बिजनौर में अवैध क्लिनिक संचालन के आरोप में मुजफ्फरनगर के सीएमओ डॉ. सुनील तेवतिया पकड़े गए, छापेमारी के दौरान टॉयलेट में छिपने की कोशिश।
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के चांदपुर क्षेत्र में रविवार को एक ऐसी घटना घटी जिसने स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया। मुजफ्फरनगर के
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के चांदपुर क्षेत्र में रविवार को एक ऐसी घटना घटी जिसने स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया। मुजफ्फरनगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील तेवतिया को उनकी पत्नी के संचालित निजी नर्सिंग होम में अवैध रूप से प्रैक्टिस करते हुए पकड़ा गया। राज्य महिला आयोग की सदस्य संगीता जैन के नेतृत्व में पुलिस टीम ने अचानक छापा मारा तो डॉ. तेवतिया घबरा गए और खुद को अटैच्ड टॉयलेट में बंद कर लिया। लगभग 15 मिनट तक चले इस ड्रामे के बाद पुलिस की धमकी पर वे बाहर निकले।
घटना दोपहर करीब एक बजे की है। चांदपुर थाना क्षेत्र के बिजनौर रोड पर स्थित जनजीवन नर्सिंग होम पर राज्य महिला आयोग की टीम पहुंची। टीम में संगीता जैन के अलावा स्थानीय पुलिस के अधिकारी भी शामिल थे। शिकायत मिली थी कि यहां महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार हो रहा है और अवैध चिकित्सा सेवाएं दी जा रही हैं। नर्सिंग होम डॉ. नीतू तेवतिया का है, जो डॉ. सुनील तेवतिया की पत्नी हैं। छापेमारी के दौरान डॉ. तेवतिया अपने चैंबर में बैठे मिले, जहां बाहर उनके नाम का बोर्ड लगा था। टीम के अंदर घुसते ही वे अचानक उठे और चैंबर से जुड़े टॉयलेट में घुस गए। अंदर से दरवाजा लॉक कर लिया।
पुलिस ने दरवाजा खटखटाया लेकिन कोई जवाब नहीं आया। चांदपुर थाना प्रभारी अमित कुमार ने बताया कि टीम ने पांच मिनट इंतजार किया। फिर दरवाजा तोड़ने की चेतावनी दी। इसके बाद डॉ. तेवतिया हाथ धोते हुए बाहर निकले। वे सफाई देते नजर आए। पूछताछ में उन्होंने कहा कि रविवार को छुट्टी थी और वे केवल अपनी पत्नी से मिलने चांदपुर आए थे। न तो कोई मरीज देखा और न ही प्रैक्टिस की। उनकी पत्नी डॉ. नीतू तेवतिया ने भी यही बात दोहराई। लेकिन थाना प्रभारी अमित कुमार ने सवाल उठाया कि अगर कुछ गलत नहीं था तो टीम को देखते ही टॉयलेट में क्यों छिपे।
छापेमारी में नर्सिंग होम के रिकॉर्ड चेक किए गए। पाया गया कि यहां बिना उचित लाइसेंस के सेवाएं दी जा रही हैं। कुछ मरीजों के रिकॉर्ड में 300 रुपये प्रति विजिट की फीस का जिक्र मिला। महिला आयोग की सदस्य संगीता जैन ने कहा कि शिकायतें महिलाओं के शोषण से जुड़ी थीं। जांच में अवैध दवाओं और उपकरणों की भी पड़ताल हुई। टीम ने सारे दस्तावेज जब्त कर लिए। डॉ. तेवतिया को थाने ले जाया गया जहां उनसे विस्तृत पूछताछ की गई। अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है लेकिन मामला दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है।
यह घटना उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के लिए शर्मिंदगी का सबब बन गई है। सरकारी नियम साफ कहते हैं कि सरकारी डॉक्टर निजी प्रैक्टिस नहीं कर सकते। डॉ. तेवतिया मुजफ्फरनगर में सीएमओ के पद पर हैं, जहां उनकी जिम्मेदारी जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की है। लेकिन खुद अवैध गतिविधियों में लिप्त पाए गए। स्थानीय लोगों ने बताया कि नर्सिंग होम में अक्सर भीड़ रहती है। गरीब मरीज सस्ते इलाज के नाम पर आते हैं लेकिन सुविधाएं अपर्याप्त हैं। एक स्थानीय निवासी ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी है, ऐसे में निजी क्लिनिकों पर निर्भरता बढ़ रही है। लेकिन अगर सरकारी अधिकारी ही नियम तोड़ें तो आम आदमी का क्या होगा।
