भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो संकटग्रस्त, विंटर शेड्यूल में कटौती, 110 दैनिक उड़ानों के स्लॉट प्रतिद्वंद्वियों को सौंपे जा सकते हैं। 

भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के संचालन में गंभीर व्यवधान के बीच केंद्र सरकार ने विंटर शेड्यूल में कटौती का फैसला किया है, जिससे

Dec 9, 2025 - 11:58
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भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो संकटग्रस्त, विंटर शेड्यूल में कटौती, 110 दैनिक उड़ानों के स्लॉट प्रतिद्वंद्वियों को सौंपे जा सकते हैं। 
भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो संकटग्रस्त, विंटर शेड्यूल में कटौती, 110 दैनिक उड़ानों के स्लॉट प्रतिद्वंद्वियों को सौंपे जा सकते हैं। 

भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के संचालन में गंभीर व्यवधान के बीच केंद्र सरकार ने विंटर शेड्यूल में कटौती का फैसला किया है, जिससे लगभग 110 दैनिक उड़ानों के स्लॉट अन्य एयरलाइंस को आवंटित किए जा सकते हैं। यह कदम 2 दिसंबर से शुरू हुए बड़े पैमाने पर उड़ान रद्दीकरणों के बाद उठाया गया है, जो पायलट थकान को कम करने के लिए लागू नई फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीएल) नियमों के अनुपालन में कमी के कारण उत्पन्न हुए। विंटर शेड्यूल, जो अक्टूबर के अंतिम रविवार से मार्च के अंतिम रविवार तक चलता है, में इंडिगो को मूल रूप से 2,200 से अधिक दैनिक उड़ानें आवंटित की गई थीं, लेकिन अब 5 प्रतिशत की कटौती के बाद यह संख्या घटकर लगभग 2,090 रह सकती है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह कटौती क्रू की उपलब्धता और संचालन की स्थिरता पर आधारित होगी, और यदि व्यवधान जारी रहे तो और अधिक कमी की संभावना है। इस संकट की शुरुआत 2 दिसंबर को हुई, जब इंडिगो की उड़ानें देरी और रद्दीकरणों से प्रभावित होने लगीं। पहले दिन 70 उड़ानें रद्द हुईं, जो अगले दिन 300 और 5 दिसंबर को 1,000 से अधिक हो गईं, जो कुल दैनिक संचालन का आधा हिस्सा था। 8 दिसंबर तक कुल 4,000 से अधिक उड़ानें रद्द हो चुकी थीं, जिससे देशभर के हवाई अड्डों पर हजारों यात्री फंस गए। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद और कोलकाता जैसे प्रमुख हवाई अड्डों पर बैगेज पाइल-अप और लंबी कतारें आम हो गईं। इंडिगो ने अपनी प्रतिक्रिया में पांच कारकों का हवाला दिया: मामूली तकनीकी खराबियां, विंटर शेड्यूल में बदलाव, प्रतिकूल मौसम, हवाई यातायात में भीड़ और एफडीटीएल फेज-2 के कार्यान्वयन। इन नियमों ने पायलटों के लिए साप्ताहिक आराम बढ़ाया, रात्रि ड्यूटी की परिभाषा विस्तारित की और रात्रि लैंडिंग को छह से घटाकर दो कर दिया, जिससे क्रू की उपलब्धता में कमी आई।

एफडीटीएल नियम दो वर्ष पहले पायलट थकान की शिकायतों के बाद लागू किए गए थे, जिनका पहला चरण जुलाई 2024 में और दूसरा 1 नवंबर 2025 को शुरू हुआ। इंडिगो, जो घरेलू बाजार में 60 से 70 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती है और 400 से अधिक विमानों का बेड़ा संचालित करती है, ने इन नियमों के लिए पर्याप्त पायलट भर्ती नहीं की। पायलट यूनियनों ने प्रबंधन पर नियुक्ति फ्रीज, दुबली स्टाफिंग और वेतन स्थगन का आरोप लगाया, जबकि डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) ने विंटर शेड्यूल को मंजूरी देते समय पायलट उपलब्धता की जांच नहीं की। 5 दिसंबर को ऑन-टाइम परफॉर्मेंस 8.5 प्रतिशत तक गिर गई, जो पहले 80 प्रतिशत से अधिक थी। इंडिगो ने 4 दिसंबर को डीजीसीए को बताया कि पूर्ण स्थिरीकरण 10 फरवरी 2026 तक संभव है, और रात्रि ड्यूटी नियमों में छूट की मांग की, सरकार ने तत्काल हस्तक्षेप किया, जिसमें 5 दिसंबर को एफडीटीएल के कुछ प्रावधानों से अस्थायी छूट दी गई, जैसे रात्रि ड्यूटी और लीव-फॉर-रेस्ट मानदंड। सिविल एविएशन मंत्री ने 8 दिसंबर को राज्यसभा में कहा कि यह इंडिगो का आंतरिक संकट था, जो क्रू रॉस्टरिंग और योजना की कमी से उपजा। डीजीसीए ने शो-कॉज नोटिस जारी किया, जिसका जवाब 8 दिसंबर शाम तक मांगा गया, और सीईओ पीटर एल्बर्स तथा सीओओ इसिड्रो पोरकेरास को 10 दिसंबर को बुलाया। एक चार सदस्यीय जांच समिति गठित की गई, जो 15 दिनों में रिपोर्ट देगी। मंत्रालय ने 10 प्रमुख हवाई अड्डों—दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता, चेन्नई, अहमदाबाद, पुणे, गुवाहाटी और तिरुवनंतपुरम—पर जमीनी जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारी भेजे। एक संकट प्रबंधन समूह दैनिक बैठकें कर रहा है, और सभी एयरलाइंस के साथ व्यापक समीक्षा निर्धारित है।

