घर बैठे पांच मिनट में होगा ऑडियोमेट्री टेस्ट- एयरपॉड्स प्रो के जरिए कानों की संवेदनशीलता की जांच करना हुआ बेहद आसान, सीधे हेल्थ ऐप में सुरक्षित होगा डेटा
वैश्विक प्रौद्योगिकी दिग्गज Apple ने भारतीय उपभोक्ताओं के लिए प्रिवेंटिव हेल्थकेयर (संभावित स्वास्थ्य समस्याओं की
- रात के अंधेरे में सांसों की रुकावट को पकड़ेगा Apple वॉच का सेंसर- ब्रीदिंग डिस्टर्बेंस मीट्रिक और एडवांस एल्गोरिदम से गंभीर बीमारियों का खतरा होगा कम
वैश्विक प्रौद्योगिकी दिग्गज Apple ने भारतीय उपभोक्ताओं के लिए प्रिवेंटिव हेल्थकेयर (संभावित स्वास्थ्य समस्याओं की पहले से पहचान) के क्षेत्र में एक बहुत ही बड़ा और क्रांतिकारी कदम उठाया है। कंपनी ने आज से भारत में अपने लोकप्रिय स्मार्ट वियरेबल्स के लिए दो बेहद महत्वपूर्ण और क्लिनिकली मान्यता प्राप्त स्वास्थ्य फीचर्स को आधिकारिक तौर पर रोल आउट करना शुरू कर दिया है। इस नए तकनीकी अपडेट के बाद Apple वॉच और एयरपॉड्स प्रो धारक बिना किसी क्लिनिक या अस्पताल के चक्कर काटे, अपने घर के शांत माहौल में बैठकर ही अपनी सेहत से जुड़े दो गंभीर पहलुओं की बारीकी से निगरानी कर सकेंगे। कंपनी की इस नई कूटनीति और तकनीकी विस्तार का मुख्य उद्देश्य उन बीमारियों या शारीरिक विकारों का समय रहते पता लगाना है, जो आमतौर पर शुरुआती दिनों में पकड़ में नहीं आते और बाद में एक गंभीर क्रोनिक बीमारी का रूप ले लेते हैं। इस अपडेट के लाइव होते ही भारतीय डिजिटल हेल्थकेयर इकोसिस्टम में स्मार्ट वियरेबल्स की उपयोगिता एक बिल्कुल नए और प्रामाणिक स्तर पर पहुंच गई है।
इस बड़े तकनीकी बदलाव के तहत सबसे ज्यादा चर्चा एयरपॉड्स प्रो (सेकंड और थर्ड जनरेशन) में मिलने वाले क्लीनिकली वैलिडेटेड हियरिंग टेस्ट (श्रवण क्षमता जांच) फीचर की हो रही है, जो पूरी तरह से पारंपरिक प्योर-टोन ऑडियोमेट्री पद्धति पर आधारित है। इस आधुनिक फीचर के माध्यम से उपयोगकर्ता अपने आईफोन या आईपैड की मदद से केवल पांच मिनट के भीतर यह जान सकते हैं कि उनके दोनों कानों की सुनने की क्षमता किस स्तर पर है और क्या उन्हें किसी भी प्रकार के हियरिंग लॉस (बहरापन या कम सुनना) की शुरुआती शिकायत तो नहीं है। यह पूरी प्रक्रिया वैज्ञानिक रूप से इतनी सटीक बनाई गई है कि टेस्ट शुरू होने से पहले इयरबड्स खुद बैकग्राउंड वॉयस का विश्लेषण करते हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आसपास का माहौल टेस्ट के अनुकूल शांत है या नहीं। इसके साथ ही एक इयर टिप फिट टेस्ट भी रन किया जाता है जो कान के भीतर की कड़े एकॉस्टिक सील की जांच करता है, जिसके बाद ही आठ अलग-अलग फ्रीक्वेंसी (250 हर्ट्ज से 8,000 हर्ट्ज) पर आवाज की तरंगें छोड़कर उपयोगकर्ता की प्रतिक्रिया दर्ज की जाती है।
क्लीनिकली वैलिडेटेड टेस्टिंग और डेटा प्राइवेसी
Apple द्वारा कराए गए एक व्यापक शोध के दौरान इस इन-बिल्ट हियरिंग टेस्ट के परिणामों की तुलना जब पारंपरिक गोल्ड-स्टैंडर्ड क्लिनिकल ऑडियोमेट्री से की गई, तो दोनों के नतीजों में महज 2 डेसिबल हियरिंग लेवल (dBHL) का बेहद मामूली अंतर पाया गया। इसके साथ ही, सुरक्षा कूटनीति के तहत इस टेस्ट से जुड़ा सारा संवेदनशील मेडिकल डेटा पूरी तरह से ऑन-डिवाइस प्रोसेस होता है और हेल्थ ऐप के भीतर एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड रहता है।