महिला आयोग की कार्रवाई को सराहना मिल रही है। संगीता जैन ने कहा कि यह केवल एक क्लिनिक की जांच नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की कमजोरियों को उजागर करने का प्रयास है। आयोग ने स्वास्थ्य विभाग से रिपोर्ट मांगी है। बिजनौर के जिलाधिकारी और सीएमओ को इसकी जानकारी दी गई। मुजफ्फरनगर के स्वास्थ्य विभाग में भी हलचल है। डॉ. तेवतिया के खिलाफ विभागीय जांच शुरू हो सकती है। अगर आरोप साबित हुए तो निलंबन या बर्खास्तगी तक बात जा सकती है।
इस मामले ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया। वीडियो वायरल हो गया जिसमें पुलिस डॉ. तेवतिया को थाने ले जाती नजर आ रही है। लोग कमेंट्स में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। एक यूजर ने लिखा कि ऊपर से नीचे तक भ्रष्टाचार फैला है। दूसरे ने कहा कि महिला आयोग की सक्रियता सराहनीय है। लेकिन कई ने चिंता जताई कि ऐसी घटनाएं आम हो रही हैं। बिजनौर जैसे ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं पहले से कमजोर हैं। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर समय पर नहीं पहुंचते, जिससे मरीज निजी क्लिनिकों की ओर भागते हैं।
डॉ. तेवतिया का बैकग्राउंड देखें तो वे लंबे समय से स्वास्थ्य क्षेत्र में हैं। मुजफ्फरनगर में उन्होंने कई अभियान चलाए, जैसे टीकाकरण और मलेरिया नियंत्रण। लेकिन यह घटना उनकी छवि को धक्का पहुंचाएगी। पत्नी डॉ. नीतू तेवतिया एक योग्य डॉक्टर हैं और नर्सिंग होम को वैध बनाने के लिए प्रयासरत रहीं। लेकिन पति की संलिप्तता से पूरा परिवार चर्चा में है। स्थानीय पत्रकारों के अनुसार, नर्सिंग होम पर पहले भी शिकायतें आई थीं लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
उत्तर प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए कई योजनाएं चला रही है। आयुष्मान भारत और मोबाइल मेडिकल यूनिट जैसी स्कीमों से ग्रामीणों को लाभ मिल रहा है। लेकिन सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस एक बड़ी समस्या बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि सख्त निगरानी और पाबंदी की जरूरत है। डॉक्टरों को समय पर ड्यूटी पर रखने के लिए बायोमेट्रिक अटेंडेंस और रैंडम चेकिंग बढ़ानी चाहिए। महिला आयोग जैसी संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है, जो शोषण के मामलों को उठाती हैं।
चांदपुर थाने में पूछताछ के बाद डॉ. तेवतिया को छोड़ दिया गया लेकिन जांच जारी है। पुलिस ने कहा कि अगर अवैध प्रैक्टिस साबित हुई तो आईपीसी की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज होगा। स्वास्थ्य विभाग ने भी बयान जारी कर कहा कि दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। यह घटना पूरे प्रदेश के लिए चेतावनी है। सरकारी सेवा में रहते हुए निजी हित साधना नैतिक रूप से गलत है। आम मरीजों को सही इलाज मिले, इसके लिए सिस्टम को पारदर्शी बनाना होगा।
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