अस्पताल में वार्ड बॉय पर मरीज ने किया अचानक हमला, मरीज लगातार वार करता रहा, सीसीटीवी में कैद हुई घटना, पुलिस जांच शुरू।
Punjab: पंजाब के मोगा जिले में एक निजी अस्पताल में मानसिक रूप से परेशान मरीज द्वारा वार्ड बॉय पर हमले की घटना सामने आई है। यह घटना मंगलवार को मोगा के मेदिसिटी सुपर एंड मल्टीस्पेशलिटी
पंजाब के मोगा जिले में एक निजी अस्पताल में मानसिक रूप से परेशान मरीज द्वारा वार्ड बॉय पर हमले की घटना सामने आई है। यह घटना मंगलवार को मोगा के मेदिसिटी सुपर एंड मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में हुई। हमलावर मरीज ने अचानक वार्ड बॉय पर हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। पूरी घटना अस्पताल के सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है, जिसके आधार पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। घायल वार्ड बॉय को तुरंत अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जबकि मरीज की गंभीर मानसिक स्थिति को देखते हुए उसे लुधियाना के एक अस्पताल में रेफर किया गया है।
घटना उस समय हुई जब वार्ड बॉय, जिसकी पहचान 28 वर्षीय सुरजीत सिंह के रूप में हुई है, मरीज की देखभाल के लिए वार्ड में गया था। मरीज, जिसका नाम गोपनीय रखा गया है, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा था और उसे कुछ दिन पहले ही अस्पताल में भर्ती किया गया था। सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा है कि वार्ड बॉय मरीज के पास कुछ सामान ले जा रहा था, तभी मरीज ने अचानक उस पर हमला कर दिया। मरीज ने वार्ड बॉय को मुक्कों और धक्कों से मारना शुरू कर दिया। वार्ड बॉय ने बचने की कोशिश की, लेकिन मरीज ने उसे लगातार मारा। शोर सुनकर अस्पताल के अन्य कर्मचारी मौके पर पहुंचे और मरीज को नियंत्रित करने की कोशिश की। इस दौरान मरीज ने स्टाफ के अन्य सदस्यों पर भी हमला करने की कोशिश की, लेकिन स्टाफ ने उसे काबू में कर लिया।
घटना में सुरजीत सिंह को सिर और छाती पर गंभीर चोटें आईं। उसे तुरंत अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में ले जाया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, उसकी हालत अब स्थिर है, लेकिन उसे कुछ दिनों तक निगरानी में रखा जाएगा। दूसरी ओर, हमलावर मरीज की मानसिक स्थिति को देखते हुए उसे लुधियाना के एक विशेषज्ञ अस्पताल में भेजा गया है, जहां उसका मानसिक स्वास्थ्य मूल्यांकन और इलाज किया जाएगा। मरीज के परिवार वालों ने बताया कि वह लंबे समय से मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा था और पहले भी हिंसक व्यवहार दिखा चुका था।
मोगा के मेदिसिटी अस्पताल के प्रबंधन ने इस घटना पर खेद जताया है और कहा है कि वे अपने कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए हरसंभव कदम उठा रहे हैं। अस्पताल के एक प्रवक्ता ने बताया कि वार्ड बॉय को तुरंत चिकित्सा सहायता दी गई और मरीज को नियंत्रित करने के लिए प्रशिक्षित स्टाफ ने तेजी से काम किया। उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल में सीसीटीवी कैमरे और सुरक्षा गार्ड पहले से मौजूद हैं, लेकिन इस घटना के बाद वे सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने पर विचार कर रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस को सीसीटीवी फुटेज सौंप दी है और इस मामले में पूरी तरह सहयोग करने का वादा किया है।
मोगा पुलिस ने इस घटना को गंभीरता से लिया है। कोट इशे खान पुलिस स्टेशन के प्रभारी ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि मरीज की मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए इस मामले में सावधानी से कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने अभी तक कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया है, क्योंकि मरीज की मानसिक हालत को देखते हुए कानूनी प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है। पुलिस ने यह भी कहा कि वे अस्पताल प्रबंधन के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
इस घटना ने स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। मोगा के स्थानीय निवासियों और स्वास्थ्यकर्मी संगठनों ने इस घटना की निंदा की है और मांग की है कि अस्पतालों में कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाए जाएं। पंजाब सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (पीसीएमएसए) के एक प्रतिनिधि ने कहा कि स्वास्थ्यकर्मी मरीजों की सेवा के लिए दिन-रात काम करते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है। उन्होंने मांग की कि अस्पतालों में प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मी और आपातकालीन प्रोटोकॉल लागू किए जाएं, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो को लेकर लोगों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं। कुछ लोगों ने मरीज की मानसिक स्थिति को देखते हुए सहानुभूति जताई, लेकिन ज्यादातर लोगों ने वार्ड बॉय के साथ हुई हिंसा की निंदा की। एक यूजर ने लिखा, “स्वास्थ्यकर्मी हमारी जान बचाने के लिए काम करते हैं, लेकिन उनकी अपनी सुरक्षा का क्या? प्रशासन को इस पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।” एक अन्य यूजर ने सुझाव दिया कि मानसिक रूप से बीमार मरीजों के लिए अलग वार्ड और विशेष प्रशिक्षित स्टाफ की व्यवस्था होनी चाहिए।
यह घटना मोगा में स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले की पहली घटना नहीं है। कुछ समय पहले मोगा के सिविल अस्पताल में एक डॉक्टर पर हमला हुआ था, जिसके बाद स्वास्थ्यकर्मियों ने विरोध प्रदर्शन किया था। इस तरह की घटनाएं दर्शाती हैं कि अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है, खासकर उन वार्डों में जहां मानसिक रूप से परेशान मरीजों का इलाज होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य मरीजों की देखभाल के लिए विशेष प्रशिक्षण और संसाधनों की आवश्यकता होती है, जो कई अस्पतालों में उपलब्ध नहीं हैं।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि मोगा के सभी अस्पतालों में सुरक्षा गार्डों की संख्या बढ़ाई जाए और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी को और प्रभावी किया जाए। एक स्थानीय निवासी ने बताया कि मेदिसिटी अस्पताल क्षेत्र का एक जाना-माना अस्पताल है, लेकिन इस तरह की घटनाएं इसकी छवि को खराब करती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मानसिक स्वास्थ्य मरीजों के लिए अलग से वार्ड और विशेषज्ञ डॉक्टरों की जरूरत है, ताकि सामान्य वार्ड में इस तरह की घटनाएं न हों।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य मरीजों द्वारा हिंसक व्यवहार की घटनाएं तब बढ़ती हैं, जब उनकी स्थिति को ठीक करने के लिए समय पर इलाज और देखभाल नहीं मिलती। एक मनोचिकित्सक ने बताया कि ऐसे मरीजों को नियंत्रित करने के लिए प्रशिक्षित स्टाफ और शांत वातावरण की जरूरत होती है। उन्होंने सुझाव दिया कि अस्पतालों में मानसिक स्वास्थ्य मरीजों के लिए अलग इकाई बनाई जाए, जहां उनकी स्थिति के अनुसार इलाज हो सके।
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