रीवा में आवारा कुत्ते का आतंक- 14 साल के नितिन की रेबीज से मौत, तीन इंजेक्शन भी नहीं बचा सके।
Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के रीवा जिले में 16 जून 2025 को एक दुखद घटना हुई, जब 14 वर्षीय नितिन नट को एक आवारा कुत्ते ने काट लिया। नितिन, जो ...
मध्य प्रदेश के रीवा जिले में 16 जून 2025 को एक दुखद घटना हुई, जब 14 वर्षीय नितिन नट को एक आवारा कुत्ते ने काट लिया। नितिन, जो अपने गाँव पहाड़िया से रीवा के नरेंद्र नगर में अपनी मौसी के घर गर्मियों की छुट्टियाँ मनाने आया था, उस दिन घर के बाहर पार्क में खेल रहा था। कुत्ते ने उसकी गर्दन पर काटा, जिसके बाद उसे तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया। वहाँ उसे रेबीज के तीन इंजेक्शन दिए गए, लेकिन 6 जुलाई 2025 को उसकी हालत बिगड़ गई। नितिन ने कुत्तों जैसी हरकतें शुरू कर दीं, और 10 जुलाई 2025 को उसकी मृत्यु हो गई।
नितिन नट, जो मनगवां थाना क्षेत्र के पहाड़िया गाँव का निवासी था, 16 जून 2025 को रीवा के नरेंद्र नगर मोहल्ले में अपनी मौसी के घर पर था। वह घर के सामने पार्क में खेल रहा था, तभी एक आवारा कुत्ते ने उसकी गर्दन पर हमला कर दिया। स्थानीय लोगों ने गुस्से में कुत्ते को मार डाला, लेकिन नितिन को तुरंत जिला अस्पताल, बिछिया ले जाया गया। वहाँ डॉक्टरों ने उसे रेबीज के तीन इंजेक्शन दिए, जो सामान्यतः कुत्ते के काटने के बाद दिए जाते हैं। चौथा इंजेक्शन 14 जुलाई को लगना था, लेकिन उससे पहले ही 6 जुलाई को नितिन की तबीयत बिगड़ने लगी।
परिजनों के अनुसार, नितिन अचानक अजीब व्यवहार करने लगा। वह कुत्तों की तरह भौंकने और हरकत करने लगा, पानी और हवा से डरने लगा, और तड़पने लगा। यह रेबीज के गंभीर लक्षण थे। परिजन उसे दोबारा रीवा के संजय गांधी अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने बताया कि रेबीज का संक्रमण उसके मस्तिष्क तक पहुँच चुका है, और अब इलाज संभव नहीं है। डॉक्टरों ने उसे घर पर रखने की सलाह दी, लेकिन परिजन उसे झाड़-फूंक के लिए मऊगंज ले जा रहे थे। रास्ते में ही नितिन की मृत्यु हो गई।
रेबीज एक जानलेवा वायरल बीमारी है, जो लाइसावायरस (Lyssavirus) के कारण होती है। यह वायरस आमतौर पर संक्रमित जानवरों, खासकर कुत्तों, की लार के माध्यम से फैलता है। जब यह मस्तिष्क और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र तक पहुँच जाता है, तो यह गंभीर इन्सेफेलाइटिस (मस्तिष्क की सूजन) का कारण बनता है। इसके लक्षणों में बुखार, उल्टी, पानी से डर (हाइड्रोफोबिया), भटकाव, और हिंसक व्यवहार शामिल हैं। एक बार लक्षण दिखने के बाद, रेबीज का कोई इलाज नहीं है, और मृत्यु दर लगभग 99.9% है।
संजय गांधी अस्पताल के अधीक्षक राहुल मिश्रा ने बताया कि नितिन के मस्तिष्क में रेबीज के संकेत (ब्रेन स्टेम साइन) मिले थे। उन्होंने कहा, “जब रेबीज का वायरस मस्तिष्क तक पहुँच जाता है, तो कोई भी दवा या इंजेक्शन असर नहीं करता। हमने परिजनों को उसे घर पर रखने की सलाह दी थी।” रेबीज से बचाव के लिए कुत्ते के काटने के तुरंत बाद घाव को साबुन और पानी से धोना और 24 घंटे के अंदर एंटी-रेबीज वैक्सीन शुरू करना जरूरी है। सामान्यतः वैक्सीन की चार से पाँच खुराकें दी जाती हैं, जो पहले दिन, तीसरे दिन, सातवें दिन, 14वें दिन, और 28वें दिन दी जाती हैं। गंभीर मामलों में रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन भी दिया जाता है।
