पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के ठिकानों पर ED का बड़ा छापा, केरल की राजनीति में आया जबरदस्त भूचाल।

केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के वरिष्ठ पोलित ब्यूरो सदस्य पिनाराई विजयन के ठिकानों

May 27, 2026 - 11:38
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पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के ठिकानों पर ED का बड़ा छापा, केरल की राजनीति में आया जबरदस्त भूचाल।
पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के ठिकानों पर ED का बड़ा छापा, केरल की राजनीति में आया जबरदस्त भूचाल।
  • मासिक भुगतान और धनशोधन के गंभीर आरोपों के घेरे में आई बेटी वीना की आईटी कंपनी, केंद्रीय एजेंसी ने 10 से अधिक जगहों पर की कार्रवाई
  • उच्च न्यायालय से हरी झंडी मिलते ही सुबह ६ बजे शुरू हुई छापेमारी, विपक्ष ने उठाए कारपोरेट सुशासन पर सवाल तो सत्ता पक्ष ने बताया राजनीतिक प्रतिशोध

केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के वरिष्ठ पोलित ब्यूरो सदस्य पिनाराई विजयन के ठिकानों पर केंद्रीय जांच एजेंसी ED यानी ईडी ने एक बहुत बड़ी छापेमारी की कार्रवाई की है। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी पीएमएलए के कड़े वैधानिक प्रावधानों के तहत शुरू हुई इस कार्रवाई के बाद से दक्षिण भारत और विशेष रूप से केरल की राज्य राजनीति में भारी हलचल देखी जा रही है। जांच दल की अलग-अलग टीमें बुधवार सुबह लगभग ६ बजे ही पूर्व मुख्यमंत्री के तिरुवनंतपुरम स्थित किराए के आवास, कन्नूर स्थित पैतृक घर और उनके करीबियों के परिसरों पर एक साथ पहुंच गईं। यह पूरी कार्रवाई कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड नामक एक निजी खनन कंपनी और पूर्व मुख्यमंत्री की बेटी टी वीना की आईटी कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस के बीच हुए संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की जांच से जुड़ी हुई है।

इस हाई-प्रोफाइल छापेमारी की पृष्ठभूमि पर गौर करें तो यह पूरा मामला पिछले कुछ वर्षों से चर्चा में बने मासिक भुगतान विवाद से जुड़ा हुआ है। केंद्रीय जांच एजेंसी को प्राथमिक जांच में ऐसे पुख्ता इनपुट मिले थे कि निजी खनन कंपनी सीएमआरएल ने वर्ष 2017 से 2020 के बीच पूर्व मुख्यमंत्री की बेटी टी वीना की फर्म को करीब 1.72 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। इस भुगतान को खातों में आईटी और मार्केटिंग कंसल्टेंसी सेवाओं के बदले दी गई फीस के रूप में दिखाया गया था, लेकिन जांच एजेंसियों का दावा है कि वास्तव में इस आईटी कंपनी द्वारा निजी फर्म को ऐसी कोई भी व्यावसायिक सेवा प्रदान नहीं की गई थी। इस बिना सेवा के किए गए भारी-भरकम भुगतान को वित्तीय अनियमितता और धनशोधन का एक बड़ा संदिग्ध मामला मानते हुए ईडी ने वर्ष 2024 में ही एक औपचारिक मुकदमा दर्ज कर अपनी तफ्तीश को आगे बढ़ाया था।

जांच एजेंसी की इस बड़ी कार्रवाई का रास्ता उस वक्त पूरी तरह साफ हुआ जब केरल उच्च न्यायालय ने इस मामले में दखल देने से पूरी तरह इनकार कर दिया। दरअसल, निजी कंपनी सीएमआरएल और उसके शीर्ष अधिकारियों ने उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दायर कर ईडी की इस पूरी जांच प्रक्रिया और समन को रद्द करने की गुहार लगाई थी। हालांकि, अदालत ने मंगलवार को इस याचिका पर अंतिम सुनवाई करते हुए इसे सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने अपने मौखिक और लिखित आदेश में स्पष्ट रूप से माना कि प्रथम दृष्टया इस पूरे लेन-देन में धनशोधन और कॉपोरेट वित्तीय हेरफेर के संकेत मिलते हैं, इसलिए केंद्रीय जांच एजेंसी को अपनी वैधानिक शक्तियों के तहत स्वतंत्र जांच करने से नहीं रोका जा सकता। इस अदालती फैसले के ठीक २४ घंटे के भीतर ही ईडी के अधिकारियों ने इन छापों को अंजाम दे दिया। यह पूरा मामला सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस यानी एसएफआईओ और आयकर विभाग की शुरुआती रिपोर्टों पर आधारित है, जिसमें कहा गया था कि एक प्रभावशाली राजनीतिक पद पर बैठे व्यक्ति से संबंध होने के कारण ही इस राशि का भुगतान किया गया था।

बुधवार सुबह शुरू हुई इस समन्वित कार्रवाई के दायरे में केवल पूर्व मुख्यमंत्री का घर ही नहीं आया, बल्कि उनके दामाद और पूर्व पीडब्ल्यूडी मंत्री पी ए मोहम्मद रियास का कोझिकोड स्थित आवास भी शामिल रहा। इसके साथ ही, अलुवा में स्थित खनन कंपनी सीएमआरएल के मुख्य कॉपोरेट कार्यालय और उसके प्रबंध निदेशक शशिधरन कर्था के निजी आवास पर भी केंद्रीय अधिकारियों के सुरक्षा घेरे में तलाशी ली गई। जांच दल के अधिकारियों ने इन सभी परिसरों से कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य, लैपटॉप, हार्ड डिस्क, बैंक खातों के विवरण और डायरियों को अपने कब्जे में लिया है। अधिकारियों का मानना है कि इन जब्त किए गए दस्तावेजों की गहन स्क्रूटनी से इस बात का पता लगाने में मदद मिलेगी कि क्या इस राशि का इस्तेमाल किसी अन्य अवैध संपत्ति को खरीदने या विदेशी खातों में पैसे भेजने के लिए किया गया था।

इस व्यापक कार्रवाई के बीच ED के सूत्रों ने यह भी साफ किया है कि इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री की बेटी टी वीना से पहले ही शुरुआती दौर की पूछताछ की जा चुकी है और उनका आधिकारिक बयान भी दर्ज किया जा चुका है। हालांकि, जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है और नए दस्तावेज सामने आ रहे हैं, उसे देखते हुए आने वाले दिनों में उन्हें दोबारा समन जारी कर मुख्य कार्यालय में बुलाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, वित्तीय लेन-देन के समय राज्य के सर्वोच्च प्रशासनिक पद पर आसीन रहे पिनाराई विजयन से भी इस पूरे घटनाक्रम और कंपनी को दी गई कथित प्रशासनिक मंजूरियों के संबंध में पूछताछ करने और उनका बयान दर्ज करने की पूरी संभावना बनी हुई है, जिससे उनकी कानूनी मुश्किलें और अधिक बढ़ सकती हैं।

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