केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का सीमा सुरक्षा बल को बड़ा निर्देश, अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा के साथ 50 किलोमीटर के दायरे की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा।
भारत की आंतरिक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की संप्रभुता को अक्षुण्ण बनाए रखने की दिशा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह
- घुसपैठ, तस्करी और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों पर पूरी तरह नकेल कसने की तैयारी, सीमावर्ती जिलों के स्थानीय प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय पर जोर
- अत्याधुनिक तकनीक और अभेद्य सुरक्षा चक्र से सुरक्षित होंगी देश की सरहदें, सीमा सुरक्षा बल के पराक्रम और शौर्य को गृह मंत्री ने किया नमन
भारत की आंतरिक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की संप्रभुता को अक्षुण्ण बनाए रखने की दिशा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी रणनीतिक निर्देश जारी किया है। सीमा सुरक्षा बल के एक विशेष आधिकारिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने बल के जवानों और अधिकारियों को एक नया और कड़ा सुरक्षा विजन प्रदान किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सीमा सुरक्षा बल की जिम्मेदारी केवल शून्य रेखा यानी अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर की रक्षा करने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सीमा से सटे भीतर के 50 किलोमीटर तक के पूरे भौगोलिक क्षेत्र की सुरक्षा और वहां कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखना भी उनकी प्राथमिक जवाबदेही का एक अनिवार्य हिस्सा है। इस रणनीतिक विजन का मुख्य उद्देश्य सीमा पार से होने वाली घुसपैठ, मादक पदार्थों और हथियारों की तस्करी के साथ-साथ देश की आंतरिक सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने वाली हर प्रकार की राष्ट्रविरोधी साजिश को शुरुआती स्तर पर ही पूरी तरह से कुचल देना है।
गृह मंत्री ने अपने संबोधन में सीमा सुरक्षा बल के गौरवशाली इतिहास, अदम्य साहस और देश के प्रति उनके सर्वोच्च बलिदान की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि जब सीमा सुरक्षा बल के जवान हाड़ कंपाने वाली ठंड, चिलचिलाती धूप और दुर्गम रेगिस्तानी या दलदली इलाकों में मुस्तैदी से तैनात रहते हैं, तभी देश के 130 करोड़ से अधिक नागरिक चैन की नींद सो पाते हैं। नए सुरक्षा ढांचे के तहत सीमा सुरक्षा बल को सीमावर्ती राज्यों के स्थानीय पुलिस प्रशासन, केंद्रीय खुफिया एजेंसियों और जिला कलेक्टरों के साथ एक बेहद मजबूत और जीवंत समन्वय तंत्र स्थापित करने का निर्देश दिया गया है। जब तक केंद्रीय सुरक्षा बल और स्थानीय पुलिस के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान और संयुक्त गश्त जैसी रणनीतियां 50 किलोमीटर के इस पूरे बेल्ट में प्रभावी ढंग से लागू नहीं होंगी, तब तक सीमा पार बैठे आकाओं के स्थानीय नेटवर्क और स्लीपर सेलों को पूरी तरह नेस्तनाबूत कर पाना संभव नहीं होगा।