नितिन के मामले में, तीन इंजेक्शन दिए गए थे, लेकिन चौथा डोज़ लेने से पहले ही उसकी हालत बिगड़ गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि समय पर प्रभावी इलाज नहीं मिला, जिससे उसकी जान चली गई। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि कुत्ते ने नितिन की गर्दन पर काटा, जो मस्तिष्क के करीब है, जिसके कारण वायरस तेजी से फैला।
नितिन के पिता रमेश नट, जो मेहनत-मजदूरी करके परिवार चलाते हैं, और उनकी बुआ रेखा नट ने इस घटना पर गहरा दुख जताया। रेखा ने बताया, “नितिन हमारे परिवार का बड़ा बेटा था। कुत्ते के काटने के बाद हमने उसे तुरंत अस्पताल पहुँचाया, लेकिन इंजेक्शन का कोई असर नहीं हुआ।” परिजनों ने जिला अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठाए और कहा कि डॉक्टरों ने समय पर उचित इलाज नहीं किया। उन्होंने इस मामले की शिकायत जिला कलेक्टर से की है, जिन्होंने जांच का आश्वासन दिया है। परिजनों का यह भी कहना है कि अगर रेबीज का इलाज समय पर और सही तरीके से किया जाता, तो शायद नितिन की जान बच सकती थी।
रीवा में आवारा कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिसने स्थानीय लोगों के लिए खतरा पैदा कर दिया है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, जिले में डॉग बाइट के मामले बढ़ रहे हैं, लेकिन प्रशासन ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। नितिन की मृत्यु ने इस समस्या की गंभीरता को उजागर किया है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि नगर निगम और प्रशासन आवारा कुत्तों को नियंत्रित करने के लिए टीकाकरण और बंध्याकरण (sterilization) जैसे कदम उठाए।
नरेंद्र नगर के निवासियों ने बताया कि मोहल्ले में कई आवारा कुत्ते घूमते हैं, जो बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरा बन रहे हैं। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “हमारे बच्चे पार्क में खेलने से डरने लगे हैं। प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।” विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, भारत में हर साल रेबीज से लगभग 20,000 मौतें होती हैं, जिनमें से 97% मामले कुत्तों के काटने से होते हैं।
यह घटना रेबीज के प्रति जागरूकता की कमी को दर्शाती है। कई लोग कुत्ते के काटने को हल्के में लेते हैं और समय पर इलाज नहीं करवाते। विशेषज्ञों का कहना है कि कुत्ते के काटने के बाद घाव को तुरंत साबुन और पानी से 15 मिनट तक धोना चाहिए, और 24 घंटे के अंदर एंटी-रेबीज वैक्सीन शुरू कर देनी चाहिए। अगर घाव गहरा हो या सिर, गर्दन जैसे संवेदनशील हिस्सों पर हो, तो रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन देना जरूरी है।
कई बार लोग झाड़-फूंक या घरेलू उपचारों पर भरोसा करते हैं, जो इस मामले में भी हुआ। नितिन के परिजनों ने उसे मऊगंज ले जाकर झाड़-फूंक करवाने की कोशिश की, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि रेबीज के लक्षण दिखने के बाद झाड़-फूंक या देसी उपचार से कोई फायदा नहीं होता।
नितिन की मृत्यु ने रीवा में स्वास्थ्य सेवाओं और आवारा कुत्तों की समस्या पर सवाल उठाए हैं। परिजनों ने जिला अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाया, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि रेबीज का वायरस मस्तिष्क तक पहुँचने के बाद इलाज असंभव है। यह सवाल उठता है कि क्या अस्पताल में समय पर रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन उपलब्ध था, और क्या नितिन को सही समय पर उचित इलाज मिला। जिला कलेक्टर ने इस मामले की जांच का आश्वासन दिया है, और स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि रेबीज के इलाज के लिए बेहतर सुविधाएँ और जागरूकता अभियान शुरू किए जाएँ।
What's Your Reaction?







