आगर मालवा: दुकान में हार्ट अटैक से तड़पते कर्मचारी की मौत, मालिक ने मोबाइल चलाते हुए की अनदेखी।

मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जो इंसानियत को शर्मसार करने वाली है। यहां सुसनेर क्षेत्र में स्थित तिरुपति ट्रेडर्स नाम की एक किराना दुकान पर काम कर रहे 45

Oct 12, 2025 - 17:50
Oct 12, 2025 - 17:52
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आगर मालवा: दुकान में हार्ट अटैक से तड़पते कर्मचारी की मौत, मालिक ने मोबाइल चलाते हुए की अनदेखी।
आगर मालवा: दुकान में हार्ट अटैक से तड़पते कर्मचारी की मौत, मालिक ने मोबाइल चलाते हुए की अनदेखी।

मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जो इंसानियत को शर्मसार करने वाली है। यहां सुसनेर क्षेत्र में स्थित तिरुपति ट्रेडर्स नाम की एक किराना दुकान पर काम कर रहे 45 वर्षीय रफीक खान को काम के दौरान अचानक सीने में तेज दर्द हुआ। यह दर्द इतना गंभीर था कि उन्हें हार्ट अटैक आ गया। रफीक दर्द से कराहते हुए दुकान की कुर्सी पर बैठ गए और फिर धीरे-धीरे जमीन पर गिर पड़े। वे करीब छह मिनट तक दर्द से तड़पते रहे, सांस लेने में तकलीफ हुई, हाथ-पैर कांपने लगे, लेकिन आसपास मौजूद कोई भी व्यक्ति उनकी मदद के लिए आगे नहीं आया। सबसे दुखद यह था कि दुकान के मालिक, जो महज कुछ कदम दूर अपनी कुर्सी पर बैठे थे, ने इस दर्दनाक मंजर को देखा लेकिन कोई कदम नहीं उठाया। वे बस अपने मोबाइल फोन में व्यस्त रहे, जैसे कुछ हुआ ही न हो। बाद में जब रफीक को अस्पताल पहुंचाया गया, तो डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना का सीसीटीवी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसने पूरे देश में आक्रोश की लहर पैदा कर दी है।

यह घटना 6 अक्टूबर 2025 को दोपहर के समय घटी। तिरुपति ट्रेडर्स एक सामान्य किराना दुकान है, जहां रफीक खान पिछले कई वर्षों से काम कर रहे थे। वे एक मेहनती व्यक्ति थे, जो रोजाना सुबह से शाम तक दुकान पर सामान संभालते, ग्राहकों को सेवा देते और मालिक के हर काम में हाथ बंटाते। पड़ोसियों के अनुसार, रफीक एक सादा जीवन जीने वाले इंसान थे। वे सुसनेर के एक छोटे से इलाके में रहते थे, जहां उनकी पत्नी और तीन बच्चे हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत न होने के कारण रफीक दुकान पर लंबे समय तक काम करते थे। उन्हें पहले से हल्का-फुल्का सीने का दर्द तो होता था, लेकिन वे इसे हल्के में लेते थे। डॉक्टरों ने बाद में बताया कि हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करने से स्थिति बिगड़ जाती है। अगर तुरंत सीपीआर या एम्बुलेंस की मदद ली जाती, तो शायद जान बच सकती थी। लेकिन दुकान पर मौजूद अन्य कर्मचारी और मालिक ने ऐसा कुछ नहीं किया।

वीडियो फुटेज में साफ दिखाई देता है कि रफीक कुर्सी पर बैठे हुए अचानक अपना सिर पकड़ लेते हैं। फिर वे कुर्सी से फिसलकर नीचे गिर जाते हैं। उनका चेहरा पीला पड़ जाता है, सांसें तेज हो जाती हैं। वे बार-बार हाथ उठाकर मदद मांगने का इशारा करते हैं, लेकिन मालिक अपनी जगह से हिलते तक नहीं। मालिक का बेटा भी दुकान पर मौजूद था, लेकिन वह भी फोन पर ही लगा रहा। दुकान पर उस समय दो-तीन अन्य लोग भी थे, जो काम में व्यस्त दिखते हैं। कोई भी रुककर रफीक के पास नहीं जाता। करीब पांच-छह मिनट बाद ही रफीक की सांसें थम जाती हैं। वीडियो के अंत में दिखता है कि कुछ लोग दौड़ते हुए आते हैं और उन्हें उठाने की कोशिश करते हैं। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। यह वीडियो दुकान के सीसीटीवी कैमरे से रिकॉर्ड हुआ था, जो मालिक ने बाद में पुलिस को सौंप दिया। सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से फैला, जहां लाखों लोगों ने इसे देखा और मालिक की लापरवाही पर सवाल उठाए।

