करोड़ों के आभूषण व्यवसाय को पीछे छोड़ श्रम के सम्मान की अनूठी मिसाल पेश करने आगे आए स्वर्ण व्यवसायी, छोटी सी चाय-पकौड़े की दुकान शुरू कर सबको चौंकाया।
देश के भीतर आर्थिक स्वावलंबन, कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने और जमीनी स्तर पर रोजगार के नए रास्ते तलाशने के लिए
- आत्मनिर्भर भारत और स्थानीय रोजगार से प्रेरित होकर रोहतास में चेंबर अध्यक्ष ने उठाया अभूतपूर्व कदम, अपनी ही प्रसिद्ध स्वर्ण दुकान की जगह खोला नया उद्यम
- पाली रोड पर आयोजित भव्य उद्घाटन समारोह में उमड़ी स्थानीय समाज और व्यापारिक संगठनों की भारी भीड़, आत्मनिर्भरता के इस नए संदेश का चौतरफा स्वागत
देश के भीतर आर्थिक स्वावलंबन, कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने और जमीनी स्तर पर रोजगार के नए रास्ते तलाशने के लिए चलाए जा रहे राष्ट्रीय अभियानों का व्यावहारिक असर अब छोटे शहरों और कस्बों में गहराई से दिखने लगा है। इसी प्रेरणा के तहत बिहार के रोहतास जिले से एक बेहद ही अनोखा और अनुकरणीय मामला सामने आया है जिसने पूरे प्रदेश के व्यापारिक और सामाजिक हलकों में एक नई बहस छेड़ दी है। रोहतास जिला चेंबर ऑफ कॉमर्स के वर्तमान जिलाध्यक्ष और एक बेहद ही प्रतिष्ठित स्वर्ण व्यवसायी ने राष्ट्र निर्माण और आत्मनिर्भरता के संकल्प को व्यक्तिगत स्तर पर उतारने का फैसला किया है। उन्होंने समाज की इस रूढ़िवादी सोच को बदलने के लिए एक बहुत बड़ा साहसिक कदम उठाया है कि केवल बड़े और चमकीले व्यवसाय ही सम्मान के पात्र हैं। उनका यह कदम इस बात का प्रमाण है कि जब देश का एक बड़ा नेतृत्व जमीनी बदलाव की बात करता है, तो समाज के प्रबुद्ध वर्ग किस तरह अपनी सुख-सुविधाओं को छोड़कर बदलाव के वाहक बनने के लिए तैयार हो जाते हैं।
इस अनूठी और प्रेरक पहल के तहत रोहतास जिले के बेहद व्यस्त और प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र पाली रोड पर स्थित 'श्री लक्ष्मी ज्वैलर्स' नाम के एक नामचीन प्रतिष्ठान को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। वर्षों से सोने और चांदी के आभूषणों की चमक से सराबोर रहने वाले इस बड़े शोरूम की जगह पर अब एक बेहद ही सादगी से भरी हुई चाय और पकौड़े की दुकान की शुरुआत की गई है। इस आभूषण दुकान के संचालक कोई और नहीं बल्कि स्वयं चेंबर ऑफ कॉमर्स के जिलाध्यक्ष सच्चिदानंद प्रसाद हैं, जिन्होंने पूरी तरह से अपनी स्वेच्छा और गहरे विचार-विमर्श के बाद इस परिवर्तन को स्वीकार किया है। एक ऐसा व्यक्ति जो कल तक समाज में सोने-चांदी के बड़े लेन-देन के लिए जाना जाता था और जिसके पास शहर के शीर्ष व्यापारियों का नेतृत्व था, उसका इस तरह से एक छोटे और पारंपरिक खाद्य स्टॉल पर बैठने का निर्णय लेना किसी बड़े सामाजिक आंदोलन से कम नहीं है।
शनिवार की शाम को पाली रोड पर स्थित इस नव-स्थापित दुकान के परिसर में एक बेहद ही गरिमामय और भव्य उद्घाटन समारोह का आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर पूरे शहर से विभिन्न व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारी, छोटे-बड़े दुकानदार, सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिकों की भारी भीड़ इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए एकत्रित हुई। नई दुकान की शुरुआत पूरी तरह से सामाजिक