हियरिंग टेस्ट के पूरा होते ही उपयोगकर्ता के आईफोन की स्क्रीन पर एक बेहद विस्तृत और आसानी से समझ में आने वाला रिपोर्ट कार्ड या ऑडियोग्राम चार्ट उभर कर सामने आता है, जो दोनों कानों की सुनने की क्षमता को डेसिबल में मापता है। यह सिस्टम प्राप्त अंकों के आधार पर सुनने की क्षमता को सामान्य, माइल्ड या मॉडरेट जैसी श्रेणियों में वर्गीकृत करता है और उसी के अनुसार व्यक्तिगत स्वास्थ्य सिफारिशें भी प्रदान करता है। इस रिपोर्ट को उपयोगकर्ता सीधे पीडीएफ फॉर्मेट में एक्सपोर्ट करके अपने ईएनटी विशेषज्ञ या डॉक्टर के साथ ईमेल या मैसेजिंग ऐप्स के जरिए साझा कर सकते हैं। हालांकि, कंपनी ने साफ किया है कि भारत में अभी केवल हियरिंग टेस्ट और हियरिंग स्क्रीनिंग की सुविधा ही लाइव की जा रही है, जबकि इसके साथ जुड़ी हियरिंग एड (श्रवण सहायता) कार्यप्रणाली को स्थानीय विनियामक मंजूरियों (रेगुलेटरी अप्रूवल) के अधीन होने के कारण आगामी चरणों में पेश किया जाएगा।
एयरपॉड्स के इस शानदार ऑडियो अपडेट के साथ ही Apple वॉच (सीरीज 9, अल्ट्रा 2 और एसई 3 या इसके बाद के मॉडल) के लिए बहुप्रतीक्षित स्लीप एप्निया (नींद के दौरान सांस रुकने की बीमारी) नोटिफिकेशन फीचर को भी भारत में आधिकारिक तौर पर सक्रिय कर दिया गया है। स्लीप एप्निया एक बेहद गंभीर और छिपी हुई बीमारी है जिसमें सोते समय व्यक्ति की सांस बार-बार कुछ सेकंड के लिए पूरी तरह रुक जाती है और उसे इसका अहसास तक नहीं होता, जिससे शरीर में ऑक्सीजन का स्तर गिर जाता है। कंपनी के वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, दुनिया भर में एक अरब से अधिक लोग इस विकार से पीड़ित हैं, जिनमें से लगभग अस्सी प्रतिशत मामलों का कभी निदान ही नहीं हो पाता। यदि इस स्थिति को लंबे समय तक बिना इलाज के छोड़ दिया जाए, तो यह आगे चलकर उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन), टाइप 2 डायबिटीज और दिल के दौरे (कार्डियक अरेस्ट) जैसी जानलेवा बीमारियों के खतरे को कई गुना बढ़ा देती है।
इस जानलेवा बीमारी की समय पर पहचान करने के लिए Apple वॉच में मौजूद अत्यधिक संवेदनशील एक्सेलेरोमीटर सेंसर का उपयोग किया जाता है, जो नींद के दौरान कलाई की उन बेहद सूक्ष्म और बारीक हरकतों को पकड़ता है जो सामान्य श्वसन पैटर्न में आने वाली रुकावटों से जुड़ी होती हैं। इस डेटा का विश्लेषण करने के लिए एक बिल्कुल नया मीट्रिक 'ब्रीदिंग डिस्टर्बेंस' (श्वसन व्यवधान) पेश किया गया है, जो रात भर की सांसों के उतार-चढ़ाव को ट्रैक करता है। इस फीचर का लाभ उठाने के लिए उपयोगकर्ता को तीस दिनों की अवधि के भीतर कम से कम दस रातों तक घड़ी को पहनकर सोना अनिवार्य होता है। इसके बाद एडवांस्ड मशीन लर्निंग एल्गोरिदम पिछले तीस दिनों के ट्रेंड का विश्लेषण करता है और यदि इस दौरान लगातार मध्यम से गंभीर स्लीप एप्निया के लक्षण दिखाई देते हैं, तो घड़ी उपयोगकर्ता को एक कड़ा अलर्ट भेजकर तुरंत डॉक्टर से परामर्श करने की सलाह देती है।
उपयोगकर्ता अपने हेल्थ ऐप के भीतर जाकर अपनी हर रात के ब्रीदिंग डिस्टर्बेंस डेटा को एक महीने, छह महीने या एक वर्ष के चार्ट के रूप में देख सकते हैं, जिससे उन्हें अपनी स्लीप हाइजीन और शारीरिक स्थिति का एक स्पष्ट खाका मिल जाता है। इस ऐप में स्लीप एप्निया से जुड़ी तमाम जरूरी शैक्षिक सामग्रियां और डॉक्टर से बात करने के लिए जरूरी टिप्स भी शामिल किए गए हैं। वॉच से मिलने वाली तीन महीने की पूरी ब्रीदिंग रिपोर्ट को एक विस्तृत पीडीएफ फाइल के रूप में डाउनलोड किया जा सकता है, जो डॉक्टरों के लिए प्रारंभिक जांच और आगे के इलाज की दिशा तय करने में एक बेहद प्रामाणिक और मददगार दस्तावेज साबित होती है। इस तरह के फीचर्स का आना यह साफ बयां करता है कि कैसे उपभोक्ता तकनीक अब केवल मनोरंजन या उत्पादकता तक सीमित न रहकर सीधे तौर पर जीवन रक्षक उपकरणों की भूमिका में आ रही है।
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