुलिस के उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आया।
झुंझुनूं के एसपी बृजेश ज्योति उपाध्याय ने वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए तुरंत कार्रवाई की। उन्होंने ओमप्रकाश को लाइन हाजिर कर दिया और मामले की जांच शुरू कर दी। एसपी ने कहा कि वीडियो के आधार पर दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने नाहर सिंह का बयान दर्ज किया है और उनकी मेडिकल जांच कराई गई, जिसमें उनके शरीर पर कई जगह चोट के निशान पाए गए। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों की गहन जांच कर रही है। यह घटना राजस्थान में पुलिस की बर्बरता का एक और उदाहरण है। इससे पहले कोटा में भी एक ऐसी ही घटना सामने आई थी, जहां स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) पुष्पेंद्र बंसीवाल ने दुकानदार रिजवान को इतनी जोर से थप्पड़ मारा था कि वह सड़क पर बेहोश होकर गिर पड़ा। उस घटना का वीडियो भी वायरल हुआ था और लोगों में गुस्सा पैदा हुआ था। रिजवान ने बताया था कि उसने हाल ही में कान की सर्जरी कराई थी, लेकिन पुलिस ने उसकी स्थिति को नजरअंदाज कर मारपीट की।
सोशल मीडिया पर इस घटना ने लोगों में गुस्सा और नाराजगी पैदा की है। कई यूजर्स ने पुलिस की इस हरकत को शर्मनाक और अमानवीय बताया। एक यूजर ने एक्स पर लिखा, “पुलिस का काम लोगों की रक्षा करना है, न कि उन्हें पीटना। यह शर्मनाक है कि एक दुकानदार को सिर्फ मोबाइल चार्जिंग के विवाद में इतनी बेरहमी से पीटा गया।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “ऐसे पुलिसकर्मियों को तुरंत निलंबित करना चाहिए। यह कानून का नहीं, बल्कि गुंडागर्दी का मामला है।” कुछ लोगों ने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। यह घटना समाज में कई गंभीर सवाल खड़े करती है। पहला, क्या पुलिसकर्मी अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर रहे हैं? दूसरा, क्या आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानून का पालन स्वयं पुलिस कर रही है? तीसरा, क्या ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस प्रशिक्षण और जवाबदेही में सुधार की जरूरत है? नाहर सिंह की पिटाई का मामला न केवल पुलिस की बर्बरता को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि छोटी-छोटी बातों पर पुलिसकर्मी किस तरह हिंसक हो सकते हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि झुंझुनूं रेलवे स्टेशन के बाहर का इलाका रात में व्यस्त रहता है और वहां अक्सर छोटे-मोटे विवाद होते रहते हैं। लेकिन पुलिस का इस तरह बिना जांच-पड़ताल के हिंसक रवैया अपनाना निंदनीय है। सामाजिक कार्यकर्ता रमेश शर्मा, जो झुंझुनूं में सामुदायिक सुधार के लिए काम करते हैं, ने कहा, “पुलिस का काम कानून लागू करना है, न कि खुद कानून तोड़ना। इस तरह की घटनाएं लोगों का पुलिस पर भरोसा कम करती हैं।”
राजस्थान में पुलिस की बर्बरता के कई मामले हाल के महीनों में सामने आए हैं। उदाहरण के लिए, अलवर में एक पुलिसकर्मी ने भ्रष्टाचार की शिकायत करने वाले व्यक्ति को बेरहमी से पीटा था, जिसका वीडियो भी वायरल हुआ था। इसी तरह, आगरा में एक पुलिस इंस्पेक्टर ने दुकानदार को बार-बार थप्पड़ मारे, जिसे सीसीटीवी में रिकॉर्ड किया गया था। इन घटनाओं से साफ है कि पुलिस की कार्यशैली में सुधार की सख्त जरूरत है। नाहर सिंह ने पुलिस को दिए अपने बयान में कहा कि इस घटना ने उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से तोड़ दिया है। उन्होंने बताया कि उनकी दुकान उनका परिवार चलाने का एकमात्र जरिया है, और इस घटना के बाद वह डर के साए में जी रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि ओमप्रकाश के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और उन्हें न्याय मिले।
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