हजारीबाग में ममता शर्मसार: अपनी ही बेटी की निर्मम हत्या में शामिल निकली मां, पुलिस ने किया चौंकाने वाला खुलासा।

झारखंड के हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं और रिश्तों की

Apr 2, 2026 - 11:58
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हजारीबाग में ममता शर्मसार: अपनी ही बेटी की निर्मम हत्या में शामिल निकली मां, पुलिस ने किया चौंकाने वाला खुलासा।
हजारीबाग में ममता शर्मसार: अपनी ही बेटी की निर्मम हत्या में शामिल निकली मां, पुलिस ने किया चौंकाने वाला खुलासा।
  • विष्णुगढ़ के जघन्य हत्याकांड से पर्दा उठा: अवैध संबंधों और पारिवारिक कलह के बीच बलि चढ़ी 13 वर्षीय मासूम बच्ची
  • पुलिसिया जांच में टूटी साक्ष्यों की कड़ी: मां समेत तीन आरोपी गिरफ्तार, मासूम की जान लेने वाली क्रूर साजिश का पूरा ब्योरा

झारखंड के हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं और रिश्तों की पवित्रता पर गहरा प्रहार किया है। 24 और 25 मार्च की दरमियानी रात को एक 13 वर्षीय नाबालिग बच्ची की जिस तरह से निर्मम हत्या की गई थी, उसका खुलासा करते हुए पुलिस ने समाज के उस स्याह चेहरे को सामने रखा है जिसकी कल्पना मात्र से रूह कांप जाती है। एक मां, जिसे संसार में सुरक्षा का सबसे बड़ा कवच माना जाता है, वही अपनी कोख से जन्मी संतान की जान लेने वाली मुख्य साजिशकर्ता निकली। पुलिस द्वारा किए गए इस सनसनीखेज खुलासे ने न केवल विष्णुगढ़ बल्कि पूरे हजारीबाग जिले को स्तब्ध कर दिया है। इस जघन्य कांड की गुत्थी सुलझाते हुए पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और कड़ाई से की गई पूछताछ के आधार पर हत्या की पूरी पटकथा का विवरण प्रस्तुत किया है, जिसमें रिश्तों का कत्ल और अवैध संबंधों की कड़वाहट साफ नजर आती है।

घटना की शुरुआत 24 मार्च की रात को हुई थी, जब घर में सो रही नाबालिग बच्ची अचानक गायब हो गई और अगली सुबह उसका शव संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद किया गया। शुरुआत में इस मामले को किसी अज्ञात हमलावर या बाहरी अपराधी की करतूत मानकर देखा जा रहा था, लेकिन पुलिस को घर के भीतर के बयानों में काफी विरोधाभास नजर आया। हजारीबाग पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने जब मामले की गहराई से जांच शुरू की, तो संदेह की सुई मृतका की मां की ओर घूमने लगी। तकनीकी विश्लेषण और कॉल डिटेल्स के आधार पर पुलिस ने पाया कि घटना वाली रात घर में कुछ बाहरी लोगों की मौजूदगी थी, जिनका संबंध सीधे तौर पर बच्ची की मां से था। कड़ाई से पूछताछ करने पर आरोपियों ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया और बताया कि कैसे एक मासूम की जान सिर्फ इसलिए ले ली गई क्योंकि वह अपनों के गलत कामों में बाधा बन रही थी।

जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि मृतका की मां के किसी बाहरी व्यक्ति के साथ अवैध संबंध थे, जिसकी भनक उसकी 13 वर्षीय बेटी को लग गई थी। मासूम बच्ची अपनी मां की इन हरकतों का विरोध करती थी और अक्सर घर में इस बात को लेकर झगड़ा होता था। मां को डर था कि यदि उसकी बेटी ने यह बात अपने पिता या समाज के अन्य लोगों को बता दी, तो उसकी भारी बदनामी होगी। इसी लोकलाज और अपने अनैतिक संबंधों को जारी रखने की चाहत में उसने अपनी ही ममता का गला घोंटने का निर्णय लिया। साजिश के तहत 24 मार्च की रात को उसने अपने सहयोगियों को घर बुलाया और जब बच्ची गहरी नींद में सो रही थी, तभी इस क्रूर हत्याकांड को अंजाम दिया गया। आरोपियों ने पहले बच्ची का गला दबाया और फिर उसकी पहचान मिटाने या मामले को दूसरा मोड़ देने के उद्देश्य से उसके शरीर पर घातक प्रहार किए।