सुरक्षा के इस नए 50 किलोमीटर के दायरे वाले नियम के रणनीतिक महत्व को समझाते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान दौर में सीमाओं पर चुनौतियां पहले की तुलना में कहीं अधिक जटिल और तकनीकी रूप से उन्नत हो चुकी हैं। अब केवल सीमा पर तारबंदी कर देने या गश्त बढ़ाने मात्र से घुसपैठ को पूरी तरह नहीं रोका जा सकता, क्योंकि राष्ट्रविरोधी तत्व ड्रोन तकनीक, भूमिगत सुरंगों और आधुनिक संचार माध्यमों का उपयोग करके सुरक्षा चक्र को भेदने का प्रयास करते हैं। ऐसे में यदि कोई संदिग्ध तत्व या अवैध खेप सीमा पार करके भारतीय क्षेत्र में प्रवेश कर भी जाती है, तो 50 किलोमीटर के इस सघन सुरक्षा और जांच घेरे के कारण उसे देश के आंतरिक हिस्सों तक पहुंचने से पहले ही दबोचा जा सकता है। यह व्यवस्था सीमावर्ती क्षेत्रों में एक अभेद्य सुरक्षा दीवार की तरह कार्य करेगी, जिससे अपराधियों के हौसले पूरी तरह पस्त हो जाएंगे। सरकार ने सीमा सुरक्षा बल के अधिकार क्षेत्र को सीमा से 50 किलोमीटर भीतर तक बढ़ाने का वैधानिक प्रावधान इसलिए किया है ताकि बल को तलाशी लेने, संदिग्धों को गिरफ्तार करने और अवैध सामग्री जब्त करने की त्वरित कानूनी शक्ति मिल सके।
देश की सीमाओं को पूरी तरह से आधुनिक और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार व्यापक स्तर पर बुनियादी ढांचे के विकास और अत्याधुनिक तकनीकों के समावेश पर काम कर रही है। गृह मंत्री ने बताया कि भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश सीमाओं पर 'एंटी-ड्रोन सिस्टम' की तैनाती बड़े पैमाने पर की जा रही है, जो दुश्मन के मानव रहित विमानों को हवा में ही जाम या नष्ट करने में पूरी तरह सक्षम है। इसके साथ ही, दुर्गम और नदीय क्षेत्रों में जहां भौतिक रूप से बाड़ लगाना संभव नहीं है, वहां 'स्मार्ट फेंसिंग' और 'विजुअल डेटा एनालिटिक्स' से लैस थर्मल सेंसर लगाए गए हैं। ये सेंसर किसी भी प्रकार की संदिग्ध हलचल की लाइव जानकारी तुरंत नजदीकी नियंत्रण कक्ष को भेज देते हैं, जिससे त्वरित प्रतिक्रिया टीमें कुछ ही मिनटों में मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाल लेती हैं।
सीमा सुरक्षा बल को दिए गए इस नए दायित्व के साथ ही गृह मंत्री ने सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय नागरिकों के विकास और उनके कल्याण को भी राष्ट्रीय सुरक्षा की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना है। उन्होंने कहा कि सीमा पर रहने वाले देश के नागरिक ही वास्तव में हमारी सुरक्षा की पहली पंक्ति हैं। यदि सीमावर्ती गांवों में बुनियादी सुविधाओं जैसे अच्छी सड़कें, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों की कमी होगी, तो वहां से पलायन बढ़ेगा, जो सामरिक दृष्टिकोण से देश के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है। सरकार 'वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम' के तहत इन सुदूरवर्ती गांवों का कायाकल्प कर रही है ताकि वहां के युवा मुख्यधारा से जुड़े रहें और सीमा सुरक्षा बल के साथ मिलकर देश विरोधी ताकतों के खिलाफ एक मजबूत आंख और कान की तरह काम कर सकें।
इस कड़े सुरक्षा संदेश के दूरगामी राजनीतिक और सामरिक निहितार्थ भी निकाले जा रहे हैं, विशेष रूप से उन पड़ोसी देशों के संदर्भ में जो भारत में अस्थिरता फैलाने के लिए लगातार छद्म युद्ध का सहारा लेते रहे हैं। गृह मंत्री का यह बयान इस बात का सीधा और स्पष्ट संकेत है कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता के मामलों में किसी भी प्रकार की ढील या तुष्टिकरण की नीति को बर्दाश्त नहीं करेगा। सीमा सुरक्षा बल को यह पूरी छूट दी गई है कि वे सीमा पार से होने वाली किसी भी उकसावे वाली कार्रवाई या गोलाबारी का जवाब अत्यंत आक्रामक और कड़े तरीके से दें ताकि दुश्मनों को उनकी कायराना हरकतों का भारी खामियाजा भुगतना पड़े। इस नए जोश और विजन से बल के जवानों का मनोबल एक नई ऊंचाई पर पहुंच गया है।
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