इस घटना के बाद रफीक के परिवार का रोना-धोना मच गया। उनकी पत्नी का कहना है कि रफीक सुबह घर से बिल्कुल स्वस्थ निकले थे। वे बच्चों को स्कूल भेजने के बाद दुकान चले गए थे। शाम को जब फोन पर बात हुई, तो सब कुछ ठीक लग रहा था। लेकिन रात तक कोई खबर न आने पर परिवार चिंतित हो गया। दुकान से कॉल आने पर वे अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने मौत की पुष्टि की। परिवार ने बताया कि रफीक के दो बच्चे अभी पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि सबसे छोटा 10 साल का है। अब परिवार पर आर्थिक संकट मंडरा रहा है। रफीक की पत्नी ने कहा कि वे अकेले कमाने वाले सदस्य थे। अब दुकान का किराया, बच्चों की फीस और घर का खर्च कैसे चलेगा, यह सोचकर रातों की नींद उड़ गई है। स्थानीय लोगों ने परिवार की मदद के लिए एक छोटा सा फंड शुरू किया है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।

स्थानीय पुलिस ने इस मामले में अभी तक कोई औपचारिक एक्शन नहीं लिया है। सुसनेर थाने के प्रभारी का कहना है कि मौत प्राकृतिक कारणों से हुई लगती है, लेकिन वीडियो देखकर लापरवाही का मामला बन सकता है। अगर परिजन शिकायत करेंगे, तो जांच की जाएगी। हालांकि, परिवार ने अभी शिकायत दर्ज नहीं कराई है। वे सिर्फ न्याय चाहते हैं कि ऐसी घटना दोबारा न हो। डॉक्टरों के अनुसार, हार्ट अटैक के मामले में पहले तीन-चार मिनट सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। अगर तुरंत मदद मिले, तो 80 प्रतिशत मामलों में व्यक्ति बच सकता है। लेकिन यहां ऐसा नहीं हुआ। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि आजकल युवाओं में हार्ट अटैक के केस बढ़ रहे हैं। तनाव, अनियमित खान-पान और व्यायाम की कमी इसके मुख्य कारण हैं। रफीक जैसे मेहनती लोग अक्सर अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देते हैं।

यह घटना न सिर्फ आगर मालवा बल्कि पूरे देश के लिए एक सबक है। दुकानों और कार्यस्थलों पर प्राथमिक चिकित्सा किट रखना अनिवार्य होना चाहिए। कर्मचारियों को हार्ट अटैक के लक्षणों के बारे में जागरूक करना जरूरी है। मालिकों को यह समझना होगा कि कर्मचारी सिर्फ मजदूर नहीं, बल्कि परिवार का सदस्य होते हैं। अगर मालिक ने सिर्फ एक मिनट के लिए फोन रख दिया होता, तो शायद कहानी अलग होती। सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। कई यूजर्स ने लिखा कि यह वीडियो देखकर आंखें नम हो गईं। कुछ ने मालिक को बेरहमी का दोषी ठहराया, तो कुछ ने समाज की संवेदनहीनता पर सवाल उठाए। एक यूजर ने ट्वीट किया कि मोबाइल इतना महत्वपूर्ण हो गया है कि इंसान की जान से ज्यादा। एक अन्य ने कहा कि ऐसी घटनाओं से सीख लें, वरना हम सब दोषी हैं।

आगर मालवा जिला प्रशासन ने इस मामले पर ध्यान दिया है। कलेक्टर ने कहा है कि ऐसी दुखद घटनाओं को रोकने के लिए कार्यस्थलों पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग की टीम दुकानों का दौरा करेगी और प्राथमिक उपचार की ट्रेनिंग देगी। स्थानीय विधायक ने भी परिवार से मुलाकात की और आर्थिक सहायता का आश्वासन दिया। लेकिन ये कदम कितने प्रभावी होंगे, यह समय बताएगा। रफीक खान की मौत ने एक बार फिर याद दिला दिया कि जिंदगी अनमोल है। छोटी सी लापरवाही बड़ी त्रासदी ला सकती है। हमें अपने आसपास के लोगों पर नजर रखनी होगी। अगर कोई दर्द से तड़प रहा है, तो मदद का हाथ बढ़ाना हमारा फर्ज है। यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हमारा समाज कितना संवेदनशील है। आशा है कि रफीक की आत्मा को शांति मिले और उनका परिवार इस दुख से उबर जाए।

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