रिश्तों का दोहरा चरित्र

पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए मृतका की मां और उसके दो अन्य सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के समय आरोपियों के पास से घटना में प्रयुक्त कुछ संदिग्ध वस्तुएं और मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं, जिनसे पुलिस को महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। गिरफ्तार किए गए अन्य दो लोग मां के करीबी बताए जा रहे हैं, जिन्होंने हत्या की साजिश रचने और उसे अंजाम देने में सक्रिय भूमिका निभाई थी। पूछताछ में यह भी पता चला कि आरोपियों ने पुलिस को गुमराह करने के लिए पहले लूटपाट या रंजिश की झूठी कहानी गढ़ी थी, लेकिन फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वायड की मदद से पुलिस ने मौके से ऐसे सुराग जुटाए जिनसे आरोपियों का झूठ टिक नहीं सका। तीनों आरोपियों को संबंधित धाराओं के तहत जेल भेज दिया गया है और पुलिस अब इस मामले में स्पीडी ट्रायल कराकर कठोर सजा दिलाने की तैयारी में है।

विष्णुगढ़ की इस घटना ने स्थानीय ग्रामीणों को भी आक्रोशित कर दिया है। 13 साल की वह बच्ची, जो अभी जीवन के सपनों को बुनना शुरू ही कर रही थी, उसे अपनी ही मां के हाथों मौत नसीब हुई। गांव के लोगों का कहना है कि बच्ची काफी होनहार थी और अक्सर घर के कामों में हाथ बंटाती थी। पिता की अनुपस्थिति या घर के अन्य सदस्यों की अनदेखी का फायदा उठाकर इस हत्याकांड की नींव रखी गई थी। पुलिस जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस घटना के पीछे पहले से ही कोई बड़ी योजना बनाई गई थी या यह आवेश में लिया गया फैसला था। हालांकि, जिस तरह से शव को ठिकाने लगाने और साक्ष्यों को मिटाने की कोशिश की गई, उससे यह स्पष्ट होता है कि यह एक सोची-समझी हत्या थी जिसे बेहद ठंडे दिमाग से अंजाम दिया गया था।

हजारीबाग पुलिस प्रशासन ने इस मामले के खुलासे को अपनी बड़ी सफलता माना है, क्योंकि इस तरह के अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाना चुनौतीपूर्ण कार्य था। पुलिस टीम ने गांव के आसपास के लोगों के बयान दर्ज किए और मृतका के पिता, जो काम के सिलसिले में घर से बाहर रहते थे, उन्हें भी घटना की जानकारी दी गई। पिता की स्थिति भी इस समय काफी दयनीय है, क्योंकि एक तरफ उन्होंने अपनी इकलौती बेटी को खोया है और दूसरी तरफ उनकी पत्नी ही इस घिनौने अपराध की मुख्य आरोपी बनकर सामने आई है। इस दोहरी त्रासदी ने पूरे परिवार को बिखरने की कगार पर खड़ा कर दिया है। प्रशासन ने पीड़ित पक्ष को हर संभव विधिक सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है ताकि मासूम को न्याय मिल सके।

वर्तमान में, विष्णुगढ़ पुलिस मामले की चार्जशीट तैयार करने में जुटी है। इस जघन्य कांड ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आधुनिक समाज में बढ़ते अपराध और टूटते पारिवारिक मूल्यों का परिणाम कितना भयानक हो सकता है। सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से भी इस घटना की कड़ी निंदा की जा रही है और दोषियों के लिए फांसी की मांग उठ रही है। हजारीबाग के इस मासूम हत्याकांड ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि अपराधी चाहे कितना भी करीबी क्यों न हो, कानून की लंबी बाहें उस तक जरूर पहुंचती हैं। बच्ची की आत्मा की शांति के लिए क्षेत्र में शोक की लहर है, जबकि कानून की प्रक्रिया अब इन आरोपियों को उनके किए की सजा दिलाने की दिशा में मजबूती से बढ़ रही है।

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