डिजिटल जनगणना 2027 का कल से होगा आगाज: जियो-मैपिंग तकनीक से लैस प्रगणक घर-घर जाकर जुटाएंगे हर परिवार का सटीक ब्योरा।

पंजीयक जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस ऐतिहासिक अभियान की

Mar 31, 2026 - 14:24
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डिजिटल जनगणना 2027 का कल से होगा आगाज: जियो-मैपिंग तकनीक से लैस प्रगणक घर-घर जाकर जुटाएंगे हर परिवार का सटीक ब्योरा।
डिजिटल जनगणना 2027 का कल से होगा आगाज: जियो-मैपिंग तकनीक से लैस प्रगणक घर-घर जाकर जुटाएंगे हर परिवार का सटीक ब्योरा।
  • 1 अप्रैल से शुरू होगा महा-अभियान: पहले चरण में पूछे जाएंगे 33 महत्वपूर्ण सवाल, खुद से डेटा भरने के लिए मिलेगा 'सेल्फ-एनुमरेशन' का विकल्प
  • देश की 16वीं और आजादी के बाद की 8वीं जनगणना: 31 लाख कर्मचारियों की फौज और अत्याधुनिक मोबाइल ऐप के साथ बदला जाएगा डेटा संग्रहण का स्वरूप

पंजीयक जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस ऐतिहासिक अभियान की विस्तृत रूपरेखा साझा की है। 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाला यह अभियान दो चरणों में संपन्न होगा। पहले चरण को 'मकान सूचीकरण और आवास गणना' (Houselisting and Housing Census) का नाम दिया गया है, जो सितंबर 2026 तक चलेगा। इस दौरान देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रगणक घर-घर जाकर आवासीय संपत्तियों का विवरण एकत्रित करेंगे। इस चरण का मुख्य उद्देश्य देश में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं, आवास की स्थिति और घरेलू संपत्तियों का एक व्यापक डेटाबेस तैयार करना है, ताकि भविष्य की कल्याणकारी योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

इस बार की जनगणना की सबसे बड़ी विशेषता इसका पूरी तरह से 'डिजिटल' होना है। कागज और कलम के पारंपरिक युग को पीछे छोड़ते हुए, प्रगणक अब अपने स्मार्टफोन या टैबलेट पर विशेष रूप से तैयार किए गए 'जनगणना ऐप' के माध्यम से डेटा दर्ज करेंगे। इस प्रक्रिया में 'जियो-मैपिंग' तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जो प्रत्येक घर के सटीक भौगोलिक स्थान (Longitudes and Latitudes) को सिस्टम में दर्ज करेगी। इससे न केवल डेटा की शुद्धता बढ़ेगी, बल्कि शहरी नियोजन, आपदा प्रबंधन और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में भी क्रांतिकारी बदलाव आएंगे। सरकार ने इस विशाल अभ्यास के लिए लगभग 11,718 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है, जिसमें प्रगणकों के प्रशिक्षण और आईटी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है।

नागरिकों की सुविधा के लिए पहली बार 'सेल्फ-एनुमरेशन' (स्व-गणना) की सुविधा भी प्रदान की जा रही है। इसका अर्थ यह है कि लोग अब प्रगणकों के घर आने का इंतजार किए बिना खुद एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकेंगे। यह पोर्टल 16 विभिन्न भाषाओं में उपलब्ध होगा। प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के लिए 15 दिनों का एक विशेष 'सेल्फ-एनुमरेशन' विंडो निर्धारित किया गया है, जिसके तुरंत बाद 30 दिनों का डोर-टू-डोर अभियान शुरू होगा। अंडमान-निकोबार, गोवा, कर्नाटक और दिल्ली के कुछ हिस्सों में यह प्रक्रिया कल से ही शुरू हो जाएगी, जबकि उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे बड़े राज्यों में इसके लिए मई महीने की तिथियां निर्धारित की गई हैं।

पहले चरण के दौरान प्रगणक प्रत्येक परिवार से कुल 33 सवाल पूछेंगे। ये सवाल केवल नाम और पते तक सीमित नहीं होंगे, बल्कि इनमें मकान के निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री, परिवार के पास उपलब्ध पेयजल के स्रोत, शौचालय की सुविधा, रसोई घर के प्रकार और बिजली की उपलब्धता जैसे महत्वपूर्ण बिंदु शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त, घरेलू संपत्तियों जैसे कि रेडियो, टेलीविजन, इंटरनेट, कंप्यूटर, साइकिल, कार और बैंक खातों के बारे में भी जानकारी ली जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान नागरिकों को कोई भी दस्तावेज दिखाने की आवश्यकता नहीं होगी, केवल मौखिक रूप से दी गई जानकारी को ही आधार माना जाएगा। हालांकि, नागरिकों से अपील की गई है कि वे सटीक जानकारी दें क्योंकि इसी डेटा के आधार पर आगामी दशकों की विकास नीतियां तय होंगी।

जनगणना 2027 का टाइमलाइन

चरण 1 (मकान सूचीकरण): 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026।

चरण 2 (जनसंख्या गणना): फरवरी 2027 (बर्फीले क्षेत्रों को छोड़कर)।

जातीय जनगणना: सरकार ने निर्णय लिया है कि जाति आधारित गणना दूसरे चरण (फरवरी 2027) का हिस्सा होगी।

संदर्भ तिथि: 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि को जनसंख्या के अंतिम आंकड़ों के लिए आधार माना जाएगा।

जनगणना के दूसरे चरण को 'जनसंख्या गणना' (Population Enumeration) कहा जाता है, जो फरवरी 2027 में आयोजित होगा। इस चरण में प्रत्येक व्यक्ति का व्यक्तिगत विवरण जैसे आयु, वैवाहिक स्थिति, शिक्षा, व्यवसाय, धर्म और मातृभाषा की जानकारी जुटाई जाएगी। एक महत्वपूर्ण मोड़ यह है कि 94 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद, दूसरे चरण में जातीय गणना को भी शामिल किया गया है। यह निर्णय सामाजिक-आर्थिक संतुलन को समझने और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के दृष्टिकोण से लिया गया है। लद्दाख और हिमाचल प्रदेश जैसे बर्फबारी वाले क्षेत्रों के लिए दूसरे चरण की प्रक्रिया समय से पहले यानी सितंबर 2026 में ही शुरू कर दी जाएगी। डेटा सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर भी कड़े इंतजाम किए गए हैं। जनगणना अधिनियम-1948 के तहत एकत्रित की गई व्यक्तिगत जानकारी को पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा और इसे किसी भी अन्य विभाग या एजेंसी के साथ साझा नहीं किया जाएगा। डिजिटल माध्यम से डेटा संग्रह होने के कारण, परिणामों के विश्लेषण और प्रकाशन में भी काफी कम समय लगेगा। सरकार का लक्ष्य है कि अधिकांश डेटा 2027 के अंत तक सार्वजनिक कर दिया जाए। इससे शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं और अर्थशास्त्रियों को वास्तविक समय (Real-time) के करीब का डेटा उपलब्ध होगा, जिससे सरकारी संसाधनों का समान और न्यायपूर्ण वितरण संभव हो सकेगा।

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