कौशांबी में प्रकृति का भयंकर तांडव: भीषण आंधी-तूफान और बारिश के कारण ढहे मकान, मलबे में दबने से चार लोगों की दर्दनाक मौत।

उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में देर रात आए अचानक और भयंकर आंधी-तूफान के साथ हुई मूसलाधार बारिश ने पूरे क्षेत्र में भारी तबाही

May 29, 2026 - 11:35
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कौशांबी में प्रकृति का भयंकर तांडव: भीषण आंधी-तूफान और बारिश के कारण ढहे मकान, मलबे में दबने से चार लोगों की दर्दनाक मौत।
कौशांबी में प्रकृति का भयंकर तांडव: भीषण आंधी-तूफान और बारिश के कारण ढहे मकान, मलबे में दबने से चार लोगों की दर्दनाक मौत।
  • कच्चे मकान पर विशालकाय नीम का पेड़ गिरने से एक ही परिवार के तीन मासूम सदस्यों ने गंवाई जान, पूरे गांव में पसरा मातम
  • उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में बेमौसम आफत की बारिश ने मचाई भारी तबाही, टीन शेड गिरने की एक अन्य घटना में भी एक की मौत

उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में देर रात आए अचानक और भयंकर आंधी-तूफान के साथ हुई मूसलाधार बारिश ने पूरे क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा के चलते जिले के अलग-अलग ग्रामीण इलाकों में कई बड़े हादसे सामने आए हैं। सबसे दर्दनाक घटना में दो अलग-अलग स्थानों पर कच्चे मकानों और टीन शेड के धराशायी होने के कारण कुल चार लोगों की मलबे में दबकर असमय और अत्यंत दुखद मौत हो गई। प्रकृति के इस रौद्र रूप के कारण जिले की विद्युत व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है और सैकड़ों पेड़ उखड़कर सड़कों पर गिर गए हैं, जिससे यातायात और सामान्य जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। देर रात अचानक आई इस प्राकृतिक आफत ने सोते हुए मासूम लोगों को संभलने तक का कोई मौका नहीं दिया।

जिले के एक सुदूर ग्रामीण इलाके में घटित हुई पहली और सबसे बड़ी हृदय विदारक घटना ने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं। यहां एक गरीब परिवार मिट्टी और खपरैल से बने अपने कच्चे मकान के भीतर गहरी नींद में सोया हुआ था, तभी अचानक आधी रात के बाद मौसम का मिजाज बदला और करीब अस्सी से नब्बे किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने लगीं। आंधी की तीव्रता इतनी अधिक थी कि घर के ठीक बगल में स्थित एक अत्यंत प्राचीन और विशालकाय नीम का पेड़ जड़ से उखड़कर सीधे उस कच्चे मकान की छत पर जा गिरा। भारी भरकम पेड़ के वजन को मिट्टी की दीवारें बर्दाश्त नहीं कर सकीं और पूरा मकान ताश के पत्तों की तरह ढह गया, जिसके मलबे में एक ही परिवार के तीन सदस्य जिंदा दफन हो गए।

घटना के वक्त आसपास के घरों में सो रहे ग्रामीण तेज धमाके और चीख-पुकार की आवाज सुनकर तुरंत अपने घरों से बाहर निकले। घने अंधेरे और लगातार हो रही तेज बारिश के बीच ग्रामीणों ने अपनी जान जोखिम में डालकर मलबे को हटाने और दबे हुए लोगों को बाहर निकालने का रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद जब तक तीनों को मलबे और पेड़ की भारी टहनियों के नीचे से निकाला गया, तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं। इस दर्दनाक हादसे में माता-पिता और उनके मासूम बच्चे समेत तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो जाने से पूरे गांव में कोहराम मच गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन, राजस्व विभाग की टीमें और स्थानीय पुलिस बल तुरंत मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने घटनास्थल का जायजा लिया और स्थानीय निवासियों की मदद से शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेजा। प्रशासन ने पीड़ित परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए दैवीय आपदा कोष के तहत दी जाने वाली उचित सरकारी आर्थिक सहायता राशि को जल्द से जल्द स्वीकृत करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

वहीं जिले के दूसरे छोर पर स्थित एक अन्य गांव में भी इसी आंधी-तूफान के कारण एक और गंभीर हादसा घटित हुआ। यहां एक स्थानीय निवासी अपने पालतू पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और आंधी से बचने के लिए अपने घर के बाहर बने एक लोहे और सीमेंट के टीन शेड के नीचे रुका हुआ था। इसी दौरान हवा के एक बेहद तेज झोंके ने उस भारी-भरकम टीन शेड और उसे सहारा देने वाली कमजोर दीवारों को उखाड़ दिया। टीन शेड सीधे वहां खड़े व्यक्ति के ऊपर आ गिरा और उसके धारदार लोहे के हिस्सों तथा मलबे की चोट के कारण वह गंभीर रूप से घायल हो गया। अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया, जिससे इस आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर चार हो गई।

इस भीषण आंधी और बारिश के कारण केवल इंसानी जानों का ही नुकसान नहीं हुआ है, बल्कि जिले के किसानों को भी भारी आर्थिक चोट पहुंची है। खेतों में खड़ी और कटाई के बाद रखी फसलें इस बेमौसम बारिश और तेज हवाओं के कारण पूरी तरह से नष्ट हो गई हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली के खंभे और ट्रांसफार्मर उखड़ जाने के कारण दर्जनों गांवों की बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है, जिसे बहाल करने के लिए बिजली विभाग के कर्मचारी युद्धस्तर पर काम कर रहे हैं। सड़कों पर बड़े-बड़े पेड़ गिरने के कारण कई मुख्य मार्ग बंद हो गए थे, जिन्हें हटाने के लिए प्रशासन को जेसीबी मशीनों का सहारा लेना पड़ा है।

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