सौहार्द और सादगी के माहौल में की गई, जिसका उद्घाटन मुख्य अतिथि शशि कुमारी और क्षेत्र के प्रमुख राजनीतिक व सामाजिक व्यक्तित्व गुड्डू चंद्रवंशी द्वारा संयुक्त रूप से फीता काटकर संपन्न हुआ। इस समारोह में शामिल हर व्यक्ति के चेहरे पर अचरज के साथ-साथ एक बेहद गहरा सम्मान भाव भी था, क्योंकि उन्होंने कभी इस बात की कल्पना भी नहीं की थी कि कोई व्यक्ति इतने बड़े और आकर्षक व्यवसाय को छोड़कर इस तरह के जमीनी कार्य को अपना मुख्य पेशा बना सकता है।
समारोह के दौरान रोहतास जिला चेंबर ऑफ कॉमर्स से जुड़े कई वरिष्ठ पदाधिकारियों और स्थानीय उद्योगपतियों ने इस ऐतिहासिक कदम की सराहना करते हुए इसे श्रम के वास्तविक सम्मान से जोड़ा। वहां उपस्थित बुद्धिजीवियों ने विचार व्यक्त किया कि भारतीय समाज में अक्सर काम के आधार पर लोगों की सामाजिक प्रतिष्ठा तय की जाती है, जो कि देश के समग्र विकास के मार्ग में एक बहुत बड़ी बाधा है। जब तक हर नागरिक के मन में छोटे से छोटे और शारीरिक श्रम वाले कार्यों के प्रति आदर का भाव पैदा नहीं होगा, तब तक एक पूर्ण आत्मनिर्भर समाज की स्थापना का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। इस लिहाज से चेंबर अध्यक्ष का यह त्याग और नया प्रयास रोहतास जिले की अद्भुत एकता, सादगी और समृद्ध श्रम संस्कृति का एक नया और जीवंत प्रतीक बनकर उभरा है जो आने वाली पीढ़ियों को भी कर्मठ बनने की राह दिखाएगा।
इस अभूतपूर्व बदलाव को लेकर जब आंतरिक भावनाओं और उद्देश्यों को टटोलने का प्रयास किया गया, तो यह बात पूरी तरह साफ हो गई कि यह महज एक दुकान के बंद होने और दूसरी दुकान के शुरू होने का साधारण व्यावसायिक मामला नहीं है। इसके पीछे समाज की सोच को एक नई दिशा देने और युवा पीढ़ी को रोजगार के प्रति जागरूक करने का एक बहुत बड़ा वैचारिक प्रयास छिपा हुआ है। आज के समय में जब देश के युवा रोजगार की तलाश में बड़े शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं या छोटे कामों को करने में हिचकिचाहट महसूस करते हैं, तब एक सफल और स्थापित स्वर्ण व्यवसायी का यह कदम उन्हें यह सीख देता है कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता। जीवन में सफलता इस बात से तय नहीं होती कि आप किस धातु का व्यापार कर रहे हैं, बल्कि इस बात से तय होती है कि आप कितनी ईमानदारी, स्वाभिमान और मेहनत के साथ अपने काम को अंजाम दे रहे हैं।
आर्थिक और राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो आत्मनिर्भर भारत का महान और व्यापक सपना तभी वास्तविक धरातल पर साकार हो सकता है, जब देश का हर नागरिक और हर वर्ग हर प्रकार के कार्य को पूरी गरिमा और सम्मान की दृष्टि से देखना शुरू करेगा। इस नई पहल के माध्यम से यह संदेश पूरे समाज में प्रसारित करने का प्रयास किया गया है कि स्थानीय स्तर पर मिलने वाले छोटे-छोटे रोजगार ही देश की अर्थव्यवस्था की असली रीढ़ हैं। यदि लोग बड़ी-बड़ी डिग्रियों और पारंपरिक नौकरियों के पीछे भागने के बजाय अपनी जमीन पर रहकर छोटे-छोटे नए प्रयोग करेंगे और श्रम संस्कृति को बढ़ावा देंगे, तो देश के भीतर से बेरोजगारी की समस्या का पूरी तरह से अंत हो जाएगा। यही वजह है कि इस छोटे से चाय-पकौड़े के स्टॉल को अब एक बड़े वैचारिक आंदोलन के केंद्र के रूप में देखा जा रहा है।
What's Your Reaction?