उड़ान रद्दीकरणों से यात्रियों को भारी असुविधा हुई, विशेषकर शादी-ब्याह के मौसम में। इंडिगो ने 1 से 8 दिसंबर तक 7,30,655 रद्द पीएनआर के लिए 745 करोड़ रुपये के रिफंड जारी किए, जो बाद में 827 करोड़ तक पहुंच गए। 9,000 विलंबित बैगों में से 6,000 लौटा दिए गए, शेष 36 घंटों में वितरित करने का लक्ष्य है। रद्दीकरण और पुनर्निर्धारण पर शुल्क माफ किया गया, और 15 दिसंबर तक बुकिंग्स के लिए पूर्ण छूट दी गई। सरकार ने घरेलू किरायों पर 18,000 रुपये की सीमा लगाई, क्योंकि प्रतिद्वंद्वी एयरलाइंस के टिकट दस गुना बढ़ गए थे। एयर इंडिया ने घरेलू रूटों पर वाइडबॉडी विमान तैनात किए, जबकि स्पाइसजेट और अकासा एयर को क्षमता बढ़ाने का निर्देश दिया। रेल मंत्रालय ने 37 प्रीमियम ट्रेनों में 116 अतिरिक्त कोच जोड़े, क्योंकि मांग बढ़ गई। इस संकट ने इंडिगो की बाजार प्रभुत्व पर सवाल उठाए, जो 2,300 दैनिक उड़ानों के साथ 118 मिलियन यात्रियों को सेवा देती है। मूडीज ने चेतावनी दी कि लंबे व्यवधान से वित्तीय दबाव बढ़ेगा, जिससे शेयरों में गिरावट आई—8 दिसंबर को 18 प्रतिशत तक। इंडिगो ने बोर्ड स्तर पर संकट प्रबंधन समूह गठित किया, और 8 दिसंबर को 1,800 से अधिक उड़ानें संचालित कीं, जो 1,650 से सुधार था। नेटवर्क कनेक्टिविटी 95 प्रतिशत बहाल हो गई, और 90 प्रतिशत ऑन-टाइम परफॉर्मेंस दर्ज की गई। हालांकि, 500 उड़ानें रद्द रहीं, जिनमें बेंगलुरु में 121, चेन्नई में 81, हैदराबाद में 58 शामिल थीं। डीजीसीए ने दो सप्ताह में प्रगति रिपोर्ट और 30 दिनों का रोडमैप मांगा, जिसमें भर्ती, प्रशिक्षण और रॉस्टरिंग योजना शामिल हो। विंटर शेड्यूल में कटौती का निर्णय एयरलाइंस के बीच संतुलन बनाने के लिए है, क्योंकि इंडिगो और एयर इंडिया मिलकर 92 प्रतिशत बाजार नियंत्रित करते हैं। स्लॉट पुनर्वितरण से स्पाइसजेट और अकासा को लाभ होगा, जो क्षमता बढ़ा रही हैं। सरकार ने स्लॉटों की पहचान पर चर्चा की, जो क्रू शक्ति पर आधारित होगी। यदि संचालन स्थिर नहीं हुआ, तो अतिरिक्त 5 प्रतिशत कटौती संभव है। डीजीसीए ने स्लॉट सस्पेंशन या जुर्माने की संभावना जताई, और उल्लंघन पर लाइसेंस निलंबन या दो वर्ष तक कारावास का प्रावधान है। यह संकट भारतीय विमानन क्षेत्र की कमजोरियों को उजागर करता है, जहां एक प्रमुख एयरलाइन का व्यवधान पूरे नेटवर्क को प्रभावित करता है।

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