नासिक का बहुचर्चित TCS कांड- धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न नेटवर्क के खिलाफ पुलिस की बड़ी कार्रवाई, विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल।
महाराष्ट्र के नासिक शहर में स्थित एक प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय कंपनी के कार्यालय से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना
- कॉर्पोरेट जगत की आड़ में चल रहा था प्रताड़ना का खेल: विशेष जांच दल की पड़ताल में मुख्य आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत शामिल
- मुंबई नाका और देवलाली कैंप मामलों में कानूनी शिकंजा मजबूत: आरोपियों के डिजिटल दस्तावेज और व्हाट्सएप चैट्स से हुआ साजिश का पर्दाफाश
महाराष्ट्र के नासिक शहर में स्थित एक प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय कंपनी के कार्यालय से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना और जबरन धर्मांतरण के बेहद संवेदनशील मामले में पुलिस प्रशासन की ओर से अब तक की सबसे बड़ी कानूनी कार्रवाई देखने को मिली है। इस पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ होने के बाद गठित की गई विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मामले की गहनता से पड़ताल करते हुए अदालत के समक्ष विस्तृत और बेहद पुख्ता दस्तावेजों पर आधारित करीब पंद्रह सौ पन्नों का पहला दोषारोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल कर दिया है। कॉर्पोरेट जगत की आड़ में महिला कर्मचारियों को निशाना बनाने वाले इस गिरोह के खिलाफ दर्ज विभिन्न प्राथमिकताओं के आधार पर कानूनी शिकंजा कसना शुरू हो गया है। इस कार्रवाई ने औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा और वहां के आंतरिक माहौल को लेकर एक नई और गंभीर बहस को जन्म दे दिया है।
इस पूरे प्रकरण की शुरुआत तब हुई जब कंपनी के भीतर काम करने वाली कुछ पीड़ित महिला कर्मचारियों ने अपने वरिष्ठ सहयोगियों और सहकर्मियों पर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। महिलाओं का दावा था कि कार्यस्थल पर पहले उनसे दोस्ती की गई और जब उनका भरोसा जीत लिया गया, तो धीरे-धीरे उन पर विशेष धार्मिक रीति-रिवाजों को मानने और अपना धर्म परिवर्तन करने के लिए अत्यधिक मानसिक दबाव बनाया जाने लगा। जब पीड़ित महिलाओं ने इस बात का विरोध किया, तो उन्हें नौकरी से निकालने की धमकी दी जाने लगी और उनका गंभीर शारीरिक तथा यौन उत्पीड़न शुरू कर दिया गया। एक के बाद एक कई महिला कर्मचारियों के सामने आने के बाद देवलाली कैंप और मुंबई नाका पुलिस थानों में कुल मिलाकर नौ अलग-अलग मामले दर्ज किए गए थे, जिसके बाद इस पूरे रैकेट की कड़ियां आपस में जुड़ती चली गईं।
मामले की संवेदनशीलता और समाज पर पड़ने वाले इसके व्यापक असर को देखते हुए नासिक के पुलिस कमिश्नर ने तुरंत एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था, जिसका नेतृत्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को सौंपा गया। एसआईटी की जांच में यह बात पूरी तरह से साफ हो गई कि यह किसी एक व्यक्ति का तात्कालिक कृत्य नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक सोची-समझा और व्यवस्थित नेटवर्क काम कर रहा था। जांच एजेंसी ने देवलाली कैंप थाने में दर्ज सबसे पहले मामले में चार मुख्य आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में आरोप पत्र पेश किया है। इन आरोपियों में दानिश एजाज शेख, तौसीफ बिलाल अत्तार, मुख्य महिला आरोपी निदा एजाज खान और उन्हें शरण देने के आरोपी मतीन माजिद पटेल शामिल हैं। इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता की संगीन धाराओं के साथ-साथ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत भी कड़े मुकदमे दर्ज किए गए हैं। विशेष जांच दल ने अदालत के सामने जो दस्तावेज पेश किए हैं, उनमें पीड़िता का नाम बदलने के उद्देश्य से जबरन छीन लिए गए उसके मूल शैक्षणिक और व्यक्तिगत पहचान पत्र शामिल हैं। इसके अलावा आरोपियों के मोबाइल फोन से जब्त किए गए व्हाट्सएप चैट्स के स्क्रीनशॉट, ईमेल की लंबी कड़ियां और वित्तीय लेनदेन से जुड़े बैंक स्टेटमेंट्स को भी मुख्य साक्ष्य के तौर पर शामिल किया गया है, जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि महिलाओं को जाल में फंसाने के लिए किस तरह की योजना बनाई जा रही थी।
जांच अधिकारियों ने इस मामले को अदालत में बेहद मजबूत बनाए रखने के लिए कुल सत्रह महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज किए हैं। सबसे खास बात यह है कि ये सभी बयान प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की प्रासंगिक धाराओं के तहत दर्ज कराए गए हैं, जिनका कानूनी मूल्य अत्यंत उच्च होता है और मुकदमों की सुनवाई के दौरान गवाहों के अपने बयान से पलटने की गुंजाइश नहीं के बराबर रह जाती है। इसके साथ ही चार्जशीट में पीड़ितों और गिरफ्तार किए गए आरोपियों की विस्तृत मेडिकल जांच रिपोर्ट, घटनास्थल का पंचनामा और आरोपियों की पहचान परेड से जुड़े अहम साक्ष्यों को भी नत्थी किया गया है। पुलिस का कहना है कि ये सभी वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्य आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए पर्याप्त हैं।
इस मामले में मुख्य महिला आरोपी निदा खान की गिरफ्तारी को पुलिस प्रशासन एक बड़ी कामयाबी मान रहा है, क्योंकि वह प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से ही लगातार फरार चल रही थी और अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए अलग-अलग शहरों में ठिकाने बदल रही थी। पुलिस की कई टीमों ने तकनीकी सर्विलांस और खुफिया सूचनाओं के आधार पर उसे छत्रपति संभाजीनगर से गिरफ्तार किया था, जहां उसे एक स्थानीय राजनीतिक दल के कॉरपोरेटर मतीन पटेल ने अपने घर में पनाह दे रखी थी। पुलिस ने मतीन पटेल को भी अपराधियों को संरक्षण देने और सबूतों को छिपाने के आरोप में सह-आरोपी बनाया है। वर्तमान में इस मामले के तहत गिरफ्तार किए गए सभी आठ आरोपी न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं और अदालत ने उनकी जमानत याचिकाओं को सिरे से खारिज कर दिया है।
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